बंगाल चुनाव : तृकां विधायक की कारगुजारी

राज्य में विधानसभा चुनाव की तिथि का एलान हो गया है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की ओर से जहां उम्मीदवारों के नाम पर विचार-विमर्श हो रहा है। वहीं, कई विधायक अप्रत्यक्ष रूप से जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करने में जुट गए हैं। ज्यों-ज्यों चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं। त्यों-त्यों विधायक हो या संभावित उम्मीदवार जनता तक पहुंचने का मौका तलाशने में लग गए हैं। इसी क्रम में जोड़ासांकू क्षेत्र के तृणमूल कांग्रेस के विधायक को बधाई देते कई होर्डिंग लगे हैं। इन होर्डिंग में वार्ड नंबर 25, 41 व 42 में विधायक कोटे से वार्ड के विकास के लिए मुहैया कराई गई राशि का उल्लेख है। वार्ड नबंर 25 में 32 लाख, वार्ड नबंर 41 में 25.4 लाख और वार्ड नंबर 42 में 36 लाख का जिक्र किया गया है। मजे की बात यह है कि इन होर्डिंगों में प्रचारक, प्रसारक व मुद्रक का उल्लेख नहीं है।

होर्डिंग में विधायक को संबोधित करते हुए श्री, धन्यवाद व आदरणीय शब्‍द का इस्तेमाल किया गया। इन होर्डिंगों में न तो कहीं तृणमूल कांग्रेस का जिक्र है और न ही पार्टी का चुनाव चिन्ह दर्शाया गया है। वार्ड नंबर 25 व 41 में कुछ स्थानों पर लगे होर्डिंग में स्थानीय पार्षद तक का नाम नहीं है। केवल प्रसन्न मुद्रा में विधायक की फोटो और बड़े-बड़े अक्षरों में उनका नाम, प्रदत्त राशि व मद का जिक्र किया गया है। जबकि वार्ड नंबर 42 में लगे होर्डिंग में पार्षद के नाम के साथ-साथ उसकी फोटो भी दिखाई दे रही है।

इस बाबत जब वार्ड नंबर 25 की पार्षद व तृणमूल कांग्रेस की नेता स्मिता बक्सी ने बात की गई तो उन्होंने बताया कि होर्डिंग मैंने नहीं लगाया है। संभवत: विधायक ने लगवाई है। इस सिलसिले में वार्ड नबंर 41 की पार्षद रीता चौधरी से तो बात नहीं हो सकी, लेकिन वार्ड नबंर 42 की पार्षद व भाजपा की नेता सुनीता झंवर ने भी कहा कि होर्डिंग मैंने नहीं लगाई है। यह पूछे जाने पर कि होर्डिंग किसने लगाई है और आप की फोटो होर्डिंग लगाने वाले को कहां से मिली? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि होर्डिंग विधायक ने लगाई है। रही बात मेरी फोटो की तो टेक्नोलॉजी इतनी हाई हो गई है कि कंप्यूटर व इंटरनेट के माध्यम से किसी नेता की फोटो हासिल करना कोई मुश्किल काम नहीं। उन्होंने कहा कि बिना उनकी जानकारी के लगे होर्डिंग को उन्होंने विरोध भी जताया था।

वार्ड नबंर 25, 41 व 42 में लगे करीब साढ़े चार दर्जन से ज्यादा होर्डिंगों पर स्थानीय लोगों का कहना है कि ये विधायक की तरफ से सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया है। लोगों ने बताया कि राज्य में 294 विधानसभा सीट है और कोलकाता शहर में 11सीट। सभी विधायक अपने क्षेत्र के लिए विधायक कोटे से धनराशि मुहैया कराते हैं और लगभग सभी विधायक इलाके के विकास के लिए इसे खर्च भी करते हैं, लेकिन दिनेश बजाज की तरह कोई प्रचार नहीं करता। लोगों ने इन होर्डिंगों पर होने वाले खर्च को अपव्यय और विधायक के प्रचार लोभी होने का संकेत बताया। लोगों ने कहा कि जहां चुनाव के मद्देनजर शहर से होर्डिंग समेत अन्य प्रकार की प्रचार सामग्री हटाई जा रही है। वहीं, विधायक द्वारा खुद को संबोधित करते धन्यवाद, श्री व आदरणीय शब्द उनकी मानसिकता को दर्शाता है।

होर्डिंग लगाने के मसले पर जा जोड़ासांकू के विधायक दिनेश बजाज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ये होर्डिंगें पब्लिक यानी जनता ने लगाई है। यह पूछे जाने पर कि होर्डिंगों में प्रचारक-प्रसारक व मुद्रक का उल्लेख क्यों नहीं है? इसका जवाब भी उन्होंने जनता से मांगने को कहा। जनता के पास मुहैया कराई गई राशि के आंकड़े कहां से आए? क्या तीनों वार्डों की जनता को आप की एक ही फोटो मिली (जो होर्डिंग में छपी है)? क्या तीनों वार्डों की जनता ने एक ही होर्डिंग वालों से होर्डिंग बनाई? क्यों तीनों वार्डों में लगे होर्डिंगों की भाषा लगभग मेल खाती है? इन सवालों के जवाब में विधायक ने कुछ नहीं कहा।

इन होर्डिंग को बनाने वाले कारीगर अजित दास ने बताया कि उन्होंने विधायक दिनेश बजाज के कहने पर सांबधित तीनों वार्डों के लिए कुल 56 होर्डिंग बनाई थी। पहले चरण में 22 और इसके बाद में 34। उन्होंने बताया कि होर्डिंग की डिजाइन, लैंग्‍वेज (भाषा) और साइज (आकार) सा कुछ विधायक ने तय किया था।

लेखक शंकर जालान पत्रकार हैं तथा शुक्रवार मैगजीन से जुड़े हुए हैं.

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