अन्ना नहीं यह आंधी हैं, देश का दूसरा गांधी है। यह नारा गोरखपुर ही नहीं पूरे पूर्वांचल के गली, चौराहों, कस्बों, नगरों में ही नहीं गांवों तक में गूंज रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे का छेड़ा गया आंदोलन जन आंदोलन की रूप ले चुका है। इमरजेंसी के बाद संभवतः भ्रष्टाचार के खिलाफ यह दूसरी बड़ी जनक्राति होगी, जो किसी दल के सहयोग के बिना गांधीवादी तरीके से लड़ी जा रहा है। पूरे देश को जकड़ चुके भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने और कल के सुनहरे भारत के लिए आज का युवा छटपटा रहा था पर उसे कोई सक्षम नेतृत्व नहीं मिल रहा था, अन्ना हजारे के रूप में युवाओं को दूसरा गांधी मिल चुका है और युवा हजारे के अनशन को यूं ही बेकार नही जाने देंगे। गोरखपुर में पिछले तीन दिनों से अन्ना के अनशन को समर्थन देकर उनकी हौसला आफजाई करने की होड़ सी लगी हुई है।
हजारे के अनशन के समार्थन में पहले दिन शहर के बुद्धिजीवियों, फिल्मकारों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्त्ताओं ने धरना ज्ञापन दिया फिर कैंडिल जुलूस निकाला। शुक्रवार को तीसरे दिन गोरखपुर के कलमकार और उनके साथ व्यापारी और बुद्धिजीवियों की भारी भीड़ सड़क पर उतर गई। गोलघर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने प्रेस क्लब और गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले पत्रकारों और उनके साथ व्यापारियों तथा समाजसेवियों ने एक घंटे का सांकेतिक उपवास रखा और फिर जुलूस की शक्ल में कलक्टरी कचहरी पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। शुक्रवार को ही देर शाम इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. आरएन सिंह की अगुवाई में गोरखपुर के चिकित्सकों ने कैंडिल जुलूस निकालकर अन्ना के अनशन का समर्थन किया तो दूसरी तरफ ‘द क्लिनिकल स्टेब्लिशमेंट रजिर्स्टेशन व रेगुलेशन एक्ट’ को जनविरोधी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला बताया।
यहां बता दे नई दिल्ली में सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे भ्रष्टाचार के समूलनाश के लिए जनलोकपाल विधेयक की मांग कर रहे हैं। अन्ना के इस मांग के समर्थन में पहले स्वामी अग्निवेश, किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल जुड़े तो धीरे-धीरे इस आंदोलन से जुड़ने वालों की कतार लंबी और भीड़ बढ़ती गई। अब तो पूरा देश ही हजारे की इस मांग के समर्थन में उठ खड़ा हुआ है। देश की हर बड़ी लड़ाई में आगे रहने वाला पूर्वांचल भला क्यों पीछे रहता। पूर्वांचल का शायद ही कोई जनपद होगा जहां हजारे की मांग के समर्थन में धरना-प्रदर्शन और जुलूस वगैरह न निकाला जा रहा हो। गोरखपुर में पिछले तीन दिनों से हजारे के समर्थन में सड़क पर उतरने वालों की होड़ लगी हुई है। इस आंदोलन में वकील, चिकित्सक, छात्र, व्यापारी, समाजसेवी, बुद्धिजीवी और कलमकार कूद चुका है। अन्ना के अनशन के दूसरे दिन गुरूवार को गोरखपुर में वकीलों, कालेज की छात्राओं, चिकित्साकर्मियों और समाजसेवी संगठनों ने गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल के मनोज सिंह के संयोजकत्व में कैंडिल जुलूस निकाला तो दूसरी तरफ अन्ना के आंदोलन का असर गुरूवार को खुद गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी एवं सांसद योगी आदित्यनाथ के सर चढ़कर बोल रहा था। योगी ने आंदोलन का खुद समर्थन तो किया ही राष्ट्रभक्तों से भी आंदोलन के समर्थन में खुलकर आने की अपील की।
जन लोकपाल बिल की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे के अनशन के तीसरे दिन समर्थन में शुक्रवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह और प्रेस क्लब गोरखपुर के अध्यक्ष सत्येन्द्रपाल सिंह के आह्वान पर बड़ी संख्या में पत्रकार इंदिरा तिराहे पर एक घण्टे के सांकेतिक उपवास के लिए पहुंचे तो वहां देखते ही देखते तमाम व्यापारी और समाजसेवी भी स्फूर्तिभाव से आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंच गये। भ्रष्टाचार के विरूद्ध हजारे के आन्दोलन से पत्रकारों में भावनाओं का प्रबल वेग स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहा था। सभी
