कौन किससे फ़रियाद करे, क्योंकि कलयुग है राम राज्य नहीं रहा कि राजा से फ़रियाद करके अपना दुखड़ा दूर करने का प्रयास किया जाए. पूरे देश को जिस तरह महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है उसे देख कर लगता है कि वर्तमान शासक दोनों आँखों का अंधा और दोनों कानों से बहरा साथ में पत्थर दिल इंशान है, जो ना किसी को देख सकता है ना किसी कि सुन सकता है ना किसी के ह्रदय की पीड़ा समझ सकता है. दूध ननमुहों से दूर हो गया, शिक्षा का स्वरुप बदल गया, रोटी भी अब सोचकर खानी पड़ रही है, सब कुछ उलटा हो गया हमारे महान भारत को पता नहीं किसकी नजर लग गयी जो इस देश के अस्सी करोड़ लोग हाय-हाय कर रहें हैं. देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी किसी की क़त्ल होने की जांच नहीं कर पाती, दोनों हाँथ खड़े कर कहती है कि आई एम सॉरी. इस एजेंसी को किस बात की तनख्वाह दी जा रही है यहाँ भी कलयुग झलकता है.
देश की पुलिस, देश के नेता, मंत्री हर किसी के कारनामों से कलयुग की झलक साफ़ साफ दिखाई पड़ती है. देश का गरीब अगर अपना और अपने बच्चों का पेट भरने के लिए कोई छोटा मोटा जुर्म करता है तो उसे कई महीने या कई साल तक जेल में सड़ना पड़ता है और देश का अमीर अगर करोड़ों का घोटाला और कईयों का खून भी कर देता है तो उसे कुछ नही होता आखिर ऐसा क्यूं? देश के कई प्रमुख मुद्दों पर क्यूं हाँथ खड़े कर दे रहे हैं चिदंबरम और पवार जैसे नेता? वर्तमान सरकार आखिर कौन से युग में भारतीयों को ले जाना चाहती है? ना ही यह सरकार अपने आपको अब तक की सबसे घटिया सरकार कहलाना पसंद करेगी ना ही खुद को कलयुग की सरकार, तो फिर कौन हैं मनमोहन? कहाँ गया उनका अर्थशास्त्र, सोनिया जी कब समझ पाएंगी देश की जनता का दुःख दर्द? या राहुल कब तक गरीबी पर रिसर्च करते रहेंगे?
उत्तर प्रदेश की प्रसिद्द कहावत भैंस के आगे बीन बजाये भैंस खड़ी पगुराय, सच साबित हो रही है. वर्तमान सरकार के कारनामों से क्योंकि कितना भी लोग सड़कों पर हाय तौबा मचाएं सरकार टस से मस नहीं हो रही है. खाद्य वस्तुएं दिन प्रतिदिन महंगी होती जा रहीं हैं. क्या कलयुग के कारण ऐसा हो रहा है या कलयुगी सरकार की वजह से, कुछ ना कुछ कारण तो है जो देशवासियों को पिछले तीन सालों में तीन गुना तक महंगाई की मार झेलने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
लेखक पुष्पेन्द्र सिंह राजपूत फरीदाबाद में पत्रकार तथा न्यज वेबसाइट फरीदाबाद मेट्रो के संपादक हैं.

