अभी तक ना तो आपने ऐसा देखा होगा और ना ही आपने सुना होगा। अब जो कुछ आप पढ़ने जा रहे हैं, शायद इससे पहले कोई दूसरी ऐसी खबर हिंदुस्तान से ना आई हो। इसे मजाक कहा जाये, संस्कृति पर हमला या फिर सिरफिरापन… इस काम को कुछ भी कहा जा सकता है। वैसे तो रविवार की रात को सैकड़ों की तादात मे बारातें निकल रही थीं, लेकिन एक ऐसी बारात को लेकर कौतूहल बना हुआ था, और होता भी क्यों नहीं, जो खास लोगों की शादी थी। इंसानों की शादी तो होते हुये देखी गई, लेकिन कुत्ते-कुतिया की शादी को होते हुये पहली बार इटावा वासी देख कर अंचभें मेंपड़ गए थे।
जी हां, हम बात कर रहे हैं कुत्ते-कुतिया की शादी की, जो हुई है उत्तर प्रदेश के इटावा शहर में। वो भी पूरे धूमधाम से। पहली बार किसी कुतिया की शादी कराई गई। कहा यह जा रहा है कि कुतिया के मालिक अतर सिंह की 46 साल के करीब उम्र हो जाने के बाद अभी भी शादी नहीं हुई है, तो
महंतों की सलाह पर इसी दोष को दूर करने के लिये कुत्ते-कुतिया की शादी कराई गई है। नगर में एक अनोखी शादी रविवार को हुई। इस शादी में जुटे बारातियों ने खूब मौज-मस्ती की। बैंड-बाजा बजा। दावत भी चली। आम शादियों से इस शादी में फर्क इतना था कि दूल्हा मुखिया (कुत्ता) और दुल्हन जूली (कुतिया) जानवर थे।
यह अनोखी शादी महेरा चुंगी के पास हुई। इसमें दूल्हा मुखिया की बारात लेकर बाबा रामनाथ निवासी पक्का तालाब पहुंचे। जबकि दुल्हन की ओर से बारातियों की आवाभगत महेरा चुंगी निवासी अतरसिंह ने की। क्योंकि जूली इन्हीं के यहां पली थी। शाम के समय बारात चढ़ी। दूल्हा बनाकर मुखिया को कार पर बैठाया। बैंड-बाजे की धुन पर बाराती ही नहीं घराती भी खूब थिरके। दुल्हन जूली के दरबाजे पर बारात के पहुंचने पर बाकायदा सभी रस्में अदा की गईं। रस्मों को पं. सच्चिदानंद दीक्षित ने अदा कराया।
किसी महंत ने अतर सिंह को ये बता दिया कि अगर वे कुत्ते-कुतिया की शादी करवा देते हैं तो अगले जन्म में हर हाल में उनकी शादी हो जायेगी। इस शादी में सबसे अहम बात यह है कि इटावा के लोग बराती बन कर इस शादी मे जमकर नाच गाकर मजा लिया। इस साल विवाह समारोह की धूम मची हुई है। ऐसे में कुत्ते भी अछूते नहीं रह गए हैं और जब शहर के पक्का तालाब स्थित जागेश्वर नाथ मंदिर पर एक कुत्ते का विवाह समारोह का आयोजन किया गया तो देखने वाले स्तब्ध थे। ऐसी शादी शायद किसी खुशनसीब वर व वधू की भी किस्मत में भी नहीं थी। कुत्ते के विवाह समारोह में बारातियों की संख्या ही पांच सैकड़ा से अधिक थी।
समारोह में प्रत्येक रस्म का निर्वहन किया गया। यह रिश्ता सात जन्मों तक कायम रह सकेगा, यह तो नहीं कहा जा सकता, परंतु उत्साह में कहीं कोई कमी नहीं रही।
इस अद्भुत विवाह समारोह के सैकड़ों लोग चश्मदीद बने। बारातियों के साथ ही घरातियों के लिए भी इस समारोह के लिए यकीन कर पाना आसान नहीं हो पा रहा था। विवाह समारोह की क्षेत्रीय लोगों को जैसे ही जानकारी हो रही थी कि इस विवाह के चश्मदीद बनने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ रहा था। कुत्ते कुतिया की शादी कराने वाले पंडित का कहना है कि शास्त्रों मे कुत्ते-कुतिया की शादी का जिक्र नहीं है लेकिन फिर लोगों की भावनाओं को ध्यान मे रख कर इस शादी को कराया जा रहा है, लेकिन पंडित के पास इस बात का कोई जबाब नहीं है कि जब शास्त्रों मे किसी कुत्ते की शादी का ज्रिक नही है तो फिर इस तरह का खिलवाड़ क्यों कराया जा रहा है।
अपनी कुतिया की शादी कराने वाले अतर सिंह का कहना है कि उन्हें विदेश में एक युवक ने एक कुतिया से शादी कर ली है कि खबर से प्रेरणा मिली है, इसीके चलते हमने कुत्ते-कुतिया की शादी कराने का मन बनाया है। इस अजीबो-गरीब शादी की भले ही चर्चा हो जाये, लेकिन शादी कराने वाले इस शादी का मकसद समझाने मे नाकाम रहे हैं। इसको लेकर ऐसा माना जा सकता है कि यह शादी कराने वालों की सनकपन की करतूत है।
लेखक दिनेश शाक्य इटावा में टीवी पत्रकार हैं.

