राहुल गांधी इस देश के लिए किसी काम के नहीं हैं

: सत्याग्रह पर कांग्रेस का ही हमला : सत्याग्रह के खिलाफ कांग्रेस ने दमन का रास्ता अपना लिया, जिस हथियार के भरोसे देश को आजादी दिलाने का दावा कांग्रेस करती हैं उसी हथियार को दबाने के लिए अंग्रेजों की तरह सोनिया और मनमोहन की पुलिस रामलीला मैदान में महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार करती हुई नजर आई। बाबा रामदेव के अनशन से डरी हुई केन्द्र सरकार अब चारों तरफ से हिल चुकी हैं, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के कागजी शेर बने मंत्रियों ने सरकार के मानवीय अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। देश अराजकता की ओर एक साथ कई कदम बढ़ चुका हैं जिसका अहसास विदेशी मूल के कांग्रेस नेतृत्व को संभवतः नहीं हैं।

बाबा रामदेव के धरना स्थल पर पांच हजार पुलिसकर्मियों द्वारा सत्याग्रह को कुचलने की कोशिश कांग्रेस की नीतियों और सिद्धान्तों की कांग्रेसियों द्वारा की गई एक सार्वजनिक हत्या हैं। कांग्रेस का नेतृत्व भारत को न समझता था और न समझता हैं। अन्ना हजारे के बाद बाबा रामदेव से घबराये हुए नेतृत्व ने सत्याग्रह के ऊपर जिस तरह हमला किया हैं, वह आश्चर्य का विषय हैं। आज भारत कई कदम आगे बढ़ चुका हैं अराजकता की स्थिति की ओर अन्ना हजारे और रामदेव के साथ कांग्रेस द्वारा किए गए धोखे को पूरा देश न सिर्फ देख रहा हैं, बल्कि समझ भी रहा हैं। इटली की मीजिया स्टाइल में आन्दोलन को आतंक से दबाने की कोशिश इस देश के इतिहास में दूसरी बार हो रही हैं। पहली बार इस कोशिश का परिणाम देश में आपातकाल और इन्दिरा गांधी जैसी सशक्त नेता के पतन के रूप में हुआ था।

यह संभावना बहुत बलवती हैं कि अन्ना और रामदेव के जनजागरण अभियान का व्यापक असर कांग्रेस सरकार के अस्तित्व पर पड़ेगा। कांग्रेस के ही लोगों ने इस स्थिति को इतना भयावह बना दिया हैं कि कांग्रेस का भविष्य पूरी तरह मटिया मेट हो चुका हैं। कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी को ओसामा जी संबोधन देते रहे हैं तो स्वामी रामदेव को सार्वजनिक तौर पर वे ठग बताते हैं। ऐसा लगता हैं कि दिग्विजय सिंह कपिल सिब्बल सहित कांग्रेस के कुछ नेताओं ने कांग्रेस में हाईकमान की परम्परा को समाप्त करने और कांग्रेस के भविष्य को मटिया मेट करने की सुपारी ले रखी हैं। यही कारण हैं कि कपिल सिब्बल कोई भी ऐसा षड़यंत्र नहीं छोड़ना चाहते जो भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में अब तक प्रयुक्त नहीं किया गया है। दिग्विजय सिंह अब तक के राजनैतिक इतिहास में सोनिया गांधी और राहुल गांधी और कांग्रेस सरकार के विरूद्ध विपक्ष को लगातार हथियार सप्लाई करने में संलग्न हैं।

बाबा रामदेव के अनशन स्थल पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के पक्ष में कई मंत्री एक साथ सामने आए हैं परन्तु कांग्रेसी भूल गए हैं कि आज उनकी छवि आम व्यक्ति के मध्य एक झूठे मक्कार और षड़यंत्रकारी नेता के रूप में बन चुकी हैं। देश आज सोनिया, राहुल, मनमोहन को कांग्रेस के कुछ नेताओं के चंगुल में फंसा हुआ नेता मानता हैं। रामदेव के अनशन को समाप्त करने का राजनैतिक रास्ता मौजूद था। आज तक इतिहास में हुए आन्दोलनों के साथ कांग्रेस ने हमेशा जनरूचि के अनुसार व्यवहार किया है, यही कारण था कि लोकतंत्र की मर्यादा को कायम रखने में कांग्रेस को कभी परेशानी नहीं हुई। इस आन्दोलन के दौरान दिग्विजय सिंह के निम्नस्तरीय बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया हैं कि उन पर हाई कमान का कोई नियंत्रण नहीं हैं। वास्तव में दिग्विजय सिंह कांग्रेस के नए कमान बनकर उभरे हैं।

