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तेरा-मेरा कोना

हर कोई उसे भरपूर नजरों से देख लेना चाहता था!

: वो अपने पुराने ब्‍वाय फ्रेंड से बात कर रही थी : कुछ दिनों पहले मैं अपने शहर पटना जा रहा था. मैं अपनी ट्रेन के नियत समय से पहले नयी दिल्ली स्टेशन पहुँच गया. ट्रेन भी अपने नियत समय से प्लेटफ़ॉर्म पर आ गयी और मैं ट्रेन के अन्दर दाखिल हो गया. मैंने अपना सामान सीट के अन्दर अच्‍छे ढंग से डाल के बैग से एक किताब निकाल कर आराम से बैठ गया. थोड़ी ही देर में ट्रेन नयी दिल्ली स्टेशन से निकल पड़ी और मैं भी अपने किताब के पन्नों में इस तरह व्यस्त हो गया कि मेरे आस-पास कौन आ कर बैठा है, ये भी सुध मुझे नहीं रही. तभी थोड़ी देर बाद मेरे कानों में कुछ मीठी सी ध्वनि आई तो मैं नज़र घुमा के देखता हूँ कि मेरे बगल में एक लड़की बैठी हुई है और वो मोबाइल फ़ोन पर किसी से बातें कर रही थी. दिखने में ख़ूबसूरत थी और किसी संभ्रांत परिवार की लग रही थी. फैशन का मतलब उसे अच्छे ढंग से पता था ये उसके पहने हुए कपड़ों से प्रतीत हो रहा था.

: वो अपने पुराने ब्‍वाय फ्रेंड से बात कर रही थी : कुछ दिनों पहले मैं अपने शहर पटना जा रहा था. मैं अपनी ट्रेन के नियत समय से पहले नयी दिल्ली स्टेशन पहुँच गया. ट्रेन भी अपने नियत समय से प्लेटफ़ॉर्म पर आ गयी और मैं ट्रेन के अन्दर दाखिल हो गया. मैंने अपना सामान सीट के अन्दर अच्‍छे ढंग से डाल के बैग से एक किताब निकाल कर आराम से बैठ गया. थोड़ी ही देर में ट्रेन नयी दिल्ली स्टेशन से निकल पड़ी और मैं भी अपने किताब के पन्नों में इस तरह व्यस्त हो गया कि मेरे आस-पास कौन आ कर बैठा है, ये भी सुध मुझे नहीं रही. तभी थोड़ी देर बाद मेरे कानों में कुछ मीठी सी ध्वनि आई तो मैं नज़र घुमा के देखता हूँ कि मेरे बगल में एक लड़की बैठी हुई है और वो मोबाइल फ़ोन पर किसी से बातें कर रही थी. दिखने में ख़ूबसूरत थी और किसी संभ्रांत परिवार की लग रही थी. फैशन का मतलब उसे अच्छे ढंग से पता था ये उसके पहने हुए कपड़ों से प्रतीत हो रहा था.

उसकी खूबसूरती और फैशनेबल कपड़ों का अंदाजा आप इससे ही लगा सकते हैं कि हमारे सीट के पास से गुजरने वाला हर व्यक्ति उसे अपनी भरपूर नज़रों से देख लेना चाहता था. एक चीज़ और मैंने गौर किया, कोई भी जब वहां से गुज़रता था तो उसकी गति हमारी सीट के पास आते ही धीमी हो जाती थी, पर ऐसा लग रहा था वो लड़की इन सब चीजों का परवाह किये बिना लगातार फ़ोन पर बातें किये जा रही थी. उसकी उम्र ज्यादा से ज्यादा 19 साल की होगी. उसकी बातों से मुझे लगा कि वो पटना की ही रहने वाली है और दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी महाविद्यालय में पिछले साल ही दाखिला लिया है. मतलब करीब एक साल पहले दिल्ली आई है.

उसकी बातचीत से मुझे पता चला कि वो अपने पुराने ब्‍वाय फ्रेंड से बात कर रही थी. जिससे उसका सम्बन्ध विच्छेद, अंग्रेजी में कहें तो ब्रेक अप हो चुका था. दोनों के बीच ज़बरदस्त वाक्‍य युद्ध चल रहा था. लड़की भी उसे डांटने के अंदाज़ में उससे बात कर रही थी. बात जब ज्यादा बढ़ गयी तो उसने फ़ोन काट दिया और फिर दूसरा नंबर ड़ाल किया. ये उसके वर्तमान ब्‍वाय फ्रेंड का था. फिर से बातों का सिलसिला शुरू हो गया. बातचीत के दौरान ही लड़की अपने ब्‍वाय फ्रेंड को प्यार की कसौटी पर मापना शुरू कर दिया और घंटों तक वो फ़ोन पर लगी रही. कभी नेटवर्क कट जाता कभी लाइन नहीं मिलती, पर वो लगातार बातें करती जा रही थी.

सच बताऊँ तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी थी उस लड़की की उम्र और उसके क्रिया-कलाप देख कर. उसकी उम्र 19 साल से ज्यादा नहीं होगी, एक साल पहले दिल्ली आई है और इस दौरान एक के बाद दूसरा ब्‍वाय फ्रेंड. यह सब देख कर मुझे लगा कि ये कैसी आधुनिकता की अंधी दौड़ है, जिसमें हमारा युवा वर्ग भाग रहा है और हर कोई इसमें अव्वल आने की तमन्‍ना पाले हुए है. क्या यही भारत की सभ्यता संस्कृति है, जिसे विदेशी आ कर अपनाना चाहते हैं, क्या यही युवा वर्ग हमारे देश का भविष्य हैं? देश पर आजादी के लिए कुर्बान होने वाले शहीद अगर ये सब देख रहे होंगे तो उनके मन में भी यही सवाल आ रहा होगा, “क्या यही है आजादी का मतलब?”

ये सिर्फ उस लड़की की बात नहीं है, आज का हर युवा इस अंधी दौड़ में भाग रहा है. अगर आपके पास ब्‍वाय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड नहीं हैं तो आप पिछड़े हुए हैं, आपकी हंसी उड़ाई जाएगी दोस्तों के बीच. क्या इसलिए हमें आजादी मिली थी? अगर युवा वर्ग ऐसा हो रहा है, ऐसा सोच रहा है तो ये अत्यंत ही चिंताजनक बात है. क्‍योंकि भविष्य में राष्ट्र निर्माण का जिम्मा इन्‍हीं के हाथ में है.

लेखक सुजीत कुमार कई विषयों पर लगातार लिखते रहते हैं तथा फैशन के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं.

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