Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

संगीत-सिनेमा

अब कुंजीलाल को चाहिए ‘पीपली लाइव’ से पैसा

: कुंजीलाल ने भेजा पीपली लाइव टीम को नोटिस : पांच साल पहले कुंजीलाल की संभावित मौत को टीवी चैनलों ने लाइव दिखाया था : उस दिन हर कोई सेहरा की ओर सरपट भागे जा रहा था. बैतूल-आठनेर राजकीय मार्ग पर जिला मुख्यालय से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर बसा सेहरा गांव को कल तक कोई नहीं जानता था. अचानक यह गांव देश के आधा दर्जन से भी अधिक न्यूज चैनलों पर छाया हुआ था. बैतूल जिले के इस छोटे से गांव ने पूरे बैतूल जिले को अंतर्राष्‍ट्रीय खबऱ का केन्द्र बना कर चर्चित कर दिया था. मात्र ढ़ाई हजार की आबादी वाले सेहरा गांव में देश के सबसे तेज न्यूज चैनल आज तक से लेकर देश के ही तथाकथित सबसे ठंडे न्यूज चैनल तक ओबी वैन के माध्यम से आने वाली मौत का लाइव टेलिकास्ट कर रहे थे.

: कुंजीलाल ने भेजा पीपली लाइव टीम को नोटिस : पांच साल पहले कुंजीलाल की संभावित मौत को टीवी चैनलों ने लाइव दिखाया था : उस दिन हर कोई सेहरा की ओर सरपट भागे जा रहा था. बैतूल-आठनेर राजकीय मार्ग पर जिला मुख्यालय से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर बसा सेहरा गांव को कल तक कोई नहीं जानता था. अचानक यह गांव देश के आधा दर्जन से भी अधिक न्यूज चैनलों पर छाया हुआ था. बैतूल जिले के इस छोटे से गांव ने पूरे बैतूल जिले को अंतर्राष्‍ट्रीय खबऱ का केन्द्र बना कर चर्चित कर दिया था. मात्र ढ़ाई हजार की आबादी वाले सेहरा गांव में देश के सबसे तेज न्यूज चैनल आज तक से लेकर देश के ही तथाकथित सबसे ठंडे न्यूज चैनल तक ओबी वैन के माध्यम से आने वाली मौत का लाइव टेलिकास्ट कर रहे थे.

आज पांच साल बाद उसी गांव में चैनल वाले तो दूर न्यूज पेपर वाले तक नहीं फटक रहे है. अब तक के इतिहास में विश्व की यह एकमात्र पहली घटना थी, जब किसी आदमी की आने वाली मौत के तमाशे का सीधा प्रसारण किया गया हो. सेहरा गांव का कुंजीजाल बढ़ई कल तक इस गांव का आम आदमी था, लेकिन आज तो वह देश-दुनिया की ज्योतिष विद्या के तथाकथित पूर्वानुमान को लेकर वाद-विवाद का केन्द्र बना हुआ था. गांव के छोटे से किसान किशन लाल बढ़ई के घर 20 अक्टूबर 1930 को जन्मा कुंजीलाल उर्फ पूंजीलाल अपने पिता स्वर्गीय किशनलाल के द्वारा बनाई गई तथाकथित जन्म कुण्डली की वजह से अपने 75 वें जन्मदिन पर अनहोनी घटना को लेकर उत्पन्न जिज्ञासा का केन्द्र बना रहा. कुंजीलाल को आज उसी के गांव वाले भूल गये, अगर कोई भूले-भटके उस सडक़ से गुजरे और किसी से पूछ बैठे कि क्‍यों भैया कुंजीलाल को जानते हो क्या…? इस सवाल पर लोग उल्‍टे ही सवाल कर बैठेंगे कि कौन कुंजीलाल…?

उस चौथी क्लास फेल कुंजीलाल ने अपनी तथाकथित मौत की तिथ‍ि और समय की पूर्व घोषणा को नया कलेवर देकर अपनी तथाकथित मौत का जबर्दस्‍त तमाशा खड़ा किया था. उसके इस तमाशे से  सटोरियों ने जमकर पैसा बनाया. न्‍यूज चैनलों ने जमकर टीआपी बटोरी. आज उस कुंजीलाल को सब भूल गए हैं. धर्म और अंधश्रद्वा का आपस में काफी गहरा सबंध रहा है. धर्म और आस्था से ही अंधविश्वास का जन्म होता है. ग्राम सेहरा को रातों-रात ख्याति दिलवाने वाले तथाकथित कलयुग के भीष्म-पितामह और आज के भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस बने कुंजीलाल ने अपनी तथाकथित मृत्यु की घोषणा करके स्वंय और अपनी अर्धागनी जयवंती बाई को नई पहचान दी. आज वही जयवंती बाई जब अपने ही गांव में लोगो के बगल से निकल गुजरती है तो उन्‍हें कोई प्रणाम तक नहीं करता है.

