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प्रदेश

जगह – बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन , आने वाले दिनों में इस शर्मनाक घटना के लिए मामा के वादों और उनकी नाकारी पुलिस को लोग याद रखेंगे..!

कन्हैया शुक्ला

मध्यप्रदेश में भांजियों , और मां बहन के सुरक्षा और खुशहाली के पोस्टर और सरकारी बड़ी-बड़ी योजनाएं को जब भी आप देखते हैं या महिला सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री की बातों को ज़ब मंचों से सुनते हैं तो आपके मन में क्या ख़्याल आता है..?

ये बात बताइएगा ज़रूर..लेकिन पहले उज्जैन की इस घटना को जान लीजिए..

क्यों की राज्य में बेटियों के सुरक्षा के लिए हमेशा ये सरकार अव्वल नंबर पर भाषण बाज़ी करती हुई दिखती है.. उज्जैन में 12 साल की बच्ची के साथ हुई इस घटना ने समाज को सब सच दिखा दिया है .. सुरक्षा और कानून व्यवस्था को स्थापित करने वाले जितने भी लोग मंचों और मीडिया में कसीदें पढ़ते हैं उनका चेहरा अब सबके सामने है ..

संदीप अध्वर्यु का कार्टून

उज्जैन पुलिस अपराधियों में कानून का कितना डर बना के रखती है ..जिससे अपराधी पुलिस से कांपते है इस बात का आंकलन इस घटना के बाद समझा जा सकता है.. इस घटना ने सिस्टम के सभी झूठे दावों की पोल खोल दी है .. मध्यप्रदेश में पुलिस ने अपराधियों को कितना डरा के रखा है ?..कितना खौफ है कानून और पुलिस का ये 12 साल की बच्ची के चीखों से अहसास किया जा सकता है ..

क्या है इंसान और हैवान ..? कभी-कभी ये अंतर करना बहुत मुश्किल होता है .. उज्जैन में इस घटना की अगर आप वीडियो देखेंगे और अहसास करेंगे की क्या हुआ होगा..? तो आपकी रूह कांप जाएगी ..अब आप ये सवाल भी कर सकते हैं की इस तरह की घटनाओं के लिए सरकार और पुलिस कैसे दोषी होती है ..? वो तो कानून और योजनाएं बनाते हैं , अपराधियों को पकड़ते हैं सजा भी दिलाते हैं तो सरकार , मुख्यमंत्री और उनकी पुलिस की क्या गलती है ..?

तो हां अब बताते हैं की सरकार और पुलिस की क्या गलती है ..मुख्यमंत्री की ये गलती है की वो सुरक्षा का आश्वासन देते हैं ..पुलिस सुरक्षा का वादा करती है ..और उससे बच्चियों के अंदर एक आत्मविश्वास होता है की मेरे मामा और पुलिस अंकल ने वादा किया है की मैं इस राज्य में सुरक्षित हूं .. तभी तो वो निकलती हूं … वो सड़क,बाजार में घूम सकती हैं ..वो सोचती है कि सुरक्षित घर पहुंच जाएगी .. क्योंकि खुद CM बोलते हैं की मैं प्रदेश के सभी बेटियां भांजी हैं इसलिए ही तो उनके वादों को सच मानती हैं जो उनसे खुद CM ने किया है ..बस यही गलती है सिस्टम की ..अगर वो सुरक्षा का वादा न करें तो बेटियां खुद अपनी सुरक्षा का ख्याल करेंगी , परिवार के साथ निकलेंगे या नहीं निकलेंगे ..तो आखिर ये झूठा प्रचार क्यों किया जाता है ..? नही हैं सुरक्षित तो बता दें कि नही निकलो बाहर हैवान घूम रहे और उन पर लगाम नहीं लगा सकते ..जब कर नहीं पाते तो ये सुरक्षा की गारंटी क्यों देना..?

