: मनप्रीत सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल के बीच टशन बढ़ा : सारा कुछ ठीक चल रहा था। कुछ दिन पहले ही निचली अदालत से बादल परिवार को आय से अधिक संपति के मामले में राहत मिली थी। पर यह राहत ज्यादा देर नहीं चली। घर में विस्फोट हो गया है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत सिंह बादल ने यह विस्फोट किया है। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने ही राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना कर केंद्र सरकार की नीतियों की तारीफ कर दी है। यह तब किया है जब राज्य में खुद मनप्रीत सिंह बादल वित्त मंत्री है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की तारीफ उनके बेटे डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल की आलोचना करते हुए मनप्रीत सिंह बादल ने जब ये कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति बदहाल है और अगर स्थिति रही तो आने वाले दिन ठीक नहीं रहेंगे, प्रदेश की अकाली राजनीति में बवाल पैदा हो गया। दो दिन पहले आनन-फानन में अकाली दल की राजनीतिक मामलों की कमेटी की बैठक हुई, जिसमें सुखबीर सिंह बादल के समर्थकों ने मनप्रीत सिंह बादल पर कार्रवाई की मांग कर दी। इससे आहत मनप्रीत सिंह बादल ने भी भड़ास निकाली और वीरवार को कहा कि जो उन्होंने कहा ठीक कहा, उन्हें प्रकाश सिंह बादल का समर्थन प्राप्त है। लेकिन बादल बेचारे क्या करते, देर शाम तक अपने बेटे सुखबीर के दबाव में आकर भतीजे के खिलाफ अनुशासनमक कार्रवाई की धमकी तक दे डाली। कुल मिलाकर घर की लड़ाई बाहर गई है और अकाली दल का वही हाल होने की संभावना जतायी जा रही है जो महाराष्ट्र में शिव सेना की हुई।
पहले सारी कहानी को समझना जरूरी है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल दो भाई है। उनके एक भाई गुरदास बादल के बेटे मनप्रीत सिंह बादल है। जबकि प्रकाश सिंह बादल का एक बेटा सुखबीर बादल और एक बेटी हैं, जो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के पोते आदेश प्रताप सिंह कैरों से ब्याही हैं। बादल परिवार में राजनीतिक जंग तो सुखबीर की राजनीति में आने के साथ ही शुरू हो गई थी। लेकिन यह जंग खुलकर अब आयी है। मनप्रीत बादल 1994 से पंजाब विधानसभा के सदस्य है। वे पढ़े लिखे, मिलनसार माने जाते है। वर्तमान सरकार में जब वे वित्तमंत्री बनाए गए तो शुरू से राज्य की खराब आर्थिक हालत को लेकर सब्सिडी को खत्म करने पर जोर देते रहे। खासकर किसानों की मुफ्त बिजली को लेकर वे विरोधी रहे हैं। लेकिन उनकी अपने चचेरे भाई सुखबीर बादल से नहीं बनती। यहां तक की पिछले तीन सालों के कार्यकाल के दौरान उनकी सुखबीर बादल से बैठकर बातचीत भी नहीं हुई है। दो गुटों में बंटा बादल परिवार में सुखबीर पर उनकी सांसद पत्नी हरसिमरत कौर बादल और विधायक साले विक्रम सिंह मजिठिया का दबाव है। जबकि मनप्रीत सिंह बादल अलग सोच रख अपनी राजनीति करते हैं।