दूसरी ओर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में षड़यंत्र का पर्याय बन चुके देश के वरिष्ठ वकील कहे जाने वाले कपिल सिब्बल जमीनी हकीकत को समझ पाने में अक्षम हैं और अपने कानूनी दावपेंचों से ही जनसमस्याओं के हल को खोजते हैं यह भी स्पष्ट हो चुका है। आज समूचा देश भारत सरकार के प्रति अविश्वास से भरा हुआ हैं। आज यदि अन्ना हजारे से उनका नाम लिखकर भी एक पर्ची मांगने की कोशिश की जाए तो वे स्पष्ट इन्कार कर देगें और संभवतः यही कहेगें कि मैं अपने आपको अपने हाथ से कोरा कागज भी नहीं दे सकता, क्योंकि हमें भरोसा नहीं है।

कांग्रेस में अस्तित्व का संकट पहली बार इतना बड़ा स्वरूप लेकर आया है। यह स्पष्ट नजर आ रहा हैं कि कई राज्यों से समाप्त होती हुई कांग्रेस सोनिया गांधी के कमजोर नेतृत्व के कारण अपनी अंतिम सांस ले रही हैं। अब सरकार के सामने मजबूरियों का पहाड़ खड़ा होने वाला हैं, जहां देश का हर नागरिक उन्हीं मुद्दों को लेकर अपना व्यक्तिगत आक्रोश सार्वजनिक करेगा, जिन पर अन्ना और रामदेव आकर खड़े हुए थे। अन्ना हजारे के सामने नतमस्तक हुई सरकार एक बार फिर बाबा रामदेव के चरणों में लौटने के लिए तैयार है। यह पराजय दिग्विजय सिंह या कपिल सिब्बल की नहीं होगी। ये नेता कांग्रेस के पराभव के बाद भी हंसते हुए सार्वजनिक जीवन जीने की बेशर्मी दिखाने में माहिर हैं, परंतु इस देश से कांग्रेस का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो जायेगा। राजनीति में एक परंपरा का समाप्त होना कोई बड़ी बात नहीं हैं, परंतु कांग्रेस को इस बात का जवाब सार्वजनिक मंच से देना होगा कि आतंकवादी ओसामा बिन लादेन यदि कांग्रेस के लिए ओसामा जी था तो इस देश का एक संन्यासी योग गुरू बाबा रामदेव ठग क्यों करार दिया। जिस नेता ने उसे ठग घोषित किया हैं, क्या उस नेता का दामन साफ हैं।

कांग्रेस अपने अस्तित्व के अंतिम दिनों में जा चुकी हैं, जहां उसके प्रेरणा स्रोत कहे जाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मार्ग और आदर्शों का स्वयं उसने गला घोंट दिया हैं। कांग्रेस कभी तानाशाह नहीं बन सकती इसका स्वप्न भी सोनिया गांधी को अपने इन नकारा नेताओं के भरोसे नहीं देखना चाहिए। कांग्रेस की राजनीति में यह स्पष्ट संकेत हैं कि राहुल गांधी इस देश के लिए किसी काम के लिए नहीं हैं। वे सिर्फ कम्प्यूटर और आधुनिक तकनीकी में ही भारत को देख सकते हैं भारत की जनसमस्याओं से और भारतीय समाज की गतिविधियों से उनका कोई सरोकार नहीं हैं। ऐसे नकारा युवा नेता को कांग्रेस में कुछ कपटी और षड़यंत्रकारी सहयोगियों का ही साथ मिला हैं जो कांग्रेस के वर्तमान को बिगाड़कर भविष्य को समाप्त कर अपनी व्यक्तिगत राजनीति को स्थापित करना चाहते हैं। अब कांग्रेस को कोई इतिहास लिखने की जरूरत नहीं हैं, क्योंकि कांग्रेस स्वयं इतिहास बनने जा रही हैं आने वाले दिनों में समूचा देश बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के साथ इसी तरह के कई आन्दोलनों में उठ कर खड़ा होने के लिए तैयार हैं जो कांग्रेस को अस्तित्वहीन करने के लिए पर्याप्त हैं।

लेखक सुधीर पाण्‍डे पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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