चौथा स्‍तम्‍भ बेबस, खबर बेअसर!

खेत : मीडिया की खबरों पर अब नहीं लिया जा रहा कोई एक्‍शन : अपनी फसल को बरबाद होते देखने को मजबूर हैं बाड़मेर के किसान : ऐसा माना जाता हैं कि देश का चौथा स्तम्भ कहा जाने वाला मीडिया जब किसी भी मुद्दे को उठाता हैं तो उस पर एक्शन होता हैं। पर यह शायद सब जगह सच नहीं होता है, तभी तो राजस्थान के बाड़मेर जिले में मीडिया की खबरों का असर शासन-प्रशासन पर कुछ नहीं हो रहा है। बाड़मेर जिले के बालोतरा उपखंड क्षेत्र के डोली गांव में किसान एक बड़ी समस्‍या से जूझ रहे हैं। इसकी खबरें प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोग बड़ी जिम्‍मेदारी से उठा रहे है। इसके बाद भी यहां का किसान पिछले एक महीने से शासन-प्रशासन स्‍तर से कार्रवाई होने की बाट जोह रहा है।

हर रोज खबरें प्रकाशित होने के बावजूद प्रशासन व राज्य सरकार कोई कारगर कदम नहीं उठा पाई हैं। अब ऐसा लग रहा है कि राजस्‍थान में किसानों के साथ मीडिया की आवाज भी नेताओं और प्रशानिक अधिकारियों के दर पे दम तोड़ रही हैं। बालोतरा उपखण्ड के जोधपुर रोड़ पर स्थित डोली गांव में लगभग एक माह पहले हुई मूसलाधार बारिश हुई। इस बारिश के चलते जोधुपर केऔद्योगिक ईकाईयों का प्रदूषित एवं रसायन युक्त कचरा और तेलिए (तेजाब सहित कई प्रकार रसायन जो बेहद हानिकारक व बीमारियां फैलाने वाले होते हैं) का रंगीन पानी बरसाती नाले से होते हुए डोली गांव में आ गया। जिसके चलते यहां लहलहा रही फसल को पूरी तरह तबाह कर गया। इस मानव जनित और प्राकृतिक हादसे के शिकार किसानों ने कई बार शासन-प्रशासन से अपनी बात कही। सुनवाई न होने पर सड़क जाम किया, पुतला फूंका। फिर भी किसानों की समस्‍या पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अखबार और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया भी इन किसानों की समस्‍याओं को गंभीरता से उठाया। इसके बाद भी इस समस्‍या पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इस घटना के चलते अब किसान नत्‍था बनने को मजबूर हो रहे हैं।

इस संबन्ध में स्थानीय से लेकर राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर का मीडिया पिछले एक माह से लगातार खबरें प्रकाशित कर रहे हैं, लेकिन किसानोंपानी की हितैषी कही जाने वाली राजस्थान सरकार की नींद खुल नहीं रही हैं। यह अलग बात हैं कि यहां का प्रशासन हर रोज डोली गांव का चक्कर जरूर लगा रहा हैं, पर किसानों को आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। हर रोज बालोतरा के उपखण्ड अधिकारी किसानों से वार्ताएं कर रहे हैं लेकिन हल नहीं निकल रहा हैं। स्थिति यह है कि ना तो आज तक जोधुपर से आ रहा पानी कम हुआ हैं और ना किसानों का रोष। यहां का प्रशासन इस मामले को ना तो राज्य सरकार के सामने पेश कर पाया हैं और ना ही पड़ोसी जोधुपर जिला प्रशासन से वार्ता कर मसले को सुलझा रहा है। जिसके चलते जोधपुर से आने वाला गंदा और विषैला पानी निरन्तर आ रहा हैं। यह पानी किसानों के पीने के पानी में भी मिल गया हैं, जिससे किसानों के सामने पीने के पानी का भी संकट पैदा हो गया हैं। हर रोज खबरों से अखबारों के पेज काले करने के बाद भी कुछ भी हल नहीं निकल रहा हैं, जिससे यहां के लोग मीडिया को कमजोर समझने लग गये है। लोगों का मीडिया से विश्वास भी कम होने लगा हैं।

बाड़मेर से बंशीलाल से की रिपोर्ट.

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