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अन्ना हजारे बनें देश के अगले राष्ट्रपति

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा विधानसभा चुनाव के बाद अब राष्ट्रपति चुनाव की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। क्योंकि में केंद्र में भाजपा पूर्ण प्रचंड बहुमत के साथ है तो स्वभाविक है कि भाजपा जिस व्यक्ति को राष्ट्रपति बनाना चाहेगी वह राष्ट्रपति बन जाएगा। विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिस पर कृपा होगी। यह है हमारे देश की राष्ट्रपति की हैसियत। राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा के खेवनहार रहे लाल कृष्ण आडवाणी, उनकी ही टक्कर के नेता रहे मुरली मनोहर जोशी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नामों की चर्चा जोरों पर है। यह अन्य तंत्रों पर विधायिका का वर्चस्व ही माना जाएगा कि राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर राजनीतिक व्यक्ति ही बैठते रहे हैं। वह भी केंद्र सरकार के कृपा पात्र।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा विधानसभा चुनाव के बाद अब राष्ट्रपति चुनाव की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। क्योंकि में केंद्र में भाजपा पूर्ण प्रचंड बहुमत के साथ है तो स्वभाविक है कि भाजपा जिस व्यक्ति को राष्ट्रपति बनाना चाहेगी वह राष्ट्रपति बन जाएगा। विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिस पर कृपा होगी। यह है हमारे देश की राष्ट्रपति की हैसियत। राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा के खेवनहार रहे लाल कृष्ण आडवाणी, उनकी ही टक्कर के नेता रहे मुरली मनोहर जोशी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नामों की चर्चा जोरों पर है। यह अन्य तंत्रों पर विधायिका का वर्चस्व ही माना जाएगा कि राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर राजनीतिक व्यक्ति ही बैठते रहे हैं। वह भी केंद्र सरकार के कृपा पात्र।

राष्ट्रपति पद के लिए आज की तारीख में भले ही भाजपा दिग्गजों का नाम चल रहा हो पर आज की तारीख में यदि आप इस पद के लिए सबसे योग्य और उचित व्यक्ति को ढूंढें तो प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे से योग्य व्यक्ति दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहा है। भले ही भाजपा देशभक्ति का ढिंढोरा पीटती घूम रही हो पर अन्ना हजारे की देशभक्ति के सामने भाजपा का कोई नेता नहीं ठहरता है। भाजपा ही क्यों किसी भी दल का नेता उनके सामने बौना दिखाई पड़ता है।

आजादी की लड़ाई व जेपी आंदोलन के बाद देश में यदि कोई जनांदोलन हुआ है तो वह अन्ना आंदोलन ही था। देश में देशभक्ति का ऐसा माहौल बना कि ऐसा लगने लगा था कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा। अरविंद केजरीवाल टीम की अति राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने माहौल को फीका कर दिया। इन सबके बावजूद दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और केंद्र में भाजपा की सत्ता अन्ना आंदोलन के कांग्रेस के विरुद्ध बनाए गए माहौल का ही परिणाम रहा। वह बात दूसरी है कि न तो अरविंद केजरीवाल और न ही नरेंद्र मोदी अन्ना हजारे के बनाए गए माहौल पर खरा उतर पाए। अन्ना हजारे जनता को राजा और जनप्रतिनिधियों को प्रजा के नारे को ये लोग आगे न बढ़ा सके। वह अन्ना हजारे ही हैं जिन्होंने आज के इस स्वार्थ दौर में भी अपना सब कुछ  देश व समाज के लिए न्यौछावर कर दिया।

जहां राजनीतिक दल युवाओं को इस्तेमाल करते रहे वहीं अन्ना हजारे ने युवाओं में देश व समाज के लिए काम करने का जज्बा भरा। वह देश, समाज, किसान व मजदूर के लिए संघर्षशील रहे। व्यवस्था की लड़ाई लड़ने वाले देश के इस महानायक को राष्ट्रपति जैसे गरिमामय पद पर विराजमान कर उनका मान-सम्मान बढ़ाया जाए। भले ही उके संघर्ष को भुनाने वाले उनको भूल गए हों। भले ही आज उनके शिष्यों को उनकी याद न आ रही हो पर फाइट फॉर राइट के कार्यकर्ता चाहते हैं कि अन्ना हजारे देश के अगले राष्ट्रपति बनें। अन्ना हजारे को राष्ट्रपति बनवाने के लिए हम लोग आंदोलन छेड़ेंगे। देश पर सब कुछ कुर्बान करने वाले अन्ना हजारे के मान-सम्मान के लिए शहर-शहर, गांव-गांव व गली-गली जाकर अन्ना हजारे के पक्ष में जनसमर्थन जुटाया जाएगा।

चरण सिंह राजपूत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
फाइट फॉर राइट
[email protected]

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