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कांग्रेस सावधान… कचूमर निकालने निकल पड़े हैं मोदी के ‘हनुमान’!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे मजबूत सेनापति अमित शाह फिर से काम पर लग गए हैं। पांच राज्यों के चुनाव के तत्काल बाद वे अपने नए अभियान पर हैं। इस साल के अंत में और अगले साल होनेवाले करीब 15 विधानसभाओं के चुनाव के साथ सथ नका फोकस उन 200 लोकसभा क्षेत्रों पर है, जहां बीजेपी को मजबूत करके मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के सपने को साकार किया जा सकता है।

आराम न करना अमित शाह का शगल है और निशाना साधे रखना उनकी फितरत। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक सेनापति अमित शाह ने अपने अगले युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है। वे लोकसभा चुनाव में अपना रणनीतिक कौशल साबित कर चुके हैं। और अब यूपी और उत्तराखंड में उनकी रणनीतिक सफलता ने बीजेपी को चमत्कृत कर देनेवाली जीत दिला दी है। मणिपुर और गोवा में भी सरकार बनाने का काम पूरा हो गया है। इसीलिए शाह ने अपने अगले अभियान के लिए कमर कस ली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे मजबूत सेनापति अमित शाह फिर से काम पर लग गए हैं। पांच राज्यों के चुनाव के तत्काल बाद वे अपने नए अभियान पर हैं। इस साल के अंत में और अगले साल होनेवाले करीब 15 विधानसभाओं के चुनाव के साथ सथ नका फोकस उन 200 लोकसभा क्षेत्रों पर है, जहां बीजेपी को मजबूत करके मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के सपने को साकार किया जा सकता है।

आराम न करना अमित शाह का शगल है और निशाना साधे रखना उनकी फितरत। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक सेनापति अमित शाह ने अपने अगले युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है। वे लोकसभा चुनाव में अपना रणनीतिक कौशल साबित कर चुके हैं। और अब यूपी और उत्तराखंड में उनकी रणनीतिक सफलता ने बीजेपी को चमत्कृत कर देनेवाली जीत दिला दी है। मणिपुर और गोवा में भी सरकार बनाने का काम पूरा हो गया है। इसीलिए शाह ने अपने अगले अभियान के लिए कमर कस ली है।

अपनी टीम को भी निर्देश दे दिए हैं और होली का रंग उतरने से पहले ही इस नए मिशन पर काम भी शुरू हो गया है। दरअसल, अमित शाह का यह लक्ष्य मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ अभियान का हिस्सा है, जिसमें उन्हें देश के हर हिस्से से कांग्रेस को उस गहरे कोने में धकेलना है, जहां से वापस मुख्यधारा में आने के लिए राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस को कम से कम दो दशक की मेहनत लगे। कांग्रेस को सावधान होने की जरूरत है।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया। यूपी और उत्तराखंड में इतिहास का सबसे बड़ा बहुमत पाने के बाद शाह ने गोवा और मणिपुर में अल्पमत को बहुमत में बदल दिया है। इन नतीजों के बाद सिर्फ पंजाब में सरकार बनने और चार राज्यों में वंचित रह जाने से कांग्रेस के हौसले पस्त हैं और राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवालिया निशान है। इसके उलट बीजेपी और अमित शाह आसमान की उड़ान पर। अब शाह के निशाने पर वे 5 राज्य हैं, जहां इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। अमित शाह के अगला लक्ष्य साधने के मौके पर अगर अगली प्लानिंग की बात करें तो वे अब विधानसभाओं के साथ साथ बीजेपी के हाथ से पिछले चुनाव में छिटकी रह गई 120 लोकसभा सीटों पर भी वे पार्टी की ताकत और तेवर दोनों मजबूत करेंगे।

