Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

राजनीति-सरकार

करोड़पति गरीबों को चाहिए मोटी सेलरी!

[caption id="attachment_2380" align="alignleft" width="91"]कमलजीत सिंहकमलजीत[/caption]: बीस रूपये पर जीवन गुजारने वाले जनता के सेवकों की प्रतिदिन की कमाई हजारों में : हमारे देश के सांसद खुश तो हैं लेकिन उससे कहीं ज्‍यादा नाखुश हैं। सांसदों के खुशी की वजह है, उन लोगों का तनख्वाह बढ़ना, पर उनके नाखुश होने की वजह है कि उनकी जेब उतनी नहीं भरी गई, जितनी उन्‍होंने चाही थी। यानी दिल्ली और अपने संसदीय क्षेत्र में दौरा करने के एवज में जितना बढ़ा हुआ भत्ता उन्‍हें चाहिऐ था, उतना उन्‍हें मिला नही। वैसे इस पूरे प्रकरण एक बात तो साफ है, हमारे सांसदगण जो कि खुद को जनता का सेवक कहते है…उन्‍हें अपनी सुख-सुविधा के आगे उस आम जनता की कोई फिक्र नही है, जिन्‍होंने उनको सांसद बनाया, जिनकी वजह से उन्‍हें तमाम तरह की सुविधाओं का उपभोग करने का आधिकार मिलता है।

कमलजीत सिंह

कमलजीत सिंह

कमलजीत

: बीस रूपये पर जीवन गुजारने वाले जनता के सेवकों की प्रतिदिन की कमाई हजारों में : हमारे देश के सांसद खुश तो हैं लेकिन उससे कहीं ज्‍यादा नाखुश हैं। सांसदों के खुशी की वजह है, उन लोगों का तनख्वाह बढ़ना, पर उनके नाखुश होने की वजह है कि उनकी जेब उतनी नहीं भरी गई, जितनी उन्‍होंने चाही थी। यानी दिल्ली और अपने संसदीय क्षेत्र में दौरा करने के एवज में जितना बढ़ा हुआ भत्ता उन्‍हें चाहिऐ था, उतना उन्‍हें मिला नही। वैसे इस पूरे प्रकरण एक बात तो साफ है, हमारे सांसदगण जो कि खुद को जनता का सेवक कहते है…उन्‍हें अपनी सुख-सुविधा के आगे उस आम जनता की कोई फिक्र नही है, जिन्‍होंने उनको सांसद बनाया, जिनकी वजह से उन्‍हें तमाम तरह की सुविधाओं का उपभोग करने का आधिकार मिलता है।

देश में भले ही आधे से ज्यादा आबादी, एक दिन का गुजारा अपने परिवार के साथ बीस रूपये में कर रही है… पर इससे हमारे सांसदों को कोई फर्क नही पड़ता, उन्‍हें बस फर्क इस बात से पड़ता है कि उनकी सुविधाओ में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। वैसे भी हमारे सांसदगणों को फर्क पड़े भी तो क्यों? इन्‍हें गरीब और गरीबी से क्‍या लेना-देना? अरे भई! इन महंगाई के मारे माननीयों की तनख्वाह समय पर जो आ जाती है, अब तो और बल्‍ले-बल्‍ले हो गई है। हाल ही में हुए एक सर्वे के मुताबिक, हिन्दुस्तान में 37 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं या कहें जीवनयापन करने के लिए मजबूर है। ग्रामीण इलाकों के सूरतेहाल पर नज़र डालें तो 22 प्रतिशत तथा शहरी इलाकों में रहने वाली लगभग 15 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा से नीचे रहने के लिए अभिशप्‍त है।

आंकड़ों की कहानी यहीं नही खत्म होती है। पूरे विश्‍व में भ्रष्‍टाचार के मामले में भारत का नाम 100 देशों के अंदर है। साल 2009 में जीसीबी द्वारा 180 देशों में भ्रष्‍टाचार की स्थिति का सर्वे कराया गया, जिसमें भारत 84 वें स्थान पर आया। इस सर्वे में जनता ने भ्रष्‍टाचार में बढ़ोत्‍तरी के लिए देश के इन्‍हीं माननीयों को ज़िम्मेदार ठहराया है। इसके बावजूद हमारे सांसदों को अपना वेतन काफी कम लगता है। आखिर यह देश में लोकतंत्र की कौन सी जीत है? इस लोकसभा में 544 सांसदो में से 315 सांसद करोड़पति हैं। हाल ही में राज्य सभा के लिए चुने गये 54 सांसदो में से 43 सांसद लखपति हैं। देश के ज़्यादातर सांसद कई फैक्ट्रियों और कई शिक्षण संस्‍थानों आदि के मालिक है।

