: बुरा हाल है अम्बेडकर नगर जिला मुख्यालय का : मूलभूत सुविधाओं का भी घोर अभाव है : अम्बेडकरनगर जिला, जिसे बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के सपनों का जिला कहा जाता है। यह जिला बसपा के अभेद्य दुर्ग के नाम से भी मशहूर है। इसका सृजन अपने प्रथम मुख्यमंत्रित्व काल में सुश्री मायावती ने 29 सितम्बर 1995 को किया था। इस जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर बसपा का ही परचम लहरा रहा है। प्रदेश की बसपा सरकार में तीन-तीन कैबिनेट मंत्री व एक सांसद इसी जिले के हैं। जिसमें रामअचल राजभर (परिवहन मंत्री), लालजी वर्मा (मंत्री चिकित्सा शिक्षा) और धर्मराज निषाद (मंत्री मत्स्य पालन) हैं। इतना सब होने के बावजूद भी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं वाले जिलों में शुमार इस कथित आदर्श जनपद के वासिन्दे बिजली, पानी, साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने से महरूम हैं।
इस जिले का मुख्यालयी शहर है अकबरपुर, और उपनगर शहजादपुर। इन दोनों उपनगरों के बीचों-बीच से पौराणिक नदी तमसा प्रवाहित होती है। नगरपालिका परिषद द्वारा संचालित अकबरपुर/शहजादपुर में अभी तक कुल 25 वार्ड थे, लेकिन नए परिसीमन के बाद शहर के चारों तरफ कई ग्राम पंचायतों के मजरों के शामिल होने से इसकी संख्या और बढ़ेगी। वार्डों की संख्या कितनी बढ़ी, इसकी अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हो सकी है। अकबरपुर/शहजादपुर मिलाकर फिलवक्त अभी 25 वार्डों के निवासियों, जिसकी आबादी गैर-सरकारी आंकड़े के अनुसार एक लाख से ऊपर है, को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। दोनों उपनगरों में साफ-सफाई व्यवस्था ध्वस्त है। हर गली-मुहल्लों में जगह-जगह कूडे़ के ढेर व बजबजाती नालियां, जहां भयंकर दुर्गन्ध उत्पन्न कर रही हैं, वहीं इनमें मच्छर/मक्खियों के पनपने से नगरजन हर मौसम में संक्रामक रोगों से ग्रस्त रहते हैं।
इसके अलावा नगर जनों की सबसे अहम समस्या पेयजलापूर्ति की है। राष्ट्रीय पर्व हो या फिर तीज-त्यौहार पेय जलापूर्ति कभी भीं सुचारू नहीं रहती है। आम दिनों में तो नगर जन बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाते हैं, और जलकल विभाग के कर्मचारियों का यह हाल है कि वे संसाधनों की कमी का रोना तो रोते हैं, जबकि उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर नगरजनों की समस्याओं को कुछ कम करने का प्रयास नही करते हैं। यहीं हाल
नगर के पथ-प्रकाश का भी है। सड़कों के किनारे व गलियों में लगी स्ट्रीट लाइटें कई-कई दिनों तक फ्यूज़ पड़े रहते हैं, जिससे वहां अंधेरा व्याप्त रहता है, लेकिन इसके बाद भी इसे बदलने की जहमत नहीं उठाई जाती है। यही नहीं शहर की सड़कों के किनारे पटरियों का निर्माण भीं नहीं हो सका है, जिससे सड़कों का किनारा टूट-फूटकर क्षतिग्रस्त हो रहा है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।
नगरपालिका परिषद अकबरपुर के चेयरमैन बसपा के कर्मठ लीडर हैं और ज्यादा समय वे मीटिंगों में ही व्यस्त रहते हैं। जिससे उन्हें नगरजनों की समस्याओं को सुनने व देखने की फुर्सत ही नहीं मिलती। इन सभीं समस्याओं के बारे में जब नगरपालिका परिषद के चेयरमैन से बात करने का प्रयास किया जाता हैं तो उनसे बात ही नहीं हो पाती, और जब किसी तरह बात होती भी हैं तो वे यह कहते हैं कि नागरिकों की समस्याओं के निराकरण के साथ ही उनको नगरीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रयासरत हैं। नगर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी बदहाल है। नागरिकों को कुल मिलाकर बमुश्किल 6 से 7 घण्टे ही बिजली मिल पाती है। अकबरपुर शहर को विद्युत आपूर्ति करने के लिए एक विद्युत उपकेन्द्र है, जो अपने जीवन का अर्द्धशतक पार कर चुका है, और इसमें लगे सभी विद्युत उपकरण जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गए हैं। विगत दो वर्षों से अकबरपुर विद्युत वितरण खण्ड के अधिशासी अभियन्ता के रूप में तैनात मोतीलाल द्वारा भगीरथ प्रयास कर विद्युत उपकेन्द्र के पुराने उपकरणों को परिवर्तित कराने व उनके स्थान पर दूसरे व अधिक क्षमता के उपकरणों को लगवाये जाने क्रम जारी है। परन्तु विद्युत कर्मियों की कमी के कारण दिन/रात होने वाली छोटी-मोटी विद्युत त्रुटियां भी समय पर नहीं ठीक हो पातीं।
इस तरह लोकल फाल्ट्स के चलते भी विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली के लिए तरसना पड़ता है। गर्मी, जाड़ा, बरसात कोई भी महीना हो अकबरपुर-शहजादपुर के लोगों को विद्युत समस्या से दो-चार होना पड़ता है। विद्युत अनापूर्ति की स्थिति में नपाप अकबरपुर के जलकल विभाग के नलकूप निष्प्रयोज्य होकर रह जाते हैं। फलतः पेयजलापूर्ति ठप हो जाती है। विडम्बना यह है कि अकबरपुर से सटे गांव महमदपुर में स्थित 132 केवी के विद्युत उपकेन्द्र से भीटी, कटेहरी, महरूआ और अकबरपुर के देहात क्षेत्रों को विद्युत आपूर्ति की जाती है, जबकि अकबरपुर शहर वासियों को टाण्डा स्थित विद्युत उपकेन्द्र के भरोसे रहना पड़ता है।
अकबरपुर शहर का तीन चौथाई भाग जो टाण्डा स्थित विद्युत उपकेन्द्र से जुड़ा हुआ है, उसमें आए दिन ब्रेक डाउन एवं स्थानीय त्रुटियां (लोकल फाल्ट्स) हुआ करती हैं, जिसके ठीक होने में कई-कई घंटे लग जाते हैं, और कहीं ये त्रुटियां/गड़बड़ियां रात को हो जाएं तो नगरजनों को बिजली से महरूम ही रहना पड़ जाता है। इनकी शिकायतों की कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है। विद्युत उपकेन्द्र के नियंत्रण कक्ष, अवर अभियन्ता, सहायक अभियन्ता ट्रान्समिशन आदि के सीयूजी नम्बरों पर यदि बात करने का प्रयास किया जाता है, तो पूरी घण्टी बजने के बाद फोन ही नहीं उठता। जिससे थक-हार कर उपभोक्ताओं को बिजली के बिना ही रहना पड़ता है। एक तरह से अकबरपुर/शहजादपुर शहर के परिप्रेक्ष्य में इसे नो-पावर, नो-वाटर की स्थिति ही कहा जाएगा। कथित आदर्श जनपद अम्बेडकरनगर के मुख्यालयी शहर अकबरपुर/शहजादपुर के नगरजन मूलभूत सुविधाओं का लाभ पाने से वंचित हैं।
लेखिका रीता विश्वकर्मा अम्बेडकर नगर (अकबरपुर) में पत्रकार हैं.

