भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को तहस-नहस करना चाहती है आईएसआई

: काठमांडू में 32 लाख के भारतीय जाली नोट बरामद :  पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत में आतंकवाद को ही नहीं बढ़ावा दे रही है बल्कि वह भारत की अर्थव्यवस्था की भी चूलें हिलाने में लगी हुई है। भारत में उत्तर प्रदेश के सोनौली, ककरहवा और बढ़नी तथा बिहार के रक्सौल से लगने वाली नेपाल की सीमा के रास्ते जाली नोटों की खेप भारत के विभिन्न प्रांतों एवं शहरों में पहुंचाई जा रही है। जाली नोटों की खेप पाकिस्‍तान से ही आ रही है, इस बात की तस्दीक एक बार फिर नेपाल के काठमांडू में जाली नोटों के एक सप्लायर के पकड़े जाने के बाद हुई है। काठमांडू में पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक के पास से नेपाली पुलिस ने 32 लाख के जाली भारतीय नोट बरामद किए हैं। हालांकि नेपाली पुलिस सप्लायर को कैरियर बता रही है। जाली नोटों की बढ़ती तस्करी ने भारत के उद्यमियों, आम नागरिकों यहां तक की बैंकों तक को परेशानी में डाल दिया है।

बैंकों में पांच सौ और हजार के नोटों के लेन-देन में बेहद सावधानी बरती जा रही है,  इसके बावजूद नेपाली सीमा से लगने वाली उत्तर प्रदेश की सीमा से दौ सौ किमी तक के दायरे में हर रोज बैंकों में दो चार जाली नोट मिल ही जाते हैं। जाली नोट असली नोट से मिलते जुलते हैं, इसकी पहचान हर आदमी कर भी नहीं सकता है। जाली नोट के कारोबारी लगन के मौसम में अधिक सक्रिय हो जाते हैं, क्योंकि इन दिनों में रुपयों की लेन-देन सर्वाधिक होती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान से जाली नोटों की खेप नेपाल लाई जाती है और फिर वहां से कभी बिहार के रक्सौल तो कभी उत्तर प्रदेश की सोनौली बार्डर से उसे कई हिस्सें में बांटकर कैरियरों के सहारे भारत के विभिन्न शहरों तक पहुंचाई जाती है। जाली नोट असली नोटों के बीच डालकर इस धंधे में लगे लोग झटके में चलाकर भारत की अर्थव्यवस्था को तहस नहस करने का गंदा खेल खेल रहे हैं। इस काम में ऐसे ऐसे लोग हैं जिन पर कोई न तो संदेह कर सकता है और नही जल्दी कोई हाथ डालने की जुर्रत ही कर सकता है।जाली नोट के कारोबारियों की घुसपैठ बैंकों तक में हैं। पूर्वांचल के कई राष्‍ट्रीय बैंकों में जाली नोट पकड़े भी जा चुके हैं। जाली नोटों का कारोबार रोक पाने में भारतीय खुफिया और प्रशासनिक तंत्र लगातर असफल साबित हो रहा है।

इधर नेपाली सीमा के आस पास सौ डेढ़ सौ किमी के दायरे में हजार और पांच सौ के नोट जैसे ही एटीएम में डाले जाते हैं, वे घंटेभर के भीतर ही खाली हो जाते हैं। बताया जा रहा है कि नेपाल सीमा के आसपास के एटीएम जैसे ही लोड किए जाते हैं, वहां कतारें लग जाती हैं और तो और एक एक कस्टमर चार-पांच एटीएम कार्ड लेकर पहुंचता है बारी-बारी से रुपए निकालता रहता है। नोटों के कारोबारियों से लगातार एटीएम के डाई होने की शिकायतें बैंकों तक पहुंच रही हैं।  इस बारे में जब बैंकों के स्तर से जांच-पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य उभर कर आए। सूत्रों का कहना है कि नेपाल में पांच सौ और हजार के भारतीय नोटों की डिमांड काफी है। तमाम नेपाली इसी का कारोबार करते है। नेपाल में हजार और पांच सौ के भारतीय नोट ले जाकर उनमें जाली नोटों को मिलाकर चलाया जाता है। सौ पचास की संख्या में हजार पांच सौ के असली नोटों में दस बीस जाली नोट मिला ही दिए जाते हैं और वे चल भी जाते हैं। कोई आसानी से उन जाली नोटों को नहीं पकड़ सकता, क्योंकि जाली नोट की बनावट हूबहू असली नोटों से मिलते-जुलते है। बड़े नोटों के नेपाल सीमा के आसपास बढ़ती खपत को देखते हुए अब आरबीआई ने बैंकों को एटीएम में आम लोगों की जरूरतों के अनुरूप सौ पचास के नोट लोड करने के निर्देश दिए हैं।