अगर वेतन बढ़ोत्‍तरी के अलावा भी अन्य चीजों पर नज़र डाली जाय तो हमारे सांसदों को सैलरी के अलावा अपने क्षेत्र में दौरा करने, आफिस खर्च, सहायक, फोन इत्यादि ऐसी ना जाने कितनी सुविधाएं दी जाती हैं, जिनका सालाना खर्च कई लाख रूपये में होता है। कोई सांसद मकान या गाड़ी खरीदने हेतु बैंक से कर्ज भी लेता है तो उसे बिना ब्याज के या बिल्‍कुल कम दर पर कर्ज दिया जाता है। जिस आम जनता की गाढ़ी कमाई में से इन सांसदों को तनख्वाह और तमाम खर्च दिये जाते है, उस आम आदमी के लिए दिन भर में दो रोटी जुटाना भी दुश्‍वार होता है। देश को आज़ाद हुऐ 63 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी देश के कई ग्रामीण इलाकों में बिजली तक नही पहुंची हैं, लेकिन इसकी फिक्र किसको है? ये बात किसी से भी नही छिपी है कि हमारे देश के ज्‍यादातर सांसद कितने अमीर है। हर सांसद अच्छी से अच्छी लग्जरी गाड़ी से चल रहा है, कई सांसदों के आगे-पीछे कई बंदूकधारियों का काफिला भी चलता है, अगर सचमुच हमारे सांसदों की तनख्वाह पहले कम थी तो आखिर इतने सारे आडम्बरों का इन्तजाम कहां से होता आया है?

तनख्वाह बढ़ाने के लिए सांसदों ने देश के नौकरशाहों को मिलने वाली तनख्वाह का हवाला दिया है। एक तरफ ये सांसदगण अपने आप को जनता का सेवक कहते है और दूसरी तरफ जनता की सेवा के एवज में उन्‍हें मोटी सैलरी भी चाहिये। आज देश के उपर विश्‍व बैंक का लगभग 9 बिलियन डालर का कर्ज है और ऐसी स्थिति में सांसदों का तनख्वाह बढ़ाने की मांग काफी सोचनीय और शर्मनाक है।  ऐसे में एक सवाल ये उठता है कि आखिर इन सांसदों को इतनी तनख्वाह किस बात की दी जानी चाहिये? संसद में बैठकर जूता-चप्पल फेंकने की या फिर संसद में हल्ला मचाकर, अपशब्‍द कहकर, नोट लहराकर देश की गरिमा गिराने की? सबसे अहम सवाल यह कि अगर हमारे सांसदगण अपने काम के एवज में तनख्वाह की मांग कर रहे हैं तो क्या तनख्वाह बढ़ाने से पहले इन लोगों के काम आकलन नहीं होना चाहिये। सांसदों की तनख्वाह बढ़ा दी गयी है। आज सिर्फ सांसदों ने मांग की है, कल राज्‍यों में विधायक भी अपनी तनख्वाह बढ़ाने की मांग करेंगे। इसी तरह से तनख्वाह बढ़ाने का क्रम शुरू हो जायेगा और इसका सीधा असर उस आम आदमी पर पड़ेगा, जिसके लिए दिनभर में बीस रूपये जुटाना भी काफी मुश्किल होता है।

लेखक कमलजीत सिंह टीवी पत्रकार हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

मेरी भी सुनो

अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता...

राजनीति-सरकार

मोहनदास करमचंद गांधी यह नाम है उन हजार करोड़ भारतीयों में से एक जो अपने जीवन-यापन के लिए दूसरे लोगों की तरह शिक्षा प्राप्त...

साहित्य जगत

पूरी सभा स्‍तब्‍ध। मामला ही ऐसा था। शास्‍त्रार्थ के इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रश्‍नकर्ता के साथ ऐसा अपमानजनक व्‍यवहार...

मेरी भी सुनो

सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने घटिया खाने और असुविधाओं का मुद्दा तो उठाया ही, मीडिया की अकर्मण्यता पर भी निशाना...