लेकिन हाल की लड़ाई तब शुरू हुई जब मनप्रीत सिंह बादल ने पंजाब के उपर बढ़ते कर्ज को खत्म करने के लिए केंद्र से लगायी शर्तों को मानने के लिए कह दिया। केंद्र से मनप्रीत सिंह बादल ने जब पंजाब के उपर सतर हजार करोड़ रुपये कर्ज की माफी की मांग की थी तो केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने साफ कहा कि वे 35 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को माफी दिलवा देंगे, बशर्ते पंजाब बिजली सब्सिडी खत्म कर दे, स्थानीय निकायों को आडिट में लाए। मनप्रीत सिंह बादल ने प्रणव मुखर्जी के इस सुझाव को सही माना और राज्य सरकार को इसे मानने के लिए कह दिया। बस क्या था, पहले से ही खार खाए सुखबीर बादल ने इसे अपने उपर हमला माना। उन्हें यह बरदाश्त नहीं हुआ कि केंद्र उनके बजाए इस तरह की सलाह उनके चचेरे भाई को दे। उन्होंने कहा कि सब्सिडी की राजनीति खत्म नहीं होगी। उनके समर्थकों ने मनप्रीत सिंह बादल पर हमला बोल दिया। गुस्साए मनप्रीत सिंह बादल ने फिर अपने स्टैंड को दोहरा दिया है।
इस पूरे खेल में कांग्रेस की राजनीति पूरी सध रही है। मनप्रीत बादल ने केंद्र की नीति को सही मान कांग्रेस से अपने राफ्ता को मजबूत कर लिया है। राज्य में कांग्रेस अकाली दल में एक फूट की इंतजार कर भी रही है। जो हैसियत आज मनप्रीत सिंह बादल की अकाली दल में है, वही हैसियत कांग्रेस में मिल जाएगी। लेकिन इस पूरे खेल में उन्हें आतंरिक सहयोग खुद मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सगे दामाद आदेश प्रताप सिंह कैरों से मिल रहा है। कैरों अपने सगे साले के बजाए चचेरे साले को सहयोग दे रहे है। कांग्रेस में छलांग लगाने को वे भी तैयार है। हालांकि मनप्रीत सिंह बादल राज ठाकरे की तरह एग्रेसिव नहीं है। राज ठाकरे हिंसा की राजनीति करते है। उग्र मराठी बोलते है। जबकि मनप्रीत सिंह बादल शांत और अंग्रेजी बोलने वाले हैं। उनका चरित्र थोड़ा उद्वव ठाकरे से मिलता है। लेकिन निश्चित तौर पर मनप्रीत सिंह बादल अगर अकाली दल में विद्रोह का झंडा उठाते हैं तो आने वाले दिनों में अकाली दल का वही हाल पंजाब में होगा जो महाराष्ट्र में शिव सेना का हुआ।
अकाली दल की इस आतंरिक राजनीति से सबसे ज्यादा खुशी कैप्टन अमरिंदर सिंह को है। हाल ही में बादल परिवार आय से अधिक संपति मामले में बरी हुआ है। कैप्टन अमरिंदर सिंह किसी भी कीमत पर बादल को सबक सिखाने को तैयार हैं। उसके लिए वे मनप्रीत सिंह बादल से सहयोग ले सकते हैं। उन्हें कांग्रेस में लाने का प्रयास कर सकते हैं। उन्हें कांग्रेस में इज्जत दिलाने के लिए भी कैप्टन का सहयोग काफी होगा। मनप्रीत सिंह बादल मालवा के जिस इलाके से जीतकर आते हैं वहां कैप्टन का अच्छा प्रभाव है। वे बादल के विरोध के बावजूद मनप्रीत को चुनाव जीताकर लाने की क्षमता भी रखते हैं। लेकिन समस्या सुखबीर बादल की है। जब भी उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का एक मूव चलाया जाता है कहीं न कहीं से बगावत की बू आ जाती है। सुखबीर बादल का सारा मूव खराब हो जाता है। जिस तरह से सुखबीर बादल ने डिप्टी सीएम का पद लेकर और उनकी पत्नी सांसद हरसिमरत ने भ्रूण हत्या के खिलाफ मुहिम चलाकर पंजाब की राजनीति में अपने को स्थापित करने मे काफी सफलता हासिल कर ली थी, उसे मनप्रीत सिंह बादल की एक मूव ने खराब कर दी है। अब तो आने वाला समय ही बताएगा कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अकाली दल से पहले अपने परिवार को इकट्ठा करने के लिए क्या रणनीति अपनाते है।
लेखक संजीव पांडेय पत्रकार हैं. कई अखबारों में काम कर चुके हैं. आजकल चंडीगढ़ में रहते हैं.