अब अचानक कुंजीलाल की मौत का तमाशा बनाने वाला जिन्न कब्र से एक फिल्म के रूप में आ गया है. जिससे कुंजीलाल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. जाने-माने फिल्म अभिनेता एवं निर्माता आमिर खान की बहुचर्चित फिल्म पीपली लाइव की पटकथा लेखिका सुश्री अनुषा रिजवी, बैतूल जिले के इस छोटे से गांव की इस पांच साल पुरानी घटना से अच्छी तरह से वाकिफ थीं. जब यह घटना हुई थी तब वो एनडीटीवी की रिर्पोटर थी. सेहरा के पास स्थित पीपला गांव को अपनी कहानी का पीपली गांव बता कर उन्‍होंने ऐसी कहानी लिखी, जो कुंजीलाल के मौत के तमाशे से जुड़ी हुई थी. चतुर-चालक और उच्च शिक्षा प्राप्त अनुषा ने कभी सपने में नहीं सोचा होगा कि चौथी क्लास फेल कुंजीलाल या उसके परिवार का कोई सदस्य, इस थीम चोरी को पकड़ कर उसे कानून के दायरे में ला खड़ा करेगा. कुंजीलाल ने अपने सहयोगी एवं प्रिंट मीडिया के उस घटना के प्रत्यक्षदर्शी सत्यकथा लेखक और अधिवक्ता संजय शुक्ला की मदद से अनुषा को कानूनी नोटिस भेजा है. नोटिस में कर पीपली लाइव की रायल्टी से आधा हिस्सा मांगा गया है.

एक बार फिर टीवी कैमरे वाले जब मौत के लाइव टेलीकास्ट की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म पीपली लाइव को लेकर कुंजीलाल को खबर बनाने के लिए पहुंचे तो कुंजीलाल उन पर जम कर बरसा. यह बात सोलह आने सच है कि द्वापर युग में केवल भीष्म पितामह के अलावा किसी को भी इच्छा मृत्यु वरदान प्राप्त नहीं था. वर्तमान के इस घोर कलयुग में नास्त्रेदमस से बड़ा कोई सटिक भविष्य वक्ता पैदा नहीं हुआ था. परन्‍तु एक अंक ज्योतिष विद्या के जानकार ने अपनी मृत्यु पूर्व घोषणा करके सबको हैरत में डाल दिया था. न्यूज चैनलो एवं सट्टा बाजार के संचालको ने पूंजीलाल की मौत के नाटक को जरिया बना कर जम कर पैसा कमाया था. आज उस कुंजीलाल के घर पर इस समय गली का कुत्ता भी नज़र नहीं आ रहा है. बीते 2005 की 20 अक्‍टूबर दिन गुरूवार को कुंजीलाल की तथाकथित मौत को लेकर ढेर सारे कयास लगाये जा रहे थे. कोई कह रहा था कि वह फांसी लगा कर या फिर किसी प्रकार का कोई जहरीला प्रदार्थ खाकर आत्महत्या कर लेगा या फिर कोई हत्या करवा देगा? पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और उसकी तथाकथित मौत तमाशा बन कर रह गई.टीवी चैनलो ने अपनी खबर को सनसनी खेज बनाने के लिए इस बात का सहारा लिया कि अपनी मौत की पूर्व घोषणा करने वाला कुंजीलाल इसके पूर्व जब भी कोई भविष्यवाणी किया है, वह सोलह आने सच साबित हो चुकी है.

