मुलायम ने अपनी समधन को अपनी पार्टी से निकाल बाहर किया

सपा सुप्रीमो के फैसले को न मानने वाले लोगों के खिलाफ सपा मुखिया क्या कारवाई कर सकते हैं इसका जीता जगता सबूत आज उस समय देखने को मिला जब मैनपुरी की पूर्व विधायक उर्मिला यादव और पूर्व जिलाध्यक्ष केसी यादव को सपा से इसलिये निकाला गया, क्योंकि ये लोग सपा सुप्रीमो के फैसले का विरोध कर रहे थे. सपा मुखिया ने इस फैसले से बगाबत करने वालों को सचेत किया है तो यह भी कयास लगाया जा रहा है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता को भी यह सन्देश देने की कोशिश की है कि सपा अब परिवार बाद से हटकर राजनीति करने की कवायद शुरू कर चुकी है. इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव मिशन 2012  के चलते अब नाम के ही मुलायम नजर आ रहे हैं.

अब वे कठोर मुलायम बनकर 2012 का मुकाबला करने के लिए कमर कस चुके हैं. वहीं हाईकमान के इस फैसले के बाद सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष केसी यादव का कहना है कि राजकुमार यादव उर्फ़ राजू को टिकट देकर हाई कमान ने मैनपुरी की जनता पर अपना फैसला थोप दिया है. उन्होंने बताया अब वे मैनपुरी की जनता को जगाने के लिए 30 अप्रैल को मैनपुरी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले एक रोड शो करेंगे.  उन्होंने बताया कि इस मैनपुरी बचाओ संघर्ष समिति के वे खुद और उर्मिला यादव संरक्षक भी हैं और इसके अध्यक्ष कु. ललित प्रताप सिंह हैं.

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की समधन मैनपुरी की पूर्व विधायक रहीं उर्मिला यादव सपा मुखिया मुलायम सिंह के सगे भाई अभयराम सिंह यादव की पुत्री बबली यादव की सास हैं और खुद बबली यादव भी पिछले बार घिरोर से ब्लाक प्रमुख थी. सपा मुखिया ने अपनी समधन को पार्टी से निकलकर जनता को ये बताने की कोशिश की है कि अब वे परिवार बाद से हटकर राजनीति में आ रहे हैं.  वहीं सूत्रों और स्थनीय पत्रकारों की माने तो जनता मुलायम के इस फैसले को भी एक सोची समझी राजनीति मान रही है. वहीं सपा के मैनपुरी के जिला अध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा का कहना है कि अनुसाशन हीनता करने वाला चाहे कोई भी हो उसे पार्टी से निकलना ही पार्टी के हित में है.

लेखक नीरज महेरे इटावा में पत्रकार हैं.

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