
हनी
बदायूं। कंप्यूटराइज्ड हो चुकी इस दुनिया में अब इंसान का दिमाग भी सुपर कंप्यूटर जैसा ही होने लगा है। विश्वास नहीं हो रहा, पर यह एक दम सच है। इंसान भी वयस्क नहीं, बल्कि छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो विश्व कीर्तिमान बनाने की राह पर बड़ी तेजी से अग्रसर हैं। जी, हां! पांच वर्षीय हनी नाम के जैसी जितनी मासूम है, उसमें उतनी ही तीव्र बुद्धि भी है। पीलीभीत जनपद के कस्बा बीसलपुर में मोहल्ला पटेल नगर निवासी निजी शिक्षक दिग्विजय सिंह व एडवोकेट सीमा कुमारी की होनहार बेटी ने छोटी सी उम्र में ही विशेष ख्याति अर्जित कर ली है। वह बरेली के राधा माधव स्कूल में क्लास केजीसी की छात्रा है। हनी को अब तक के समस्त राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्य सरकारें और उनके मुख्यमंत्री के साथ राजनीति जगत की अन्य जानकारियां व खेल जगत, अर्थ जगत एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी बेहद जरूरी जानकारियां कंठस्थ हैं। एक हजार से भी अधिक सवालों के जवाब वह मात्र पैंतालीस मिनट में आश्चर्यजनक रूप से दे देती है। उसका व उसके माता-पिता का सपना है कि हनी का नाम गिनीज बुक में दर्ज हो।
इसी तरह नन्हा अक्षत अब नक्षत्र के तारे की ही तरह चमकेगा, क्यूं कि वर्ल्ड रिकार्ड की ओर उसके कदम बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। बदायूं के मोहल्ला जवाहरपुरी में रहने वाले संजीव जौहरी डायट में शिक्षक हैं। उनकी पत्नी संजू सक्सेना दिसौलीगंज स्थित जूनियर हाईस्कूल में शिक्षिका हैं। इन शिक्षक दंपति का ही बेटा है अक्षत जौहरी। ग्यारह वर्षीय अक्षत फोर्थ क्लास का छात्र है, पर उसका दिमाग इंसानों की तो बात ही छोडिय़े,

अक्षत
सुपर कंप्यूटर जैसा है। उससे अगर पूंछा जाये कि 5 फरवरी सन 10 को कौन सा दिन था या सन 11 में 3 फरवरी को कौन सा दिन होगा, तो वह इस का जवाब आपका सवाल खत्म होते ही दे देगा, जो उसकी विलक्षण प्रतिभा को उजागर करने के लिए काफी है। उसे तेइस हजार छह सौ अस्सी साल का कैलेंडर कंठस्थ है और प्रति दिन पांच से छह साल का इजाफा कर लेता है। अक्षत के पापा संजीव जौहरी का कहना है कि वर्ष 24 में शाम के समय अचानक अक्षत ने उनसे दिसंबर महीने के दिन-तारीख पूछे, जिसका जवाब उसने सब सही बताया। अगले दिन बोला कि नवंबर महीने के दिन-तारीख पूछ लो, तो फिर सही बताया। बोले-दूसरे दिन सही जवाब सुन कर वह आश्चर्य में पड़ गये और सोचने लगे कि इसकी बुद्धि सामान्य बच्चों से अधिक है।
उन्होंने बताया कि बाद में अक्षत मोबाइल चलाना सीख गया, तो देखते-देखते अक्षत ने सैकड़ों साल का कैलेंडर कंठस्थ कर लिया और अब तो वह फालतू समय में प्रतिदिन दो-चार साल के दिन-तारीख याद कर लेता है, जो अच्छा लगता है। अक्षत की मम्मी संजू सक्सेना तो बेटे को देख कर फूली नहीं समाती हैं। वह कहतीं हैं कि उनके बेटे ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो आज तक किसी ने नहीं किया, इसलिए उनका सपना है कि अक्षत का नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज होना चाहिए। मम्मी के सपना साकार होने का समय आ गया है, क्यूं कि अक्षत ने 28 दिसंबर 2010 को हरियाणा के गुडग़ांव शहर में आयोजित परीक्षा दी, जिसमें सफल होते ही उसका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हो
जायेगा, इसके बाद गिनीज बुक के लिए राह आसान हो ही जायेगी। यह दोनों ही बच्चे अपनी विलक्षण प्रतिभा के चलते विशेष सम्मान पाते रहते हैं एवं विशेष ख्याति अर्जित कर चुके हैं।
लेखक बीपी गौतम स्वतंत्र पत्रकार है.