मिलकर लड़नी होगी मानवाधिकारों की लड़ाई

“आज़मगढ़ के निर्दोष मुस्लिम नौजवान ही नहीं सरकारी मशीनरी के निशाने पर छत्तीसगढ़ के ग़रीब आदिवासी भी हैं। वहां पर 650 गांवों जलाकर आदिवासियों को बेघर कर दिया गया। सैकड़ों की संख्या में लोग लापता हैं। मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाएं कहां हैं? नए हिन्दुस्तान की लड़ाई छत्तीसगढ़ के आदिवासियों और संजरपूर के निर्दोष नौजवानों को मिलकर लड़नी है।” ये बातें वरिष्ठ मानवाधिकार नेता हिमांशु कुमार ने संजरपूर में आयोजित विशाल राष्ट्रीय मानवाधिकार जनसम्मेलन में कही। दिल्ली से आई मानवाधिकार नेता शबनम हाशमी ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद में विस्फोट करने वाले असीमानंद और सुनील जोशी का योगी आदित्यनाथ के साथ गहरा संबंध उजागर हुआ है, बावजूद इसके आजतक योगी को गिरफ्तार करना तो दूर पूछताछ तक भी नहीं की गई।

पीयूसीएल के राष्ट्रीय सचिव चितरंजन सिंह ने कहा कि देश में हुए तमाम धमाकों की नए सिरे से जांच की जाए। उन्होंने संघ परिवार और उसकी फासिस्ट विचारधारा की न्यायपालिका तक में घुसपैठ पर चिंता जताते हुए न्यायपालिका में धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की पुनर्बहाली की मांग की। लखनऊ के वरिष्ठ वकील मो. शोएब ने भाजपा के बजाए कांग्रेस, सपा और बसपा को ज़्यादा खतरनाक बताते हुए कहा कि ये पार्टियां भाजपा की दूसरे नंबर की टीम हैं, जो सेकुलर चेहरे के साथ संघ परिवार के एजेन्डे को बढ़ा रही हैं।

मुंबई से आए मानवाधिकार नेता फिरोज़ मिठीबोलवाला ने भारत सरकार के अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते नापाक रिश्ते को भारत में बढ़ती आतंकी घटनाओं और निर्दोष मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी की वजह बताया। वहीं अयोध्या से आए महंत युगल किशोर शरण शास्त्री ने कचहरियों पर हुए कथित हमलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि फैजाबाद कचहरी में हुआ विस्फोट भाजपा नेता विश्वनाथ सिंह और महेश पाण्डे की चौकियों पर हुए थे और वो दोनों हादसे के वक़्त गायब थे। उन्होंने कचहरी विस्फोटों में सुनवाई कर रहे न्यायाधीशों के साम्प्रदायिक रवैये का भी ज़िक्र किया। आरटीआई कार्यकर्ता अफ़रोज़ आलम साहिल, जिन्होंने बाटला हाउस फर्जी मुठभेड़ में मारे गए युवकों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट को निकलवाया था, ने सूचना के अधिकार कानून पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें भी साम्प्रदायिक कारणों से रिपोर्टों को लटकाया जाता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हरमन्दिर पाण्डे ने किया। संचालन पीयूसीएल प्रदेश उपमंत्री मसीहुद्दीन संजरी ने किया। कार्यक्रम में 12 सूत्रीय प्रस्ताव भी पारित किया गया। कार्यक्रम में तारिक़ शफ़िक़, महासागर गौतम, बलवंत यादव, अब्दुल्लाह, आफताब अहमद, सालीम दाउदी, जितेन्द्र हरि पाण्डेय, सुनील, गुलाम अम्बिया, फहीम अहमद प्रधान, वसीउद्दीन, रवि शेखर, विजय प्रताप, शाहनवाज आलम, राजीव यादव, गुंजन, बबली, अंशुमाला आदि मौजूद रहे। इस सम्मेलन में शमीम अख्तर संजरी की पुस्तक ‘लहू-लहू’ और तीन पुस्तकों सहित डॉक्यूमेंट्री फिल्म भगवा युद्ध का विमोचन किया गया।

लेखक महीहुद्दीन संजरी पीयूसीएल के प्रदेश उपमंत्री हैं.

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