के मन में एक आक्रोश था, जो सूरज की तेज किरणों को भी निष्प्रभावी कर पत्रकारों में एक जोश का संचार पैदा कर रहा था। ‘‘अन्ना हजारे-हम हैं साथ तुम्हारे‘‘ नारे के साथ आयोजित इस सांकेतिक उपवास में समाज के विभिन्न वर्गो के लोग भी स्वतः जुड़ते चले गये।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गोजए अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने कहा कि अन्ना हजारे ने एक स्वावलंबी हिन्दुस्तान, स्वाभिमानी हिन्दुस्तान, मुस्कराते हिन्दुतान और गर्वीले हिन्दुस्तान की परिकल्पना के साथ जो हुंकार भरी है, आज देश का बच्चा-बच्चा उनके साथ अपनी आवाज मिलाने को आतुर है। यह एक बदलाव है कि कल तक हम लोग जहां भ्रष्टाचार को स्वतः अंगीकार करने की विवशता में थे, आज हम भ्रष्टाचार उन्मूलन की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता का धन जनता के लिए होना चाहिए, किसी भी राजनेता या नौकरशाह को यह अधिकार नहीं है कि वह जनता की अमानत में खयानत कर सके। अगर हम अपने ही धन की सुरक्षा चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने कहा कि अगर केन्द्र सरकार के मन में कोई खोट नहीं है तो क्यों नहीं वह जनलोकपाल बिल को पारित कर अपनी ईमानदारी का सबूत देती है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे गोजए महामंत्री डा. मुमताज ने कहा कि अन्ना हजारे की आवाज सवा अरब की आबादी की आवाज बन कर उभरी है, जिसे दबा पाना किसी सरकार के बूते की बात नहीं है। प्रेस क्लब उपाध्यक्ष अजीत सिंह और महामंत्री अनीस अहमद ने भी अपनी संस्था द्वारा इस आन्दोलन को पूर्ण समर्थन का विश्वास दिलाया। मानव सेवा संस्थान (सेवा) के निदेशक राजेश मणि, दूरदर्शन के पूर्व केन्द्राध्यक्ष डा. उदयभान मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार डा. राजेन्द्र कपूर ने कहा कि केन्द्र सरकार को हठवादिता छोड़कर देश की भावनाओं का आदर करना होगा। गोजए उपाध्यक्ष मनोज कुमार श्रीवास्तव ‘गणेश जी‘, समाजसेवी भीष्म चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार डा. दिनेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि अन्ना हजारे आज भारत की आवाज बन चुके हैं, जिसे दबा पाना असंभव है। लगभग एक घण्टे तक उपवास के बाद पत्रकारों ने जुलूस निकाला और कलेक्ट्रेट में ऐतिहासिक इमली के पेड़ के नीचे सभा की। सभा के दौरान जिला प्रशासन की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट जेपी सिंह को रत्नाकर सिंह, डा. मुमताज खान एवं मनोज श्रीवास्तव ने ज्ञापन दिया। सिटी मजिस्ट्रेट ने विश्वास दिलाया कि वे इस ज्ञापन को यथाशीघ्र राष्ट्रपति कार्यालय तक प्रेषित करा देंगे।
जन लोकपाल बिल की मांग के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को ले दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के समर्थन में बेगूसराय के युवा पत्रकारों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया. इस हस्ताक्षर अभियान में बुद्धिजीवियों और युवाओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने विचार लिखे और हस्ताक्षर किया. अभियान की शुरुआत बेगुसराय के वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैधनाथ चौधरी ने हस्ताक्षर
कर किया. इस अभियान में जिले के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अशांत भोला, शायक अलोक, नितेश रंजन, संतोष गुप्ता, संजीत कुमार सहित अनेक पत्रकारों ने अहम भूमिका निभाई. जिले के आम नागरिकों ने पत्रकारों के इस पहल की खुलकर सराहना की.
