ईष्या : मैं ईष्या नहीं करता, सुन्दर मुखड़े कोमल काया देख कर मैंने कभी नहीं सोचा कि भगवान ने मुझे ऐसा क्यों नहीं बनाया। धनवानों के ठाठ-बाठ मुझे कभी आकर्षित नहीं कर पाये। परन्तु, जब कभी किसी सैनिक को राष्ट्र पर कुर्बान होते देखता हूँ या सुनता हूँ तो मन विह्वल हो उठता है। मैं सैनिक क्यों नहीं बना, शायद यही मेरे मन की ईष्या है, हे शहीदों तुम्हें सलाम!
व्यवस्था : व्यवस्था पालक नदी पर पुल बँधा देता है जिससे कमजोर से कमजोर व्यक्ति भी पुल पर चढ़ कर पार जा सके। मजबूत शासक सुदृढ़ व्यवस्था देते हैं। इसी प्रकार राष्ट्र की प्राकृतिक, भौगोलिक वस्तुओं व मानवीय क्षमताओं को बुद्धि, विवेक व श्रम से जोड़ कर जनहित उपयोगी बनाना ही राष्ट्रीय व्यवस्था है। यह शासन का कर्तव्य है। साधनों का बहाव प्रचुरता से रिक्तता की ओर चले, बाढ़ को सूखे से मिलाएं, नहरों को खेतों से जोड़ें। उन्मादी-उदंडी को सजा, विजय के लिए नैतिकता, असहाय को सहारा यही उत्तम व्यवस्था का सिद्धान्त है। घाटे की रेलवे लाइनों का निजीकरण सरकारी कुव्यवस्था की कहानी अपनी ही जुबानी है। तमाम सरकारी विशेषाधिकारों के चलते घाटे के सौदे निजी हाथों में आते ही सोना उगलने लगते हैं। या तो निजी हाथों में पारस है या सरकार अपनी नीयत के प्रति गम्भीर नहीं है।
आईएएस : प्रतिवर्ष दस लाख उम्मीदवारों में से छांट कर भेजी जाने वाली पचास-पचपन आईएएस की क्रीम राष्ट्र को पौष्टिक तत्व नहीं दे पा रही है। लगता है कि प्रक्रिया में कहीं दोष है। यह भी दूध की क्रीम की तरह अपच को बढ़ावा देती है जबकि क्रीम निकलने के बाद बची छाछ सेहत के लिए उत्तम होती है। राष्ट्र को इस छाछ से ही उम्मीद करनी चाहिए।
यतीम : दावत का खाना बच जाने पर दावत के बचे खाने को खाकर यतीम ही उपकार कर रहे हैं, वरना घूरे पर फेकते तो उस खाने में कीड़े पड़ रहे होते, जिसे आप कुछ समय पहले व्यंजन कह रहे थे। मांसाहारी के लिए भी अन्न चाहिए। एक किलो गोश्त लेने में करीब सात किलो अन्न खप जाता है।
चुनाव : चार-पाँच साल तक अपने घावों के दर्द भरे दुखड़ों को आँसुओं से लिख कर रख था ताकि चुनाव में इस सनद को दिखाया जायेगा परन्तु ऐन मौके पर इन पन्नों पर स्याही की दावात ही उलट गयी। बताओ यदि चुनावों में अपने दुख दर्द को भूलकर जाति, धर्म या लहर पर वोट डालेंगे तो हिन्दुस्तान का लोकतन्त्र 60 वर्ष तो क्या छह सौ वर्षो में भी परिपक्कव नहीं हो सकेगा।
लेखक गोपाल अग्रवाल समाजवादी आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। इन दिनों समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति के हिस्से हैं। मेरठ निवासी गोपाल से संपर्क [email protected] के जरिए या फिर 09837087693 के माध्यम से किया जा सकता है।

