राजकपूर के साथ बिताए लम्हे, राजकुमार की ठाठ के गवाह, धर्मेन्द्र की जिंदादिली के किस्से, दारा सिंह की ताकत को करीब से देखने और अमिताभ के साथ बिताए पल… बस यही उसकी दौलत हैं… अफसोस कि वह इस समय कंगाल है। हजार डेढ़ हजार रूपए की नौकरी करने करीब दस किलोमीटर का सफर तय करता है और फिर अपने गांव लौट जाता है। उसका कद महज दो फुट है पर इरादे बुलंद। वह कहता है, ऊपर वाले ने उसे महज दो फीट का बनाया है लेकिन उसने अपने कद की कमी को कभी आडे़ नहीं आने दिया और बुलंद हौसलों के साथ दुनिया का सामना किया लेकिन अब वह थक चुका है। बात हो रही है करीब सौ से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम कर चुके कलाकार नत्थू दादा की।
राजकपूर के साथ मेरा नाम जोकर से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले नत्थू दादा अब रिटायरमेंट ले चुके हैं फिल्मों से और गरीबी के

नत्थू
इनकी माने तो यह दुनिया का सबसे छोटे कद के व्यक्ति हैं। लगभग 62 साल के इस शख्स की खूबी यह है कि एक समय में इसने बालीवुड में सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया था और राजकपूर, अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, राजकुमार, प्रेमनाथ, दारा सिंह, अमजद खान, फिरोज खान, डैनी जैसे कई बड़े कलाकारों के साथ इसकी कई फिल्में चर्चित रहीं। उस दौर की कुछ फिल्मों में इसने अपने बौने कद के चलते मुख्य भूमिका भी निभाई। आज यह कलाकार बालीवुड की चकाचौंध से दूर अपने गांव में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है और अपने पुराने दिनों की याद को जिंदा रखे हुए है। इसने बताया कि उसे फिल्मों में काम करने का काफी शौक था और जब काफी समय पहले उस दौर के मशहूर कलाकार दारा सिंह भिलाई में कुश्ती के कार्यक्रम में आए तो वे वहां उनकी कुश्ती देखने गए और उनसे मिले। उनके आमंत्रण के बाद वे मुंबई गए जहां दारा सिंह ने नत्थू दादा को कई फिल्में दिलवाईं।
नत्थू दादा ने बताया कि उन्होंने राजकपूर के साथ मेरा नाम जोकर में बौने जोकर की भूमिका निभाई। इसके बाद उनकी कई फिल्में आईं। अमिताभ बच्चन के साथ कस्मे वादे फिल्म में काम किया। उन्होंने एक किस्सा बताते हुए कहा कि किस तरह फिरोज खान अभिनीत फिल्म खोटे सिक्के का नाम खोटे सिक्के पड़ा। उनके मुताबिक फिल्म में उनका अच्छा रोल था। फिल्म का नाम पहले कुछ और था लेकिन एक दिन बात करते करते उन्होंने फिरोज खान को कहा कि मैं तो खोटा सिक्का हूं, जो यहां चल रहा हूं तो फिरोज खान ने फिल्म का नाम ही खोटे सिक्के रख दिया। उन्होंने बताया कि यह फिल्म काफी हिट रही।
अपने पुराने अनुभव बांटते हुए श्री नत्थू दादा ने बताया कि उस दौर में उनके कई कलाकारों से काफी अच्छे संबंध थे। राजकपूर के परिवार में उनका

एक फिल्म के दृश्य में नत्थू
नत्थू दादा का दावा है कि वे दुनिया के सबसे छोटे कद के व्यक्ति हैं और इस छोटे कद के बावजूद उनकी वैवाहिक जिंदगी की गाड़ी अच्छे से चलती रही। उनके परिवार में उनके और उनकी पत्नी के अलावा पांच बच्चे भी हैं। इन बच्चों की देखभाल और पढ़ाई का खर्चा उन्हें ही उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि वे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री और हर एक द्वार में अपने लिए अपने परिवार के लिए जा चुके हैं पर उन्हें हर जगह निराशा ही हाथ लगी। वे निराश होकर कहते हैं कि यदि वे सक्षम परिवार से होते तो उनकी पूछ होती, उन्हें गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए प्रयास होता पर भाई भतीजावाद के इस युग में वे अपनी समस्याओं के साथ अकेले पड़ गए हैं। नत्थू दादा ने अपील की है कि उस जैसे बौने कलाकार की मदद के लिए प्रयास होना चाहिए और यदि यह प्रयास हुआ तो वे छत्तीसगढ़ और अपने गांव अपने शहर का नाम देश में रौशन कर सकते हैं।
बहरहाल, नत्थू दादा फिलहाल राजनांदगांव शहर में बच्चों के मनोरंजन के लिए बने चौपाटी में आने वाले बच्चों के मनोरंजन के लिए मौजूद रहने का काम करते हैं और इसके एवज में उन्हें नगर निगम की ओर से डेढ़ हजार रूपए मासिक मिलता है, लेकिन इतनी राशि में परिवार चलाना नत्थू दादा को भारी लगता है। फिल्मों और राजनीति की बेदर्द दुनिया को इस बौने कद के लेकिन मजबूत इरादों वाले इंसान की मदद कर एक मिसाल पैदा की जानी चाहिए।
लेखक अतुल श्रीवास्तव राजनांदगांव में सहारा समय के संवाददाता हैं.

