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अब हमें लूट-डकैती और दुष्‍कर्म के रियल्‍टी शो देखने को मिलेंगे !

रियल्‍टी शो: रियल्‍टी शो में प्रतिभागियों को गर्भवती होने का अहसास और प्रसव महसूस भी करने पड़े : ‘मीठी छूरी’ जैसे शो में किस बात का मुकाबला होगा : नाच गाकर बड़े हुए तो स्वयंवर रचाया, शादी की, गर्भवती हुए और बच्चे जने। अब उब गए ऐसी जिंदगी से तो कुछ इतर संबंध बनाने की जुगत चली है। और इसीलिए ‘मीठी छूरी’ दिल पे कटार चलाने आने वाली है। जी हां, यह कोई कहानी नहीं बल्कि ‘रियल्टी’ है और पिछले कुछेक वर्षों में हमारे मनोरंजक मीडिया चैनलों के ‘सभ्यतापूर्वक विकास’ की कहानी भी। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाली ‘मेरी आवाज सुनो’ जैसी प्रतियोगिता से सुनिधि चैहान जैसी गायिका देश को मिली, फिर इसके बाद तो ऐसे शो प्रसारित करने की होड़ लग गई। इसके कई अच्छे परिणाम देखने को भी मिले। इसके बाद श्रेया घोषाल… आदि अनेक अच्छी प्रतिभाओं की खोज हुई। रियल्‍टी शोज से ना सिर्फ गाने की बल्कि नृत्य, कामेडी, प्रतिभा खोज, खतरों के खिलाड़ी जैसे ढेरों रियल्टी शो के माध्यम से देश के दूर दराज क्षेत्रों तक से विभिन्न तरह की प्रतिभाओं को पहचाना जा सका। वे सामने आए और उन्हें उचित पहचान मिली।

रियल्‍टी शो

रियल्‍टी शो: रियल्‍टी शो में प्रतिभागियों को गर्भवती होने का अहसास और प्रसव महसूस भी करने पड़े : ‘मीठी छूरी’ जैसे शो में किस बात का मुकाबला होगा : नाच गाकर बड़े हुए तो स्वयंवर रचाया, शादी की, गर्भवती हुए और बच्चे जने। अब उब गए ऐसी जिंदगी से तो कुछ इतर संबंध बनाने की जुगत चली है। और इसीलिए ‘मीठी छूरी’ दिल पे कटार चलाने आने वाली है। जी हां, यह कोई कहानी नहीं बल्कि ‘रियल्टी’ है और पिछले कुछेक वर्षों में हमारे मनोरंजक मीडिया चैनलों के ‘सभ्यतापूर्वक विकास’ की कहानी भी। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाली ‘मेरी आवाज सुनो’ जैसी प्रतियोगिता से सुनिधि चैहान जैसी गायिका देश को मिली, फिर इसके बाद तो ऐसे शो प्रसारित करने की होड़ लग गई। इसके कई अच्छे परिणाम देखने को भी मिले। इसके बाद श्रेया घोषाल… आदि अनेक अच्छी प्रतिभाओं की खोज हुई। रियल्‍टी शोज से ना सिर्फ गाने की बल्कि नृत्य, कामेडी, प्रतिभा खोज, खतरों के खिलाड़ी जैसे ढेरों रियल्टी शो के माध्यम से देश के दूर दराज क्षेत्रों तक से विभिन्न तरह की प्रतिभाओं को पहचाना जा सका। वे सामने आए और उन्हें उचित पहचान मिली।

डर को जीतने वालों को भी पहचाना जा सका। कई शो की सफलताओं से प्रेरित, पिछले कुछेक वर्षों में रियल्टी शो की बाढ़ विभिन्न चैनलों पर आ गई। इसमें बिग बॉस, इमोशनल अत्याचार, खतरों के खिलाड़ी, स्वयंवर, देसी गर्ल, मुझे इस जंगल से बचाओ, पति पत्नी और वो, आदि आदि रहे। वैसे तो कई रियल्टी शो को आलोचना का शिकार होना पड़ा है, पर कुछ ऐसे रहे जिसने यह प्रश्न पुरजोर तरीके से उठाया कि आखिर क्या खोज रही हैं ये प्रतियोगिताएं और क्या परोसा जा रहा है यहां ? कभी वरिष्‍ठ पत्रकार प्रभाष जोषी जी ने व्यंग्य से कहा था कि स्वयंवर दिखाया है, तो अब प्रसव भी दिखाओ! और हुआ यही।

स्वयंवर के बाद पति पत्नी और वो में प्रतिभागियों को गर्भवती होने का अहसास और प्रसव महसूस भी करने पड़े। आखिर क्या सीखा ? किस बात की प्रतिस्पर्धा, कैसा मुकाबला है यह सब ?और अब आ रहा है मीठी छूरी न.-1, ‘कौन चुरा सकती है आपका ब्याय फ्रेंड’ प्रश्न वाले प्रोमो के साथ। यानी मुकाबला होगा दूसरे का साथी चुराने का। क्या खूब! प्रोमो में प्रतिभागी स्वयं यह कहती सुनाई देती है कि इस शो में हिस्सा लेने के बाद सचमुच मेरी शादी नहीं होगी।

धारावाहिकों/फिल्मों में दिखाये जाने वाले विवाहेत्तर संबंध अब रियल्टी शो बन रहे हैं। हालांकि मीडिया/धारावाहिक/फिल्म समाज के दर्पण माने जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो समाज में घटता है- वही यहां दिखता है। लेकिन क्या ऐसा सचमुच हो रहा है ? क्या हमारे समाज की यह वास्तविकता है या संस्कार! या फिर मीडिया ऐसे संस्कार परोस कर समाज पर यह सब थोप रहा है? यह एक बड़ा सवाल है।

‘मीठी छूरी’ जैसे शो में किस बात का मुकाबला होगा ? ऐसे गलत संस्कारों का ? जो सामाजिक रूप से ही नहीं बल्कि वैधानिक रूप से भी गलत है। तो क्या आने वाले दिनों में हमें चोरी, लूट-पाट, डकैती, दुष्कर्म आदि के मुकाबले भी देखने को मिलेंगें ? मेरे यह लाइन लिखने के पहले ही कहीं प्रोड्यूसरों को कोई ऐसा विचार न मिल गया हो! नए शो बनाने का। भगवान ना करे!

लेखिका लीना मीडिया मोर्चा की संपादक हैं.

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