देश और दुनिया में योग से निरोग रहने का गुर सिखाते सेलिब्रिटी बन चुके बाबा रामदेव हफ्ते भर से छत्तीसगढ़ के दौरे पर थे। अलग-अलग शहरों में उनके योग शिविर आयोजित हुए, इसके अलावा प्रेस कांफ्रेंस के जरिए उन्होंने अपनी बात आम जन तक पहुंचाई। इस दौरान कई बार उन्हें असुविधाजनक सवालों का भी सामना करना पड़ा। मसलन, जांजगीर में हुए कार्यक्रम में बैनर पर वीडियोकॉन नजर आया। दरअसल यह कंपनी इस क्षेत्र में अपने एक पावर प्लांट की वजह से विवादों में आ गई है। ऐसे में बाबा को जांजगीर में तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह नवागढ़ और बेमेतरा होते हुए दुर्ग-भिलाई पहुंचे। बाबा रामदेव का योग शिविर भिलाई के सिविक सेंटर स्थित विशाल मैदान में 31 जनवरी 2011 की सुबह 5 बजे से था। बाबा खुद पौने पांच बजे मंच पर पहुंच गए थे और उनके पहले हजारों की तादाद में लोग उनसे योग सीखने की लालसा लिए वहां मौजूद थे।
पूरे ढाई घंटे चले योग शिविर में बाबा ने चुटीले ढंग से देश का काला धन वापस लाने, सीधे राजनीतिक हस्तक्षेप करने और देश का खोया हुआ गौरव लौटाने सहित अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस शिविर के बाद बारी आई प्रेस कांफ्रेंस की। यहां बाबा को कई तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। खास कर जिस भिलाई में उनके सहयोगी रहे राजीव दीक्षित की मौत हुई हो, वहां उनसे जुड़े सवाल पर बाबा का थोड़ा असहज होना स्वाभाविक था। हालांकि जवाब उन्होंने पूरी विनम्रता के साथ दिया। इस प्रेस कांफ्रेंस में बाबा से निम्न सवाल किए गए, जिसका उन्होंने जवाब दिया –
– विदेश में जमा काला धन वापस लाने की आपकी मुहिम में कितनी गंभीरता है?
— पूरा देश हमारी मुहिम को समर्थन दे रहा है। 30 जनवरी को देश के कुल 624 जिलों के 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर कर राष्ट्रपति के

बाबा रामदेव
– राजनीति में हिस्सेदारी की घोषणा क्या किसी महत्वाकांक्षा के चलते है?
— मैंने पहले ही कह दिया है कि मैं खुद चुनाव नहीं लड़ूंगा, वैसे हम राजनीति में शत प्रतिशत दखल देने जा रहे हैं। इसका स्वरूप क्या होगा, यह जल्द तय कर लिया जाएगा। अब तक की अपनी कोशिशों से हमने अपना एक बहुत बड़ा आध्यात्मिक और सामाजिक वोट बैंक तैयार कर लिया है।
– बड़े नोट बंद करने की दिशा में प्रधानमंत्री से आपकी मुलाकात बेअसर रही..?
— मैंने इस मुद्दे पर डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी। हैरत की बात यह है कि मनमोहन सिंह जी ने मुझे बताया कि ढाई दशक पहले जब वह (मनमोहन सिंह) रिजर्व बैंक के गवर्नर थे, तब उन्होंने देश में बड़े नोट बंद करने का प्रस्ताव सरकार को दिया था। मुझे लगता है कि सरकार भी पूंजीपतियों के दबाव में आकर इस संबंध में कोई निर्णय नहीं ले पा रही है। वैसे हम इस मुद्दे पर भी सरकार पर दबाव बनाएंगे।
– आपके सहयोगी रहे राजीव दीक्षित की पिछले दिनों भिलाई में हुई मौत के पीछे स्वास्थ्यगत कारणों को वजह माना जाता है। तो क्या स्वस्थ्य जीवन के लिए योग की तरफ आप उन्हें आकृष्ट नहीं कर पाए?
— पहली बात, हमारी संस्कृति रही है कि मौत पर विवाद नहीं करना चाहिए। राजीव दीक्षित यहां भिलाई में जिस हालत में पंहुचे थे उनका पूरा इलाज हुआ, यह सबको मालूम है। उनको जेनेटिक तौर पर हार्ट की प्रॉब्लम थी, हालांकि योग तो वो कर ही रहे थे। कोई दुर्घटना हो जाती है तो उसे अपवाद ही मानना चाहिए।
– छत्तीसगढ़ में शराब के बढ़ते कारोबार पर अंकुश लगवाने के लिए आप क्या पहल करेंगे?