बीते गुरुवार को काठमांडू एयरपोर्ट की सुरक्षा की जांच चक्र को तोड़कर पाकिस्तानी नागरिक बाहर निकल आया था, पर नेपाली पुलिस को उस पर संदेह हुआ और उसकी गहन जांच की तो उसके पास से 32 लाख के जाली भारतीय नोट बरामद हुए। इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जाली नोटों की बरामदगी होने की खबर जैसे ही फैली नेपाली खुफिया तंत्र में हड़कंप मच गया। पकड़ा गया पाकिस्तानी नागरिक सरदार हुसैन करांची से जहाज से काठमांडू आया था। वह करांची का ही रहने वाला भी है। उसने नेपाली पुलिस को बताया है कि उसे काठमांडू एयरपोर्ट पर कोई दिक्कत नहीं होगी और हुआ भी ऐसा ही,  उसे एयरपोर्ट पर जांच में नहीं पकड़ा गया। काठमांडू की पुलिस ने बताया कि पकड़े गए तस्कर को फोनकर्ता के बारे में बहुत जानकारी नही है, पर उसे संदेह है कि इस पूरे खेल में काठमांडू एयरपोर्ट का कोई सुरक्षाकर्मी शामिल है। वैसे अभी इस बारे में और कुछ कहना मुश्किल है जांच की जा रही है।

एसएसएसबी के डीआईजी एस करूनाकर ने बातचीत में बताया कि कांठमांडू में 32 लाख के जाली नोटों की बरामदगी की खबर आते ही उनने सीमा पर निगरानी तेज करने के निर्देश दिए है और कहा है कि सघन जांच-पड़ताल के बाद ही किसी को आने-जाने दिया जाय। उन्‍होंने बताया कि जाली नोटों की तस्करी में महिलाएं और लड़कियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी सूचनाएं है पर सटीक जानकारी न होने के चलते अभी तक कोई महिला अथवा लड़की पकड़ में नहीं आ सकी हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि जाली नोटों की खेप भारत में सोनौली और रक्सौल बार्डर से ही होकर जाने की संभावना है। सोनौली बार्डर पर सख्त पहरा तो रहता ही है, साथ ही पगडंडी के रास्तों पर भी एसएसबी के जवान 24 घंटे पेट्रोलिंग करते रहते है। जब उनसे पूछा गया कि आखिर क्यों नहीं जाली नोटों के कारोबारी सीमा पर पकडे़ जाते हैं तो उनका कहना है कि ऐसे लोग बहुत चालाकी से यह काम करते हैं। वे महंगी गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं और उसमें गुप्त स्थान इसके लिए बनवाते हैं। हमारे पास ऐसा कोई यंत्र नहीं होता जो यह बता दे कि जाली नोट कहां छिपाया गया है। एसएसबी के जवान गाड़ियों की जांच तो करते ही हैं। उनका कहना था कि ऐसे कारोबारी सटीक मुखबिरी अथवा खुफिया सूचना पर ही पकड़े जा सकते हैं।

गोरखपुर से एसके सिंह की रिपोर्ट.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *