मारवाड़ में नर्सिंग ट्रेनिंग का ‘काला’ कारोबार!

: फर्जी तरीके से कराया जा रहा है प्रशिक्षण : प्रत्‍येक छात्र-छात्रा से वसूले जा रहे एक से तीन लाख रुपये : हजारों लड़कियां फंसी हैं चंगुल में : जीएनएम और एएनएम ट्रेनिंग कर रोजगार पाने के सुनहरे सपने दिखाने के नाम पर पूरे मारवाड़ मे कुकरमुत्तों की तरह बोगस कॉलेज व कोचिंग सेन्टर खुल गये हैं। इन कॉलेजों में करोड़ों का लेन-देन अवैध रूप से हो रहा हैं। खबर हैं कि हजारों की तादाद मे भोली-भाली लड़कियां इन लुटेरों के  चंगुल में फंस चुकी है। अभी और लड़कियों को जाल में फंसने का सिलसिला चलता ही जा रहा हैं। बहरहाल, इस गोरखधंधे को लेकर यहां का प्रशासन, पुलिस और अन्य एजेन्सियां बिल्कुल चुप और निष्क्रिय हैं। नर्सिंग ट्रेनिंग कराने के धंधे मे ऐसे संदिग्ध लोगों का दबदबा बना हुआ है,  जिनकी छवि को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाये जा रहे हैं। अगर ये कहा जाय कि इनके चंगुल में फंसने वाली भोली-भाली लड़कियों की इज्जत पर हर वक्त खतरे का साया बना रहता है, तो गलत नहीं होगा?

जोधपुर, बाड़मेर, नागोर, जालोर यानी पूरे मारवाड़ मे भोली-भाली 10-12 वीं पास ग्रामीण लड़कियों को नर्स बनाने के लिए नर्सिग ट्रेनिंग दिलाने का झांसा देकर उनसे एक से तीन लाख रूपये ऐंठने वाले युवकों का गिरोह सक्रिय हैं। करीब पांच साल पहले एक-एक कर यहां ये युवक इस कारोबार में आगे आये थे, लेकिन वक्त गुजरने के साथ ये युवक एक गिरोह व नेटवर्क के रूप मे संगठित होकर सामने आ गये हैं। खबर हैं कि हर साल एडमिशन सीजन में इस गोरखधंधे से 50 करोड़ का टर्न ओवर कर ये संदिग्ध युवा मस्ती से चांदी काट रहे हैं। कई पीडि़त लोगों की‍ शिकायतों के बाद भी  प्रशासन, पुलिस एवं दूसरी एजेन्सियां समूचे मामले में चुप्‍पी साधकर निष्क्रिय और पंगु बनी हुई हैं।

ऐसे फंसा रहे हैं ग्रामीण लड़कियों को

ग्वालियर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बरेली, पंजाब और जम्मू सहित कई इलाकों के कथित नर्सिग कॉलेजों से मारवाड़ के ग्रामीण इलाकों की दसवीं एवं बारहवी पास लड़कियों को एएनएम और जीएनएम की ट्रेनिंग करवाने का लोभ दिखा कर कुछ शातिर दिमाग के युवक इन दिनों एक बार फिर मारवाड़ पूरे में सक्रिय हो गये हैं। वैसे यह सिलसिला 4-5 सालों से चल रहा हैं, लेकिन चालू वर्ष मे तो यह कारोबार और ज्यादा चरम पर पहुंच चुका है। सूत्रों का कहना है कि एएनएम के लिए 80 से 90 हजार व जीएनएम के लिए 2.50 से 3 लाख रूपये एक लडक़ी के हिसाब से फीस वसूली जाती हैं। मारवाड़ में खुले दर्जनों ऐसे कोचिंग कॉलेज व सेन्टरों प्रत्‍येक में 50 से 100 लड़कियों को एडमिशन दिया हुआ हैं। अनुमान के मुताबिक करीब 50 करोड़ का सालाना कारोबार ये माफिया किस्म के लोग मारवाड़ की लड़कियों को फुसला कर कर रहे हैं।

धोखा देने वाले विज्ञापन छप रहे हैं

पश्चिमी राजस्थान में सक्रिय ये माफिया प्रदेश के प्रमुख अखबारों में बिल्कुल धोखा देने वाले विज्ञापन छपवा कर ग्राहकों को फांसने का काम कर रहे हैं। इन विज्ञापनों में कहीं भी यह छपा हुआ नही हैं कि फलां विश्वविद्यालय या नर्सिंग कॉलेज से सम्बद्व रखने वाले कॉलेज से जीएनएम/ एएनएम की ट्रेनिंग करवाई जा रही हैं। कुछ विज्ञापनों में तो धोरीमना, बाड़मेर सहित कईं स्थानों से नर्सिग ट्रेनिंग करवाने का भ्रामक प्रचार किया हुआ हैं जबकि इन कथित कॉलेजों को नर्सिग प्रशिक्षण की कोई मान्यता भी सरकार ने दे नही रखी है। इसी तरह के कुछ विज्ञापनों में सम्पर्क के लिए सिर्फ मोबाइल नंबर दिए गये हैं, लेकिन हजारों लाखों रूपयों की मांग इन छलावे वाले विज्ञापनों में की जा रही है। यानी कि कोई भी व्यक्ति अपने नाम से इन विज्ञापनों में आगे आना नही चाहता?

सही हैं तो फिर क्यों नहीं खोलते कॉलेज व जगह का नाम

पश्चिमी राजस्थान की पढ़ी-लिखी भोली-भाली लड़कियों को नर्स की नौकरी दिला कर पैरों पर खड़ा करने का झांसा देकर प्रशिक्षण की आड़ में हजारों लाखों रूपये उनसे ऐंठने वाले कथित प्रशिक्षकों द्वारा इन दिनों अखबारों मे धड़ाधड़ विज्ञापन दिए जा रहे हैं. परन्‍तु इन विज्ञापनों में कहीं भी सम्बद्ध कॉलेज व जगह का नाम नही खोला जा रहा हैं। यदि ऐसे विज्ञापनों में मान्यता प्राप्त सरकारी कॉलेज आदि का नाम लिखा जाता तो लोग वेबसाइट पर व इंटरनेट पर उसकी मान्यता आदि से सम्बन्धित जानकारी आसानी से हासिल कर सकते हैं। जाहिर हैं कि कहीं न कहीं दाल मे कुछ काला हैं? यदि ये लोग इन लड़कियों को सरकारी मान्यता प्राप्त कॉलेजों से नर्सिंग प्रशिक्षण करवाने के नाम पर हजारों-लाखों रूपये वसूल रहे हैं तो फिर उन्हें कॉलेज का नाम आऊट करने मे कौन सा डर और भय हैं?

ठेके पर बिक रहे हैं मान्यता वाले नर्सिंग कॉलेज?

विभिन्न कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों, नर्सिग परिषदों ने अपने अपने स्टेटों मे इच्छुक संस्थाओं को मान्यता के तमाम मापदण्ड एवं उसकी शर्ते पूरी करने पर एएनएम और जीएनएम प्रशिक्षण कोर्स चलाने की मंजूरी देते हुए उनका एफिलेशन कर रखा हैं। प्रशिक्षण कोर्स चलाने के लिए निजी संस्थानों के साथ साथ सरकारी चिकित्सालय भी अधिकृत किए गये हैं। लेकिन ये प्रशिक्षण सेन्टर स्पेशिफिक जगह यानी कि स्थान के लिए मान्य होते हैं। वह संस्था अपने क्षेत्राधिकार एवं कार्य क्षेत्र में ही इस तरह के प्रशिक्षण कोर्स करवा कर पात्र युवक-युवतियों को दक्ष बनाने हेतु अधिकृत होती हैं। सूत्रों ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण सेन्टरों के लिए सरकारी एवं डोनेशन वाली सीटें भी आवंटित की जाती हैं। इन सीटों की तादाद से बढ़ कर एक भी अधिक सीट पर ये सेन्टर प्रबन्धक एडमिशन नही दे सकते।

लेकिन ग्वालियर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बरेली, पंजाब और जम्मू सहित कईं प्रदेशों मे खुले कथित नर्सिग प्रशिक्षण कॉलेजों के निजी प्रबन्धकों ने अपनी सीटों को ठेकों पर आगे बेच दिया हैं। मारवाड़ मे सक्रिय युवाओं ने माफिया स्टाइल से इन सीटों को खरीद लिया है, जो अब धीरे-धीरे एडमिशन के लिए ऑफर कर लड़कियों को फंसाने का काम कर रहे हैं।

ऐसे मिलती हैं मान्यता : महत्वपूर्ण मापदण्ड एवं पात्रता

नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र संचालित करने वाली संस्थाओं को इण्डियन नर्सिंग काउंसिल मान्यता एवं एनओसी तब ही जारी करती हैं, जब उसके पास समुचित सुविधाएं हों। एनओसी देने से पहले इण्डियन नर्सिंग काउंसिल देखती हैं कि आवेदक संस्थान के पास समुचित फिजिकल ढांचा, क्लिनिकल सुविधा तथा टीचिंग फैकल्टी हो। नर्सिंग काउंसिल की मान्यता मिलने के बाद राज्य नर्सिंग परिषद एवं परीक्षा बोर्ड सम्बन्धित संस्थान को ट्रेनिंग सेन्टर चलाने की स्वीकृति देता हैं।

सम्बन्धित नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र पर डेढ़ सौ बिस्तरों वाला हॉस्पीटल, लैब, नर्सिग लैब, नर्सिग ट्यूटर सहित कई सुविधाएं होनी चाहिए। सेन्टर के प्राचार्य के लिए उसका एमएससी नर्सिंग उत्‍तीर्ण होने के साथ तीन साल का अनुभव होना जरूरी हैं। इसी तरह ट्यूटर के लिए बीएससी नर्सिग डिप्लोमा तथा क्लिनिकल अनुभव जरूरी है। ऐसे कॉलेजों की मान्यता स्पेशिफिक संस्थान को जगह विशेष के लिए दी जाती हैं, लेकिन मारवाड़ मे कथित ढंग से चलाये जा रहे नर्सिंग प्रशिक्षण कॉलेजों को कोई मान्यता नही है, ये प्रशिक्षण व क्लास चलाने का काम फर्जी ढंग से ठेके पर लाये हैं ताकि आसानी से रूपये बटोर सके?

