Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

दुख-सुख

जीनत की मौत हुई दो बजे रात में तो पुलिस को क्यों बचा रही अखिलेश सरकार – रिहाई मंच

लखनऊ : सीतापुर की महमूदाबाद थाना में युवती जीनत की मौत मामले की जांच के लिए रिहाई मंच जांच दल ने 14 अगस्त को महमूदाबाद का दौरा किया। मंच ने मृतका जीनत के परिजनों, पुलिस महकमे के जिम्मेदारों, एसडीएम, घटना के बाद हुए प्रदर्शन में मारे गए युवक नदीम के परिजनों तथा आम लोगों से मुलाकात की। 

लखनऊ : सीतापुर की महमूदाबाद थाना में युवती जीनत की मौत मामले की जांच के लिए रिहाई मंच जांच दल ने 14 अगस्त को महमूदाबाद का दौरा किया। मंच ने मृतका जीनत के परिजनों, पुलिस महकमे के जिम्मेदारों, एसडीएम, घटना के बाद हुए प्रदर्शन में मारे गए युवक नदीम के परिजनों तथा आम लोगों से मुलाकात की। 

जांच दल के नेता और रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि संगठन अभी और भी दौरे करेगा जिसके बाद अपनी जांच रिपोर्ट जारी करेगा। मंच ने कहा कि पोस्टमार्टम पर सीएमओ के आए बयान कि जीनत की मौत ढाई बजे के तकरीबन हुई, महमूदाबाद पुलिस की उस कहानी को खारिज कर देता है कि उसकी मौत सुबह छह बजे के तकरीबन हुई। ऐसे में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जिस विवेके से मुआवजा देने की घोषणा करते हैं, उसी विवके का इस्तेमाल अपराधियों के पक्ष में न करते हुए इंसाफ के पक्ष में घटना की वास्तविकता जानने के लिए सीबीआई जांच कराएं।

मोहम्मद शुऐब ने कहा कि जीनत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा कि जीनत की मौत रात को ढाई बजे के आस पास हुई थी, पुलिस की कहानी कि जीनत ने थाने के ट\यलेट में सुबह छह बजे आत्महत्या की, को पूरी तरह झूठ ही साबित नहीं करती है बल्कि इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका को भी संदेह के दायरे में ला देती है कि उसने रात में हुई मौत को क्यों सुबह छह बजे हुई मौत बता रही है। 

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना हो जाने के बावजूद थाना प्रभारी को निलंबित न किया जाना और मृतका के पिता पर एफआईआर दर्ज न कराने का दबाव बनाना और कोतवाली में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाने वाले लोगों को उनके घरों से उठाकर जेल में डाल देना पूरे मामले में पुलिस को कटघरे में खड़ा कर देता है। मोहम्मद शुऐब ने कहा कि पुलिस की कहानी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आए अंतर्विरोध के बावजूद महमूदाबाद थाना महकमे को अब तक निलंबित न किया जाना साबित करता है कि सरकार ऐसे पुलिस कर्मियों को सिर्फ बचा ही नहीं रही है बल्कि ऐसी और भी घटनाओं को आमंत्रित कर रही है। 

उन्होंने कहा कि ऐसी ही घटना लखीमपुर में सोनम हत्याकांड में रूप में सामने आई थी जिसमें जन दबाव में पूरे थाने को ही निलंबित करके सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था। लेकिन यहां सरकार पुलिस को ही बचाने में लगी है। रिहाई मंच नेता ने कहा कि घटना के बाद हुए प्रदर्शन में नदीम पुलिस की गोली से मारा गया, लेकिन उसकी हत्या को प्रशासन यह कहकर प्रचारित करने में लगा है कि वह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई फायरिंग में मारा गया। जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से कोई फायरिंग हुई ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि रिहाई मंच जांच दल की तफ्तीश अभी जारी है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...