बसंत आया, पिया न आये, पता नहीं क्यों जिया जलाये।
पलाश-सा तन दहक उठा है, कौन विरह की आग बुझाये।।
हवा बसंती, फ़िज़ा की मस्ती, लहर की कश्ती, बेहोश बस्ती।
सभी की लोभी नज़र है मुझ पे सखी रे अब तो खुदा बचाये।।
पराग महके, पलाश दहके, कोयलिया कुहके, चुनरिया लहके।
पिया अनाड़ी, पिया बेदर्दी, जिया की बतिया समझ न पाये।।
नज़र मिले तो पता लगाऊं कि तेरे मन का मिज़ाज क्या है।
मगर कभी तू इधर तो आये नज़र से मेरे नज़र मिलाये।।
अभी भी लम्बी उदास रातें, कुतर-कुतर के जिया को काटें
असल में ‘भावुक’ खुशी तभी है जो ज़िन्दगी में बसंत आये।।
मनोज ‘भावुक’ इन दिनों हमार टीवी में प्रोग्राम प्रोड्यूसर हैं। उनके बारे में www.manojbhawuk.com पर जाकर ज्यादा जानकारी पा सकते हैं। मनोज से संपर्क [email protected] के जरिए कर सकते हैं।

