75 साल के नौजवान अन्ना हजारे को बार बार सलाम, उनके हौसले को सलाम। भ्रष्टाचार के खिलाफ जन लोकपाल विधेयक लाने के लिए जन्तर मन्तर पर आमरण अनशन पर बैठे अन्ना हजारे से सैकड़ों मील दूर बनारस में रहते हुए महसूस कर रहा हूँ कि मैं और मेरे जैसे तमाम साथी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने को संकल्पित हो चुके हैं। बनारस में भी अन्ना हजारे के सर्मथन में नौजवान सड़कों पर उतर चुका है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुछ छात्र कल ही अन्ना साहब के समर्थन में अपने छात्रावास पर अनशन पर बैठे जिन्हें कुछ ही घंटों बाद वार्डेन ने जबरन उठा दिया। एक छात्र विश्वविद्यालय के सिंह द्वार स्थित मालवीय प्रतिमा के पास अनशन पर बैठ चुका है। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों ने कल ही शाम को भ्रष्टाचार के खिलाफ और अन्ना हजारे के सर्मथन में कैन्डिल मार्च निकाला।
काशी विद्यापीठ के भी छात्र आन्दोलन की राह पकड़ रहे हैं। स्वयंसेवी व सामाजिक संगठनों ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में अपनी सहभागिता दिखलाई। ‘जागो बनारस जागो’ संगठन के अगुआ दीपक मधोक ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने साथियों संग हौसला बुलंद किया। गाजीपुर की जुझारु और संघर्षशील संस्था समग्र विकास इंडिया के निदेशक व जिला पंचायत सदस्य ब्रजभूषण दूबे ने अपने दो अन्य साथियों के साथ सिटी स्टेशन स्थित शिव मंदिर पर 5 अप्रैल को ही भ्रष्टाचार के खिलाफ और अन्ना हजारे के समर्थन में अनशन शुरू कर दिया उनके साथ सैकड़ों की संख्या में जुझारु और ईमानदार साथी भी प्रतीक अनशन पर बैठे हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ एक माहौल बनता दिखायी दे रहा है।
इस माहौल को देखकर सत्तर का दशक याद आ रहा है। जब गुजरात में चिमन भाई पटेल की सरकार के खिलाफ नौजवानों ने शंखनाद किया था तब देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी थी। उस वक्त भी देश भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ था। भ्रष्टाचार के खिलाफ नौजवान जागा और गुजरात के आन्दोलन की चिन्गारी बिहार में आग का शोला बनी लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भी देश की तरुणाई को जगाया, नेतृत्व दिया। उनके नेतृत्व के पीछे न सिर्फ छात्र नौजवान बल्कि तबके विपक्षी दल भी साथ हो लिए। भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरा देश एक हो गया श्रीमती गांधी का सिंहासन डगमगाने लगा बुद्धिजीवी और पत्रकार भी आन्दोलित हो गये। वरिष्ठ पत्रकार डा. राम बहादुर राय और तमाम उन जैसे विचारों वाले पत्रकार कंधे पर झोला लटकाए अपनी लेखनी से संम्पूर्ण क्रांति के आन्दोलन को धार देने लगे। इसी बीच लोकबन्धु राजनारायण की श्रीमती गांधी के खिलाफ चुनाव याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला देते हुए श्रीमती गाँधी के चुनाव को रद्द कर दिया।
अन्ततः पच्चीस जून उन्नीस सौ पचहत्तर को देश में आपात स्थिति लागू कर दी गई लोकनायक समेत तमाम विपक्षी नेता हजारों नहीं बल्कि लाखों की तादात में जुझारु छात्र नौजवान मीसा और डीआईआर के तहत जेल के सींखचों के पीछे कैद कर लिए गये। अन्ततः उन्नीस महीने बाद इन्दिरा गांधी के तानाशाही का खात्मा हुआ और जनता पार्टी के रुप में नई सरकार का गठन हुआ। अब तीस वर्षों बाद फिर कांग्रेस का शासन है और पुनः भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का माहौल जेपी की तरह अन्ना हजारे ने भी बनाया है। उस वक्त हमारे जैसे नौजवान ‘जयप्रकाश का बिगुल बजा तो जाग उठी तरुणाई है तिलक लगाने तुम्हें जवानों क्रान्ति द्वार पर आई है’। जैसे गीत गाकर जहाँ झूम उठते थे वही सरकारी महकमों के भ्रष्टाचार पर कहर बनकर टूट पड़ते थे।
लगता है आज फिर इतिहास अपने आप को दोहराने का मन बना चुका है बशर्ते इस देश के नौजवान क्रिकेट में विश्व चैम्पियन बनने की खुमारी से उबरे और 75 साल के नौजवान अन्ना हजारे की रहनुमाई में भ्रष्टाचार का गला घोटने के लिए कमर कस ले अगर ऐसा होता है तो इससे बड़ी बात आज के दौर में कोई और नही हो सकती एक बार पुनः अन्ना हजारे को सलाम उनके बुलन्द हौसले को सलाम, उनके जज्बे को सलाम और उनकी लड़ाई में साथ देने वालों को भी सलाम। इस उम्मीद के साथ कि इस बार देश का नौजवान यह मौका नही चूकेगा भ्रष्टाचार का खात्मा करके ही दम लेगा आज इसी संकल्प की बेहद जरूरत आन पड़ी है।
लेखक अजय कृष्ण त्रिपाठी वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. वे इनदिनों पूर्वांचलदीप से जुड़े हुए हैं.