बैतूल जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम सेहरा में 80 साल की उम्र पार कर चुके कुंजीलाल की इस भविष्यवाणी से हडक़ंप मचा गया था. दस दिन तो गांव का छोटा-बड़ा हर कोई 80 वर्षीय कुंजीलाल के घर पहुंचकर उससे मेल मिलाप कर रहा था,  क्योंकि गांव के अधिकांश लोग जानते थे कि कुंजीलाल ने अब तक जो भविष्यवाणी की है, वह खरी साबित हुई है. वैसे भी कुंजीलाल मालवीय इस क्षेत्र का जाना-माना ज्योतिष है.  कुंजीलाल के पिताजी स्वर्गीय किशन मालवीय का भी ज्योतिष के क्षेत्र में काफी नाम एवं सम्मान था. उसने भी अपनी स्वाभाविक मौत की तथाकथित भविष्यवाणी जिस तिथि को की थी, वह उसी तारीख और समय पर स्वभाविक मौत मरा था. जब उसके 80 वर्षीय पुत्र कुंजीलाल की तथाकथित मौत की बारी आई तो कुंजीलाल नहीं मरा, लेकिन लोग उसकी आने वाली मौत का आंख फाड़ कर लाइव टेलीकास्ट देखते रहे.

अपने घर की खाट पर लेटे कुंजीलाल ऊर्फ पूंजीलाल ने कहते हैं कि टीवी चैनल वालों ने ही उनकी मौत का तमाशा बना डाला था. उसने कभी भी अपनी मौत की भविष्यवाणी नहीं की थी. जाति से बढ़ई होने के बाद भी खेती-बाड़ी से अपने परिवार की रोजी-रोटी चलाने वाले इस बुजुर्ग किसान ने उम्र के इस पडाव में कभी भी अपनी इस कला को बेचा नहीं. उन्‍होंने शौकिया अंक ज्योतिष को जनहितार्थ के लिए समर्पित किया. 80 साल के कुंजीलाल ऊर्फ पूंजीलाल बैतूल ही नहीं बल्कि महाराष्‍ट्र के कई जिलो के जाने-माने और भरोसेमंद अंक ज्योतिषी विद्या के जानकार माने जाते हैं. उन्‍हें पूरा गांव किसी पंडित से कम सम्मान नहीं देता. मात्र चार क्लास तक पढ़े कुंजीलाल ने बताया कि मेरी मृत्यु की कथित आशंका मेरे स्वर्गीय पिता स्वर्गीय किशनलाल मालवीय के द्वारा बनवाई गई मेरी जन्म कुण्डली में ग्रहों की दशा एवं दिशा के आने की परिस्थिति में व्यक्त की गई थी.

कुंजीलाल के पास बैतूल ही नहीं नागपुर, भोपाल सहित मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र के कई जिलों से लोग समस्याओं के समाधान के आते है. मौत का इतना तमाशा होने के बाद भी लोग उनसे अपना भविष्‍य पूछते हैं. गांव के चंद्रभान हारोड़े, ओंकारप्रसाद हारोड़े और उनके अभिन्न मित्र 75 वर्षीय इंदल लिल्लोरे कहते हैं कि भविष्यवाणी तो गलत नहीं हो सकती लेकिन टीवी चैनल वालों ने बिना मतलब अपने के फायदे के लिए उसकी मौत का तमाशा बना कर पूरे गांव को बदनाम कर दिया. इतना सब कुछ हो जाने के बाद से अब न्यूज चैनल वाले उस गांव में नहीं फटकते है क्योकि पूरा गांव कुंजीलाल की मौत के तमाशे के बाद से इन टीवी वालों से चिढ़ा हुआ है. इस बुढ़े अंक ज्योतिष का ज्ञान चौसर के पासो से चलता है. जन्म तारीख, समय और स्थान से ग्रहों की दशा देख कर वह आज भी लोगो की शंका-कुशंका का समाधान करते हैं.  पीपली लाइव को नोटिस भेजते समय कुंजीलाल के वकील ने पटकथा लेखिका अनुषा रिजवी पर आरोप लगाया है कि उनके द्वारा पीपला गांव को पीपली बता कर मौत के लाइव टेलीकास्‍ट को फिल्म बना कर नई कानूनी आफत मोल ले ली है.

लेखक राम किशोर पंवार पत्रकार हैं.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

मेरी भी सुनो

अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता...

राजनीति-सरकार

मोहनदास करमचंद गांधी यह नाम है उन हजार करोड़ भारतीयों में से एक जो अपने जीवन-यापन के लिए दूसरे लोगों की तरह शिक्षा प्राप्त...

साहित्य जगत

पूरी सभा स्‍तब्‍ध। मामला ही ऐसा था। शास्‍त्रार्थ के इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रश्‍नकर्ता के साथ ऐसा अपमानजनक व्‍यवहार...

मेरी भी सुनो

सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने घटिया खाने और असुविधाओं का मुद्दा तो उठाया ही, मीडिया की अकर्मण्यता पर भी निशाना...