बीहड़ फिल्‍म के निर्माता कोई डान हैं क्‍या?

दिनेश शाक्‍य हम हमेशा से देखते रहे हैं कि किसी भी फिल्म की शूटिंग को लेकर निर्माता-निर्देशकों का रवैया या व्यवहार हरवक्त मधुर रहता है लेकिन निर्भय गूर्जर के जीवन पर बनने वाली बीहड़ नामक फिल्म के निर्माता-निर्देशक को शूटिंग के दौरान जिस तरह से गाली-ग्‍लौज करते हुये देखा जा रहा है, उसे देख कर यही कहा जा सकता है कि वे आम जिंदगी मे भी किसी विलेन या डान से कम नही हैं। जिस वाकये का यहां पर जिक्र हो रहा है वो असल में निर्भय गूर्जर पर बनने वाली फिल्म बीहड़ की शूटिंग के दौरान का है।

हुआ यूं कि निर्भय की मौत 7 नंबवर 2005 को एसटीएफ के हाथों एक पुलिस मुठभेड़ में उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के अजीतमल इलाके के अमावता के पास हुई थी, उस समय एसटीएफ के एसएसपी थे तेज तर्रार अखिल कुमार। निर्भय गुर्जर को मरवाने में अहम योगदान किया था,  रामअवतार सिंह सेंगर और लाला प्रधान ने। निर्भय को जिस समय मुठभेड़ में मारा जा चुका था उस समय भी दोनों ही एसटीएफ के ही सामने थे, तब मीडिया ने दोनों को देखा और अपने कैमरों में कैद किया था।

निर्भय के मारे जाने के बाद मौके पर रामअवतार सिंह सेंगर और लाला प्रधान की भूमिका की चर्चा करने से एसटीएफ के तत्कालीन एसएसपी अखिल कुमार कतई नहीं चूके थे। इतना ही नहीं अखिल कुमार की ओर से एक खत भी दिया गया था, जिसमें उनके योगदान और पुलिस विभाग बीहड़ से रामअवतार सिंह सेंगर का सहयोग करने का अनुरोध भी किया गया था। निर्भय के मारे जाने के बाद गूर्जर बिरादरी की ओर से यह बात प्रचारित की गई थी कि निर्भय गूर्जर को करीब 50 लाख की खातिर रामअवतार सिंह सेंगर और लाला प्रधान पुलिस से मिल कर के मरवा दिया है। इसी बात को बीहड़ नामक फिल्म मे जोर-शोर से उठाने की कहानी तैयार करके शूटिंग कराई जा रही है। जिसकी भनक लगने के बाद रामअवतार सेंगर शूटिंग स्थल पर जाकर कृष्णा मिश्रा को सही और भ्रमित कर ने वाली कहानी के सिलसिले में अपना का पक्ष रखने के लिये गये थे, लेकिन रामअवतार सेंगर का पक्ष सुनना तो दूर उल्टे बेइज्जत किया गया। अब इसको लेकर रामअवतार सेंगर अदालत की शरण में जा रहे है।

रामअवतार सेंगर और बीहड़ फिल्म के निर्माता-निर्देशक कृष्णा मिश्रा के बीच यह गर्मा-गर्म गाली-ग्‍लौज का वाकया घटा है शूंटिग के दौरान। जहां पर सुरक्षा के लिये तैनात किये गये एक दरोगा ने भी जमकर बेइज्जत करने में कोशिश कसर नहीं छोड़ी है। रामअवतार सिंह सेंगर का पूरे मामले को लेकर कहना रहा कि बीहड़ फिल्म के निर्माण को लेकर उनको जानकारी मिली, जिस में कहा गया कि एक ऐसा सीन फिल्माया जा रहा है, जिस में इस बात का जिक्र किया जा रहा है कि डाकू निर्भय गुर्जर को 50 लाख रुपये के लालच मे मरवा दिया गया जब कि हकीकत में निर्भय गूर्जर को मरवाने में एसटीएफ की मदद निर्भय के आंतक के चलते की गई।

रामअवतार का कहना है कि यह मिथ्या आरोप है कि निर्भय की बड़ी रकम से मैंने कई सिनेमाघर बना लिये जब कि हकीकत में मेरे पास जो बीहड़सिनेमाघर है वो कई बैंकों से लोन लेकर बनाये गये हैं। जिनकी बकायेदारी आज भी जारी है, ऐसे में इस तरह के आरोपों को सिर्फ बदनाम करने वाला ही कहा जायेगा। रामअवतार सेंगर का कहना है कि फिल्म के निर्माता कहानी को तोड़-मरोड़ कर मेरी छवि को बिगाड़ने का काम कर रहे थे। ऐसे में मेरा शिकायत करना लाजिमी था, लेकिन मेरी बात को सुनना तो दूर गाली-ग्‍लौज तक पर उतर आये फिल्म के निर्माता। अब ऐसे में फिल्म का निर्माण रूकवाने के सिवा कोई दूसरा चारा नही है। ऐसे में अगर जरूरत पडे़गी तो सुप्रीम कोर्ट तक का रास्ता तय किया जायेगा।

किसी भी फिल्म की कहानी तो कहानी ही होती है, उस पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता है, लेकिन जब इस बात का प्रचार किया जा रहा हो कि बीहड़ फिल्म में सब कुछ रीयल ही होगा तो ऐसे मे रामअवतार सेंगर की बात को सुना क्यों नहीं गया। इस बाबत बीहड़ के निर्माता-निर्देशक कृष्णा मिश्रा का कहना है कि निर्भय को मरवाने वाली बात और गुर्जरों की ओर से लगाये गये आरोप कि 50 लाख के चक्कर मे निर्भय को मरवाया गया, इसी आरोप को ध्यान में रख कर फिल्म की कहानी तैयार की गई है इस में कुछ भी गलत नहीं है,  लेकिन ना जाने क्यों रामअवतार सिंह सेंगर ने शूटिंग स्थल पर आकर बखेड़ा किया।

लेखक दिनेश शाक्य सहारा समय उत्तर प्रदेश- उत्तराखंड न्यूज चैनल के इटावा मे रिर्पोटर है।

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