सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, हमने कब दिया आधार को मोबाइल नंबर से जोड़ने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा लिए गए मोबाइल फोन को आधार से अनिवार्य रूप से जोड़ने के फैसले पर सवाल खड़े किए. कोर्ट ने कहा यह भी कहा कि सरकार ने  बीते साल 6 फरवरी उनके द्वारा दिए गए आदेश की गलत व्याख्या की. साथ ही कोर्ट के यूजर के कंपल्सरी वेरिफिकेशन वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को केंद्र सरकार ने औजार के तौर पर प्रयोग किया.

सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद सरकार से पूछा कि उन्होंने आधार को सिम से जोड़ने का कोई आदेश नहीं दिया फिर सरकारी सर्कुलर में इसे बतौर कोर्ट आदेश कैसे संबोधित किया गया. गौरतलब है कि तब इस मामले की हियरिंग के समय इंडियन यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी की तरफ से वकील राकेश द्विवेदी ने दलील थी कि आधार वेरिफिकेशन से आतंकवादियों के सिम और मोबाइल पर किए जाने वाले कॉल्स की पहचान हो सकेगी.

आगे द्विवेदी ने कहा कि दूरसंचार विभाग ने ई-केवाईसी के जरिए मोबाइल नंबरों के वेरिफिकेशन के बारे में कहा था और टेलीग्राफ अधिनियम के तहत सरकार को सेवा प्रदाताओं के लिए लाइसेंस की शर्तों का फैसला करने का अधिकार है. इस पर बेंच ने पूछा था कि आप (टेलीकॉम डिपार्टमेंट) सेवा प्राप्त करने वालों के लिए मोबाइल फोन से आधार को जोड़ने के लिए शर्त कैसे लगा सकते हैं?