— मैं मुख्यमंत्री से इस संबंध में चर्चा करूंगा। यहां ऋषिपुत्रों के देश में शीशीपुत्रों का बढऩा शोभा नहीं देता।
– योग से निरोग करने के नाम पर आप का संस्थान महंगी दवाएं बेच रहा है?
— हमारी और दूसरी कंपनियों की दवाओं के बाजार मूल्य की तुलना कर लीजिए। हमारी दवाइयां 25 से लेकर 100 फीसदी तक सस्ती है। बाजार में जो एलोविरा 1200 से 1300 रूपए में विदेशी कंपनियां उपलब्ध कराती हैं, हमने उसे 180 रूपए में उपलब्ध कराया है। लागत निकालने के बाद हम एक सामान्य लाभांश रख कर के लोगों को दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
– आपकी दवाओं में छत्तीसगढ़ से कितनी जड़ी-बूटियां इस्तेमाल होती हैं?
— हमारी कोशिश है कि इस बारे में राज्य सरकार से एमओयू हो जाए। जिससे यहां से बड़ी मात्रा में जड़ी-बूटी का इस्तेमाल हम कर सकें।
– जांजगीर के योग शिविर में उस उद्योग समूह का बैनर लगाया गया, जिसका पावर प्लांट विवादों के साये में है?
— औद्योगिक घराने के लोग यदि कोई अच्छा काम करते हैं तो हमें उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। हर काम में बहस नहीं करना चाहिए। यदि कोई टैक्स चोरी करता है या दूसरे गलत काम करता है तो सरकार का तंत्र उससे निपटे, हम किसी को प्रोटेक्शन नहीं दे रहे हैं। हमनें जिससे भी पैसा लिया नंबर-एक का पैसा लिया। हम किसी से भी नंबर दो का पैसा नहीं लेते हैं।
– बढ़ती नक्सल गतिविधियों पर आपकी राय?
— नक्सली व्यवस्था बदलना चाहते हैं और व्यवस्था हम भी बदलना चाहते हैं। वो इसे खूनी क्रांति लाकर करना चाह रहे हैं हमनें शांतिमूलक, अहिंसामूलक क्रांति का संकल्प लिया है। भले ही अहिंसक रास्ता अतियार कर रखा है, लेकिन नक्सलवादी- माओवादी हमारे इस अभियान से सहमत हैं कि बाबा ठीक कर रहे हैं।
– ..आखिर इस पर अंकुश कैसे लगेगा..?
— यह एक आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समस्या है। राजनीतिक लोगों के द्वारा इन्हें संरक्षण मिल रहा है। यहां के मूल निवासी आदिवासियों पर बहुत अत्याचार हो रहा है और वहां विकास की योजनाएं नहीं पहुंच पाती हैं। महज दो प्रतिशत रायल्टी पर अरबों की खनिज संपदा लूटी जा रही है। यह दो प्रतिशत रायल्टी तो लीगल माइनिंग पर है, इलीगल माइनिंग पर तो वह भी नहीं मिलती है। एक हजार अगर लीगल माइनिंग है तो एक लाख से ज्यादा इलीगल माइनिंग की जा रही है, यह सरकार खुद कहती है। एक और महत्वपूर्ण बात खनन माफियाओं के साथ नक्सलियों के हाथ मिल गए हैं। हमको इस दिशा में भी सोचना पड़ेगा। इन सब समस्याओं का समाधान कर दीजिए, तब भी हालात न सुधरे तो आप ग्रीन हंट की बात करिए। ग्रीन हंट अंतिम अस्त्र होना चाहिए पहला नहीं।
– देश के संघीय ढांचे में परिवर्तन की जरूरत है?
— यह मैं नहीं कह रहा हूं बल्कि महात्मा गांधी ने खुद आजादी के दौर में कहा था कि पूरा सिस्टम बदलना पड़ेगा। आज देश में अंग्रेजी तंत्र चल रहा है, वह पूरा बदलने की जरूरत है। सारे लोग नया संविधान चाहते हैं।
– डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 2020 तक समृद्ध भारत का लक्ष्य रखा है। आपके सामने ऐसा कोई लक्ष्य..?
— हमने जो लक्ष्य तय किया है उसके मुताबिक 2011, 12 और13 परिवर्तन का दौर है और 2020 तक तो भारत निश्चित तौर पर विश्व महाशक्ति बन ही जाएगा।