जौनपुर में भी पत्रकार संघ की पहल पर जौनपुर के पत्रकारों ने जनलोकपाल विधेयक पारित करने की मांग का समर्थन करते हुए सांकेतिक अनशन किया. कलेक्ट्रेट परिसर में सांकेतिक अनशन करते हुए पत्रकारों ने सभा कर इस बिल के समर्थन में दिल्ली में अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजार को अपना सहयोग देने का वचन किया. अनशन में संघ के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह, कैलाशनाथ, कपिलदेव मौर्य, साजिद हमीद, यशवंत सिंह, शशि मोहन सिंह, डा. विमला सिंह, जयप्रकाश, राजेंद्र सिंह, विनोद पांडेय, लोलारक दुबे, प्रमोद जायसवाल, आईबी सिंह, जय आनंद श्रीवास्तव, हुसनैन कमर, रवींद्र सिंह, डा. मनोज वत्स, राजेश श्रीवास्तव, डा. भारतेंदु मिश्रा, जेडी सिंह, अजीत पांडेय, मनोज उपाध्याय, अशीष श्रीवास्तव, रवि श्रीवास्तव, अजीत चक्रवर्ती, विद्याधर राय, अविनाश दुबे, योगेश श्रीवास्तव, राधा रमण तिवारी सच्चिदानंद, विनय सिंह आदि मौजूद रहे. संचालन मधुकर तिवारी ने किया.
जन संस्कृति मंच (जसम) के आह्वान पर अन्ना हजारे के आंदोलन के समर्थन में आज जसम के संयोजक व कवि कौशल किशोर, कवि भगवान स्वरूप कटियार, चन्द्रेश्वर, बीएन गौड़, प्रतिभा कटियार, जनवादी लेखक संघ के गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव, एपवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ताहिरा हसन व विमला किशोर, अलग दुनिया के कृष्णकांत वत्स, नाटककार राजेश कुमार, कथाकार सुभाषचन्द्र कुशवाहा व नसीम साकेती, लेनिन पुस्तक केन्द्र के प्रबन्धक गंगा प्रसाद, आर के सिन्हा, श्याम अंकुरम आदि लखनऊ के लेखक व संस्कृतिकर्मी झूलेलाल पार्क पहुँचे। इन्होंने धरना देकर भ्रष्टाचार के खिलाफ और न्याय के इस आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की।
इस अवसर पर हुई सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अन्ना हजारे के आंदोलन ने साबित किया है कि हम जिन्दा हैं और अन्याय व लूट से इस देश को बचाने, सत्ता के विरुद्ध प्रतिरोध की हमारी क्षमता खत्म नहीं हुई है। देश की जनता को एक ईमारदार व न्यायपूर्ण व्यवस्था चाहिए। सरकारी लोकपाल नहीं बल्कि जनलोकपाल चाहिए। जनता को ऐसा राजनीतिक तंत्र चाहिए जो उसके प्रति जवाबदेह हो। पर यह तो ऐसा तंत्र है जो लूट भ्रष्टाचार की संस्कृति पर टिका है।
वक्ताओं ने नागार्जुन की कविता का हवाला देते हुए कहा कि जेपी आंदोलन के समय इंदिरा गाँधी को निशाना बनाते हुए बाबा ने कहा था कि ‘हे देवि, तुम तो काले धन की वैशाखी पर टिकी हुई हो’ और ‘लूटपाट के काले धन की करती है रखवाली, पता नहीं दिल्ली की रानी गोरी है या काली’, पर मनमोहन सिंह की सरकार तो घोटालों के पहाड़ पर बैठी है और कालेधन की संरक्षक बन गई है। देश के बड़े हिस्से से इसने सामान्य लोकतंत्र का भी अपहरण कर लिया है। अन्ना के आंदोलन से ये सारे सवाल बहस के केन्द्र में आ गये हैं।

