रामोत्सव का क्या हो विकल्प!

आज के दैनिक जागरण में छपी खबर के अनुसार अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर सोमनाथ की तर्ज पर भव्य राम मंदिर बनवाने के लिए विश्व हिन्दू परिषद् ने निर्णायक लड़ाई लड़ने का मन बनाया है.इसके तहत उसने नवरात्रि के पहले दिन से पूरे देश में रामोत्सव मनाने की घोषणा कर दिया है.इसके तहत यह पुरे देश में 5000 स्थानों पर रामोत्सव मनायेगा..विहिप के काशी प्रान्त के प्रमुख के मुताबिक पूरे देश में राम-महोत्सव 11 अप्रैल तक मनाया जायेगा.वहां के विहिप जिला प्रवक्ता के मुताबिक़ राम मंदिर बहुसंख्य समाज की आस्था ,सम्मान और अस्मिता का सवाल है.इस मसले पर पूरे देश में निर्णायक माहौल बनाएगा .

लेकिन राम मंदिर सिर्फ विहिप ही नहीं,संघ के बाकी तीन दर्जन आनुषांगिक संगठनों के लिए भी –‘बहुसंख्य समाज की आस्था ,सम्मान और अस्मिता का सवाल है’.जाहिर है वे भी निर्णायक माहौल बनाने की दिशा में अपना कुछ कर्तव्य स्थिर किये होंगे.इससे देश का माहौल किस तरह राममय हो सकता है,इसकी सहज कल्पना कोई भी कर सकता है.बहरहाल जो रामोत्सव का पार्ट नहीं बनाना चाहते हैं;जिनके लिए बहुसंख्य समाज की आस्था,सम्मानऔर अस्मिता से बढ़कर बहुजन समाज शक्ति के स्रोतों में भागीदारी ज्यादा बड़ा मुद्दा है,वे इस दौरान क्या करेंगे!क्या खामोश दर्शक बनकर उतप्त माहौल की गर्मी झेलते रहेंगे या अपना भी कुछ वैकल्पिक एजेंडा लेकर आगे बढ़ेंगे.अगर ऐसा करते हैं तो उनका वैकल्पिक एजेंडा क्या होगा,यह सवाल खासतौर से बहुजन समाज के बुद्धिजीवियों से है.

लेखक एच.एल.दुसाध वरिष्ठ दलित चिंतक हैं.

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