“प्रणव मुख़र्जी ने कहा है कि सामाजिक कार्यकर्ता लोकतंत्र को कमजोर कर रहे है. माफ़ कीजिये, राजनेता तो बहुत पहले ही लोकतंत्र को नष्ट कर चुके है. देश में लूटमार के बाद नेताओं ने अचानक ‘लोकतंत्र का सिद्धांत’ खोज लिया. सिद्धांत और नेता, अजी छोडि़ए.” – ये कहना है बंदित कुईन जैसी फिल्म बनानेवाले फ़िल्मकार शेखर कपूर का. अन्ना और बाबा रामदेव ने कांग्रेस को उसकी औकात दिखा दी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का गैर जिम्मेदाराना बयान और बाबा के अनशन को नौटंकी कहना, दरअसल कांग्रेस की बौखलाहट और लाचारी को दर्शा रहा है.
कांग्रेस अन्ना हजारे के आन्दोलन को तो भगवा रंग देने में सफल नहीं हो पाया. पर जब बाबा रामदेव बाबा सामने आये तो बाकियों की तरह भाजपा ने भी कांग्रेस की कार्रवाई की निंदा की. बाबा के पक्ष में भाजपा क्या आ गयी कि मानों कांग्रेस के हाथ लॉटरी लग गयी. बाबा के अनशन को भगवा और साम्प्रदायिक ठहराने में कांग्रेस ने क्षण भर की भी देरी नहीं की, जैसे वो इसी पल की बाट जोह रही हो. दरअसल कांग्रेस अन्ना और बाबा के आन्दोलन को कुचलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. लेकिन उसे ये नहीं पता है कि बाबा और अन्ना के साथ इतना बड़ा जनसमुदाय जुड़ा है और उस में सभी रंग, समुदाय, सम्प्रदाय, जाति और धर्म के लोग शामिल हैं. ये कोई राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मसला नहीं है.
कपिल, दिग्विजय, प्रणव इन सबको अपनी जुबान पर लगाम लगाना होगा. कांग्रेस देश चला रही है अपना घर नहीं. दुनिया में भारत की अपनी ख़ास छवि है, उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए. हाल-फिलहाल नेताओं ने नहीं बल्कि योग और अध्यात्मिक गुरुओं ने देश का नाम विदेशों में रोशन किया है. श्री श्री रवि शंकर, दीपक चोपड़ा और खुद बाबा रामदेव के कई विदेशी अनुयायी हैं. गोवा में भी जहाँ हज़ारों की तादाद में विदेशी सैलानी आते हैं, उन में से कई भारतीय दर्शन, योग और आयुर्वेद से प्रभावित होते है और उसी का लाभ पाने के लिए यहाँ आते है. किसी आन्दोलन को भगवा रंग में रंग देने से किसी की काली करतूत पर पर्दा नहीं डाला जा सकता. देश की जनता को मूर्ख समझने की मूर्खता कोई ना करे कोई.
लेखिका नमिता शरण वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई पत्र-पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुकी हैं. इन दिनों गोवा में गोवासमाचार डॉट कॉम की एडिटर के रूप में कार्यरत हैं.

