बिहार में नहीं चलेगी नकारात्मक राजनीति!

: आराजकता से बाहर निकल रहा है बिहार : अब जातिवाद नहीं विकास की बात करने वाले दलों की सुनेगी जनता : बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में जुबानी जंग तेज़ हो गई है। लेकिन राजनीतिक दल जिस तरह से नकारात्मक राजनीति का सहारा लेकर अतार्किक बयानबाजी कर रहे हैं, वह इन दलों को काफी महंगा पड़ने वाला है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव औऱ उनके सहयोगी खुले आम कह रहे हैं कि नीतीश कुमार ने पांच साल में बिहार को बर्बाद कर दिया। इससे बड़ा और शर्मनाक झूठ औऱ क्या हो सकता है। क्या लालू यादव बिहार में बने बेहतरीन सड़क को विकास नहीं मानते? कानून व्यववस्था की बेहतर स्थिति को बिहार की बर्बादी मानते हैं! देश-विदेश से बिहार के लोग घर लौटने लगे हैं, क्या ये बिहार की बर्बादी है? इस तरह की बयानबाजी कर लालू यादव अपने कैडर वोटर का भी भरोसा खो देंगे।

लालू यादव अगर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं या वोटर से भी पूछेंगे तो भले ही नीतीश सरकार की कोई तारीफ नहीं करे लेकिन ये शायद ही कोई कहेगा कि पांच साल में बिहार बर्बाद हो गया। तो ये क्या छोटी सी बात लालू यादव के समझ में नहीं आती। इस तरह के बयान लालू को चुनाव में काफी महंगा पड़ सकता है। क्योंकि अगर बेहतर सड़कें, कानून व्यवस्था की बेहतर स्थिति लालू यादव औऱ उनकी पार्टी को विकास नहीं लगता तो फिर उनकी नज़र में विकास क्या है? बदहाल सड़कें, अराजकता, गुंडागर्दी, जातिवाद, इसको वे विकास मानते हैं? अगर लालू यादव के विकास के मापदंड ये सारी चीज़ें हैं तो माफ कीजिए बिहार की जनता ने अपना टेस्ट बदल लिया है। दरअसल लालू यादव ऐसी राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें विकास या सुशासन कोई एजेंडा ही नहीं होता। पिछले विधानसभा चुनाव में लालू ने एक अंग्रेजी अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा भी था कि बिहार में विकास के नाम पर नहीं बल्कि जाति के नाम वोट दिये जाते हैं। लेकिन वह दौर अब बीत चुका है। बिहार की जनता ने विकास का स्वाद चख लिया है।

सिर्फ लालू यादव ही क्यों सत्ता की मद में चूर कांग्रेस पार्टी का भी यही हाल है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी, जो लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में नीतीश की बेहतर काम के लिए तारीफ करते थे, वे ही अब बिहार में जाकर कहते हैं कि बिहार में विकास कहीं नहीं दिखता। राहुल गांधी पहले सही थे या अब? अगर राहुल गांधी अब सच बोल रहे हैं तो लोकसभा चुनाव से पहले सियासी चाल चल रहे थे ताकि सरकार ख़तरे में पड़े तो नीतीश की तरफ दाना फेंका जा सके या फिर राहुल गांधी ज़मीनी सच्चाई को झुठला रहे हैं या फिर कांग्रेस के युवराज जनता को बेवकूफ समझ रहे हैं कि वह  जब भी जिस तरह का बयान दें लोग उसे मान ले।

एक बात औऱ जो हर जगह राहुल गांधी का तकिया कलाम बना हुआ है-दो भारत। एक अमीरों का भारत, दूसरा ग़रीबों का भारत। पश्चिम बंगाल में उन्होंने कहा-एक अमीरों का बंगाल यानी सीपीएम का बंगाल है और दूसरा गरीबों का बंगाल। राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि अगर बंगाल की ग़रीबी की पीछे सबसे ज़्यादा समय तक शासन करने वाले सीपीएम जिम्मेदार हैं तो क्या पूरे देश की ग़रीबी या यूं कहूं की गरीब भारत के लिए सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले कांग्रेस को जिम्मेदार नहीं मानना चाहिए? इसलिए राहुल जी देश की हक़ीकत को समझे बिना इस तरह की बयानबाजी आपके लिए घातक साबित हो सकती है।

अंत में लालू यादव औऱ राहुल गांधी दोनो से कहना चाहूंगा कि अगर वाकई बिहार में सत्ता पाना है तो नीतीश की बुराई करने से काम नहीं चलेगा। नीतीश कुमार ने विकास की जो लकीर खींची है, उसको आगे बढ़ाकर ही सत्ता पाना मुमकिन है। इसलिए जरूरी है कि नीतीश कुमार ने जो भी विकास कार्य शुरू किये हैं, या तो उनकी थोड़ी-बहुत तारीफ कर या उस पर मौन रहकर, उससे औऱ बेहतर करने का वादा करके ही बिहार की जनता का दिल जीता जा सकता है।

लेखक मृत्युंजय कुमार झा पेशे से पत्रकार हैं। इनसे संपर्क mrituenjayj@gmail.com  पर किया जा सकता है।

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