एएनएम-जीएनएम ट्रेनिंग का गोरखधंधा

बाड़मेर, नागोर, जालोर एवं जोधपुर सहित कईं जगहों पर एएनएम और जीएनएम प्रशिक्षण के एडमिशन करने वाले इन युवाओं ने दोनों हाथों से पैसे बटोरने के लिए कथित सेन्टर एवं कोचिंग क्लासेज तथा छात्रावास भी खोल रखे हैं। लड़कियों को ये युवक सौ फीसदी पास कराने की गारंटी दे रहे हैं। एएनएम और जीएनएम प्रशिक्षण के लिए क्रमश: एक लाख व तीन लाख की फीस बटोरने वाले ये माफिया बाद में इन्हीं लड़कियों से परीक्षा दिलाने, हॉस्टल मे रहने एवं टयूशन आदि के लिए भी हजारों की फीस वसूलते हैं। ये संचालक यहां पर लड़कियों को नियमित रहने की छूट देने के नाम पर पर भी बीस से पच्चीस हजार वसूलते हैं, जबकि इन कथित प्रबन्धकों का मारवाड़ में कोई अधिकृत हॉस्टल, प्रशिक्षण केन्द्र व कोचिंग क्लासेज नही हैं? सूत्रों ने बताया कि मारवाड़ में खुले कथित कोचिंग व प्रशिक्षण केन्द्रों पर पढ़ाने के नाम पर सिर्फ एएनएम व जीएनएम ट्रेनिंग किए हुए लड़के ही हैं, जो खुद बेरोजगार बैठे हैं या फिर कहीं निजी हॉस्पीटल मे कम्पाउंडरी कर रहे हैं?

लड़कियों की इज्जत पर खतरे का साया

मारवाड़ के विभिन्न स्थानों पर कुकरमुत्तों की तरह माफियाओं द्वारा खोले गये कथित नर्सिग हॉस्टलों में सैकड़ों की संख्या मे युवतियों को रखा जाता है, लेकिन इन अवैध हॉस्टलों व कॉलेजों में इन लड़कियों की इज्जत की सुरक्षा की गारंटी क्या? क्या ये लड़कियों के लिए नियमानुसार अवैध हॉस्टल चला सकते हैं? क्या ये कथित कॉलेज नर्सिंग प्रशिक्षण का झांसा देकर एडमिशन दे सकते हैं? ऐसे कई सवाल हैं जो पश्चिमी राजस्थान के प्रशासन व पुलिस के अफसरों की निष्ठा को संदेह के कटघरे मे लाकर खड़ा करते हैं?

आखिर कौन लोग चला रहे हैं कथित कॉलेज

मारवाड़ के नागोर, जोधपुर, जालोर व बाड़मेर के विभिन्न इलाकों में एएनएम व जीएनएम प्रशिक्षण सेंटर चलाने व कॉलेज चलाने वाले युवकों की असलियत क्या है? यह जानने की कोशिश प्रशासन क्यों नही कर रहा है? क्या ये लड़के कॉलेज व डिग्री तथा डिप्लोमा कॉलेज सेन्टर चलाने के लिए अधिकृत व पात्र हैं? ये लड़के फिर विज्ञापनों में आखिर अपना नाम क्यों नहीं खोलते? क्या मारवाड़ के उक्त इलाकों में जवां लड़कियों के लिए अवैध हॉस्टल ये लोग चला सकते हैं? आखिर ये लाखों रूपये ऐंठ कर ट्रेनिंग कराने वाले युवक किसकी गारंटी देकर लड़कियों को जाल में फंसा रहे हैं।

इन युवाओं में अधिकतर वे हैं जो बाहरी प्रदेशों से कथित नर्सिंग ट्रेनिंग करके यहां लौटे हैं। ये ही टयूटर बने हुए हैं, यहां लाखों रूपये बटोरने के लिए अखबारों मे फर्जी विज्ञापन देकर ग्राहकों को फांस रहे हैं। कुछ विज्ञापनों में तो बाड़मेर, जालोर, भीनमाल, धोरीमना सहित कई इलाकों के कॉलेजों के नाम दर्शा कर लिखा जा रहा हैं कि यहां से एएनएम करें? गारंटेड पास होवें? रोजगार पायें? जबकि वास्तविकता यह हैं कि ऐसे कॉलेजों को कहीं से प्रशिक्षण दिलाने की मान्यता नही है।

बाड़मेर से बंशीलाल चौधरी की रिपोर्ट.

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