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उसने कर ही लिया आत्‍महत्‍या की कोशिश

मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले की एक आदिवासी महिला फुलिया बाई ने दिनदहाड़े कलक्‍टर कार्यालय के समक्ष जहर पीकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन उसे ऐसा करने से बचा लिया गया. आमला विकास खण्ड के खजरीढाना गांव की आदिवासी महिला ने कुछ साल पूर्व जिला कलक्टर कार्यालय में आत्महत्या कर लेने वाली दलित महिला उर्मिला बाई की तरह एक बार फिर जीवन की लक्ष्मण रेखा को लांधने का प्रयास किया. पूर्व में दलित महिला उर्मिला भी दंबगो के आतंक से हैरान-परेशान थी लेकिन उसके बार-बार के शिकवा-शिकायतों को जब पुलिस और प्रशासन ने रद्दी की टोकड़ी में फेंक कर उसे भगवान भरोसे छोड़ दिया, तब उस दलित महिला ने कलक्टर कार्यालय के समक्ष जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी. इस बार भी फुलिया पत्‍नी रामजी जाति आदिवासी ने भी वही कृत्य दोहराने का प्रयास किया, वहां पर काफी देर से फरियाद कर रही महिला की चीख-पुकार सुन कर जब कोई नहीं आया तो लाचार बेबस महिला ने जहर की शीशी को पीकर अपनी जीवन लीला समाप्त करनी चाही.

मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले की एक आदिवासी महिला फुलिया बाई ने दिनदहाड़े कलक्‍टर कार्यालय के समक्ष जहर पीकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन उसे ऐसा करने से बचा लिया गया. आमला विकास खण्ड के खजरीढाना गांव की आदिवासी महिला ने कुछ साल पूर्व जिला कलक्टर कार्यालय में आत्महत्या कर लेने वाली दलित महिला उर्मिला बाई की तरह एक बार फिर जीवन की लक्ष्मण रेखा को लांधने का प्रयास किया. पूर्व में दलित महिला उर्मिला भी दंबगो के आतंक से हैरान-परेशान थी लेकिन उसके बार-बार के शिकवा-शिकायतों को जब पुलिस और प्रशासन ने रद्दी की टोकड़ी में फेंक कर उसे भगवान भरोसे छोड़ दिया, तब उस दलित महिला ने कलक्टर कार्यालय के समक्ष जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी. इस बार भी फुलिया पत्‍नी रामजी जाति आदिवासी ने भी वही कृत्य दोहराने का प्रयास किया, वहां पर काफी देर से फरियाद कर रही महिला की चीख-पुकार सुन कर जब कोई नहीं आया तो लाचार बेबस महिला ने जहर की शीशी को पीकर अपनी जीवन लीला समाप्त करनी चाही.

फुलिया कलक्टर के निजी सहायक अरूण सोहाने के पास भी गई, लेकिन एक दिन पूर्व ही अपना तथाकथित जन सुनवाई दरबार लगा चुके बैतूल कलैक्टर के कानों तक उस महिला की फरियाद जब नहीं पहुंची, तो उसने जहर खाकर मर जाना ही बेहतर समझा. महिला अपने ही गांव के कुछ दबंगो की नीच हरकतों से परेशान थी, लेकिन उसकी शिकायतों को पुलिस और प्रशासन नजरअंदाज करता रहा, जिसके चलते बैतूल जिले की एक महिला ने मर्यादा और जीवन की लक्ष्मण रेखा को ही लांघने को उचित समझा. महिला अपने गांव से शिकायतों का पुलिंदा और जहर की शीशी साथ लाई थी.

बैतूल जिले के पुलिस अधीक्षक रामलाल प्रजापति की बहुचर्चित रामजी की सेना के द्वारा महिला को न्याय न दिलाने के कारण वह एक दिन पूर्व भी कलक्टर के जनता दरबार में जन सुनवाई के लिए आवेदन के साथ आई थी, लेकिन मूक-बघिर बनी पुलिस और प्रशासन की टीम ने उस महिला की गुहार पर कोई ध्यान नहीं दिया, महिला को तंग आकर जहर पीने को विवश होना पड़ा. मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है तथा प्रदेश की पचास प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिलवाने की वकालत करने वाले शिवराज सिंह चौहान के राज्य में उनकी बहनें यदि आत्महत्या का प्रयास करती हैं तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है. आदिवासी नेता प्रेम कुमार उइके ने उक्त मामले को शर्मनाक बताते हुये प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग कर डाली है.

बैतूल से रामकिशोर पंवार की रिपोर्ट.

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