आपको देश के बारे में सोचने का अधिकार नहीं है

लोकेंद्र आप अपना काम करें, देश की समस्याओं पर बोलने का कोई अधिकार आपको नहीं है। अगर आप डाक्टर हैं तो लोगों का इलाज करें। शिक्षिक हैं तो सिर्फ वही पढ़ाएं जो किताबों में लिखा है। इंजीनियर है तो बिल्डिंग बनाएं, देश निर्माण करने की आवश्यकता नहीं। यही संदेश दिया है कांग्रेस ने चार-पांच जून की दरमियानी रात रामलीला मैदान में योग गुरु बाबा रामदेव के अनशन पर बर्बर कार्रवाई कर। कांग्रेस और उनके नेताओं ने मीडिया के सामने खुलकर कहा कि हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन कर रहे इस देश के नागरिकों पर आंसू गैस के गोले दागकर और लाठियां भांज कर एकदम सही किया है।

इतना ही नहीं उन्होंने उन तमाम लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का मन बना लिया है, जिन्होंने बाबा रामदेव का साथ दिया है या जिन्होंने भ्रष्टाचार के विरोध में अपनी आवाज उठाने का प्रयास किया। पूरी कांग्रेस और उनके बड़बोले नेता बकबक करने में लगे हैं कि बाबा रामदेव योग गुरु हैं, उन्हें लोगों को सिर्फ योग सिखाने का काम ही करना चाहिए। भ्रष्टाचार के खिलाफ देश जागरण की जरूरत नहीं। उनकी मंशा साफ देश को लूटने की दिखती है। वे चाहते हैं कि हम आराम से भ्रष्टाचार करते रहें और कोई हमें कुछ न कहे। उन्हें पता है जनता जाग गई तो हमने देश में जो लूट-खंसोट मचा रखी है वह बंद करनी पड़ेगी। मुझे आज तक यह समझ नहीं आया कि यह कौन सा तर्क है कि आप जो काम कर रहे हैं वही करें। देश की समस्याओं के बारे में कुछ भी कहने का आपको अधिकार नहीं। अरे, इस देश के हर एक नागरिक का अधिकार है कि वह देश में चल रही गड़बड़ियों को उजागर कर सके, उनके खिलाफ आवाज बुलंद करे। इस देश में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में राजपाठ में साधु-संतो, शिक्षिकों और उपदेषकों ने हमेशा से मार्गदर्शन दिया है। इस देश के इतिहास में तो इसकी लम्बी परंपरा है।

कांग्रेस और उसके नेताओं ने 60 सालों में इस देश को जमकर लूटा है। अब जनता जाग रही है तो उसे डर लग रहा है कि उसका गोरखधंधा कैसे जारी रहेगा। कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ठग है, धोखेबाज, बर्बर है। उसने पहले अन्ना हजारे को धोखा दिया और अब बाबा रामदेव के अनशन पर बल प्रयोग किया है। वैसे हमेशा से ही कांग्रेस के शासनकाल में जनआंदोलनों का यही हश्र होता आया है। आपातकाल में भी लाखों लोगों पर अनगिनत अत्याचार किए गए। पांच जून की दरमियानी रात जो हुआ उसका सारे देश में सब ओर से विरोध हो रहा है। कांग्रेस के इशारे पर रात में सोते हुए लोगों पर लाठीचार्ज जैसी दमनात्मक कार्रवाई की गई। पांडाल में हजारों महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ सो रहीं थीं। वृद्ध साधु-संन्यासी और देशभर से आए हजारों आमजन दिनभर की थकान के बाद गहरी नींद में थे। ऐसे वक्त की गई बर्बर पुलिया कार्रवाई की तुलना जलियांवाला बाग से की जा रही है। जो कि अतिश्योक्ति कतई नहीं। कल्पनामात्र से ही आंखें भर आती हैं कि अपरा-तफरी में छोटे-छोटे बच्चों की क्या हालत हुई होगी। गरीबों का मसीहा बनने का ढोंग करने वाला राहुल गांधी इन्हें देखने नहीं आया और न ही का बयान जारी किया कि यहां महिलाओं के साथ कांग्रेस के इशारे पर कितनी बर्बता बरती गई। लेकिन, उस दयालु, करुणा के प्रतीक, मानवता के रक्षक राहुल गांधी का कहीं कोई अता-पता नहीं।