इस घटना को जानने के बाद सच में कभी-कभी मन में आता है की वहशियों को क्या सज़ा मिलनी चाहिए ..? क्या उनके अंग को काट के उनके मुंह में डाल देना चाहिए ..? क्या उनके शरीर का अंग-अंग सब काट-काट के अलग कर देना चाहिए ..? वो अपराधी कितने दर्द देने के हकदार होंगे , जो उन्हें मिलना चाहिए ? जिन्होंने इस 12 साल की बच्ची के साथ इस घटना को अंजाम दिया है ..? आखिरकार उन वहशी दरिंदो की क्या सजा होनी चाहिए ..? बताइए आप उसकी उम्र सिर्फ 12 साल है , सरकार,पुलिस सिस्टम और समाज के लिए उसके दर्द और चीखों की क्या वैल्यू होनी चाहिए ..?

शर्म आनी चाहिए , लानत है उन लोगों पर जिनसे उस बच्ची ने मदद मांगी ..और वो उस लायक नही थे कि उस बच्ची के शरीर को ढक दें ..मासूम बच्ची जान बचा कर भागी तो ढाई घंटे तक लोगों से मदद मांगी लेकिन किसी ने मदद नहीं की और ढाई घंटे तक भटकती रही और उसके बाद बदहवास होकर मुरलीपुरा में बेहोशी की हालत में मिली.. इस घटना ने असल में समाज , सरकार और पुलिस सबको नंगा कर दिया है .!

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और पूरे राज्य के मामाश्री अभी चुनावी बिसात बिछाने में व्यस्त हैं ..जबकि जान रहे हैं की अबकी बार पत्ता साफ़ हो सकता है पर फिर भी सत्तासुख की लालसा और लालच ऐसा है की पेट भरता ही नही ..अभी आज ही शायद बाबा बागेश्वर के दरबार में जी-हजूरी लगाते हुए CM साहब दिखेंगे .. क्यों की वहां से वो राज्य के भांजियों और महिलाओं की सुरक्षा के कसीदें पढ़ेंगे और दरबार में बाबा और जनता तालियां बजाएंगी .. सिर्फ ये ही क्यों विपक्ष भी धार्मिक भावनाओं से वोट बैंक का रास्ता तय कर रही है ..सीएम साहब के पास दरबार में जाने का पर्याप्त समय है पर उस थाने में जा के बैठने का टाइम नही है जिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत इस घिनौने घटना को अपराधियों ने अंजाम दिया है ..सोचिए उनके लिए क्या महत्वपूर्ण है ..? न्याय या दरबार ..?

एक 12 साल की बच्ची सड़कों पर चीखती और तड़पती रही ..जिसे ये गुमान रहा होगा कि वो उस राज्य में है जहां का मुख्यमंत्री उसका मामा है ..जो पूरे राज्य के बेटियों-बच्चियों को अपनी भांजी होने का सर्टिफिकेट हर मंच पर देते हैं ..क्या उनके या उनके गृहमंत्री के पास इतना समय नहीं था की वो खुद जा के उज्जैन के पुलिस कर्मियों को भी इस घटना के बाद सम्मानित करें ..? की उन लोगों ने कानून का जो डर बना के रखा है ..जो सुरक्षा प्रदान करने का दम भरते हैं ..उसका असर कितना
अपराधियों में दिखता है.!

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वाह मामा जी वाह .. गज़ब सुरक्षा व्यवस्था है आपकी , उस 12 साल की बेटी की हर चीख , उसकी पीड़ा और उसका बेबस हो के मदद मांगना आपके लिये इतने सालों के मुख्यमंत्री बने रहने का ईनाम है , और उज्जैन पुलिस का ये करेक्टर प्रमाण पत्र है , सीएम साहब जब आपको दरबार , रैली , और मंच से वाहवाही योजनाओं की घोषणाएं करने से फुर्सत मिल जाए तो सोचिएगा की आपने इतने साल मुख्यमंत्री रहते हुए बच्चियों के साथ क्या वादा किया है..? और इस घटना के आरोपियों के साथ क्या करना चाहिए ..? जिन्होंने मध्यप्रदेश के बच्चियों के उस विश्वास को खत्म कर दिया जो मुख्यमंत्री ने किया है ..!!

Twitter: @kanhaiyaa

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