ये कैसी सरकार है जो एक और तो भ्रष्टाचारियों और आतंकवादियों के खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं कर रही है वहीँ निर्दोष और समस्याओं से घिरे लोगों पर आसू गैस के गोले दाग कर अत्याचार कर रही है…   क्या ये सरकार समाजकंटकों के बचाव और देश भक्तों के विरोध में है…???

किसने क्या कहा

नरेन्द्र मोदी – इस घटना को रामलीला मैदान में रावण लीला करार दिया।

लालकृष्ण आडवाणी – बाबा रामदेव की गिरफ्तारी और लोगों पर लाठीचार्ज की तुलना जलियांवाला बाग कांड और आपातकाल की।

अन्ना हज़ारे – बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर कल मध्यरात्रि को हुई पुलिस कार्रवाई देश की लोकशाही पर कलंक की तरह है और इस कार्रवाई के लिए सरकार को सबक सिखाने वाला आदोलन करने की जरूरत है।

नितिन गडकरी – शनिवार को बाबा रामदेव के खिलाफ की गई कार्रवाई इमर्जेंसी के दिनों की याद दिलाती है। पार्टी अध्यक्ष ने कहा, ‘ यह लोकतंत्र को कलंकित करने वाली घटना है , जिसे सोनिया गांधीऔर मनमोहन सिंह के इशारे पर अंजाम दिया गया। पुलिस और आरएएफ ने लोकतांत्रिक तरीके से अनशन कर रहे निहत्थे लोगों पर अत्याचार किया , जो दुखद है।

संतोष हेगड़े – कर्नाटक के लोकायुक्त और लोकपाल विधेयक मसौदा समिति में समाज की ओर से शामिल सदस्य संतोष हेगड़े ने कहा कि बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर की गई पुलिस कार्रवाई आपातकाल के दिनों की याद दिलाती है।  पुलिस ने रामलीला मैदान पर धारा 144 लगा दी। धारा 144 तब लगाई जाती है जब कानून व्यवस्था से जुड़ी स्थिति बिगड़ने की आशंका होती है। लेकिन जब पुलिस कार्रवाई हुई तब रामदेव, उनके समर्थक, महिलाएं और बच्चे सो रहे थे। सोते लोग कैसे कानून व्यवस्था से जुड़ी स्थिति बिगाड़ सकते हैं।

बाबा रामदेव – हरिद्वार पहुंचने के बाद कहा कि यूपीए सरकार मेरे एन्काउंटर की साजिश कर रही थी। उन्होंने प्रेस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अनशन से पहले होटल में केंद्रीय मंत्रियों के साथ मीटिंग के दौरान भी उन्हें अनशन न करने के लिए धमकी दी गई थी। सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यूपीए अध्यक्ष के निर्देश पर ही रामलीला मैदान में जमा महिलाओं और बच्चों बर्बर कार्रवाई की गई।

शांति भूषण –  पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई से आपातकाल की याद आ जाती है। उन्होंने कहा कि यह काफी निंदनीय है और प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर इस्तीफा देना चाहिए।

प्रकाश जावड़ेकर –  सभी को इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने इसे आजादी और लोकतंत्र, दोनों पर हमला बताया है।

राम माधव – सरकार का रवैया हैरान करने वाला है। सरकार भ्रष्टाचारियों से डर गई है, जिस कारण आंदोलन को जबरन खत्म करवाया गया। स्वामी अग्निवेश ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि वे इसका विरोध करेंगे।

अरविंद केजरीवाल –  केंद्र सरकार ने बाबा और अन्ना दोनों को धोखा दिया है।

लेखक लोकेन्‍द्र सिंह राजपूत पत्रिका, भोपाल में सब एडिटर हैं.

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