मोदी के सबसे मजबूत सिपहसालार के रूप में जबरदस्त सफल साबित हो चुके अमित शाह चाहते हैं कि सन 2014 की तरह ही 2019 में भी बीजेपी का जबरदस्त कमबैक हो। इसलिए उनका कुल फोकस अगले लोकसभा चुनाव पर है, जो 2019 में होने हैं। लोकसभा में बीजेपी के पास फिलहाल 282 सीटें हैं और अगली बार के लिए अमित शाह 350 के पार सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। वैसे वे असल लक्ष्य तो 400 के पार का है, लेकिन क्षेत्रीय दलों को वे अपने साथ फिलहाल नहीं गिन रहे हैं। इसीलिए उनका मजबूत फोकस 120 उन सीटों पर है, जहां बीजेपी का अपना थोड़ा बहुत वोट बेस है और गहन मेहनत करके पार्टी को जीत दिलाई सकती है।। फिलहाल महाराष्ट्र सहित केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, वेस्ट बंगाल और नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में लोकसभा की सीटों कुल करीब 200 ऐसी सीटें हैं, जहां पार्टी कुछ ऐसी हालत में है, कि थोड़ी सी रणनीतिक कौशल के जरिए नई ताकतों के सहयोग और तौर तरीकों से जोर आजमाईश की जाए तो बीजेपी मजबूत रूप से उभर सकती है। अमित शाह इन 200 में से कम से कम 120 सीटों पर जीत चाहते हैं।

लोकसभा की इन 120 सीटों से पहले मोदी के इस हनुमान का निशाना इस साल के अंत तक आनेवाले गुजरात, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय और हिमाचल विधानसभाओं के चुनाव हैं। इनमें से कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश और मेघालय में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के सपने को साकार करना है। गुजरात अमित शाह का होम ग्राउंड है, वहां लगभग 20 साल से बीजेपी की सरकार है। अमित शाह वहां अब तक की सबसे बड़ी सफलता के लिए जोर लगाने की कोशिश में हैं। इसके साथ ही बीजेपी अध्यक्ष का फोकस कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और मिजोरम पर भी अभी से है। मिजोरम के अलावा इन बड़े और महत्वपूर्ण प्रदेशों में लोकसभा से कुछ महीने पहले सन 2018 के अंत में चुनाव होंगे।

अमित शाह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगातार चौथी बार सरकार बनाने की और राजस्थान में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में अभी से जुट गए हैं। इन चार बड़े राज्यों में से सिर्फ कर्नाटक ही कांग्रेस के पास है। अमित शाह सबसे ज्यादा फोकस वहां भी कांग्रेस मुक्त भारत की दिशा में आगे बढ़ने का है। अरुणाचल, सिक्किम, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में 2019 के शुरू में चुनाव होंगे या लोकसभा के साथ भी चुनाव हो सकते हैं। अरुणाचल में बीजेपी की और आंध्रप्रदेश में गठबंधन वाली सरकार है। तेलंगाना में टीआरएस और ओडिशा में बीजू जनता दल की सरकार है। बीजेपी की कोशिश यहां अपनी ताकत बढ़ाने की होगी।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के अब तक के राजनीतिक सफलता के इतिहास पर नजर डालें, तो अपनी कला और कौशल से मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के सपने को साकार करने में वे हर कदम पर सफल साबित हुए हैं। शाह की कोशिश और भावी रणनीति में उनका यह राजनीतिक कौशल जबरदस्त निखार के साथ बीजेपी के लिए बहुत फायदेमंद रहा है। लेकिन कांग्रेस के अस्तित्व पर खतरे के रूप में अमित शाह बहुत खतरनाक स्वरूप में उभरकर सामने आए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी बीजेपी ने देश को तो भरोसा दिला ही दिया है कि राहुल गांधी में कोई दम नहीं है। लेकिन अब वे और अमित शाह राहुल गांधी की कमजोरियों को कांग्रेस और कांग्रेसियों के दिमाग से पहले दिल में उतारने की कोशिश में है। क्योंकि मोदी और शाह दोनों जानते हैं कि राजनीति में जो व्यक्ति एक बार दिल से उतर गया, वह दिमाग में फिर से कभी नहीं चढ़ता।

देश बीजेपी के कई बड़े नेताओं का हाल देख ही रहा है। राहुल गांधी को भी देश के दिल से उतारने के इस नए अभियान की कांग्रेस को पता नहीं, खबर भी है या नहीं। वैसे, अपने जैसे कुछेक जानकार कांग्रेस के लोगों को इसकी खबर देते भी रहे है, लेकिन कांग्रेस में आजकल कोई किसी की सुनता कहां है। अगर, सुनवाई होती, तो कांग्रेस की ऐसी दुर्गति नहीं होती। देखते हैं, बीजेपी के साहसी सेनापति का यह नया अभियान राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस को आगे और कितनी गहराई में धकेलता है। अगला लोकसभा चुनाव वैसे भी, अब कोई बहुत दूर नहीं है।

लेखक निरंजन परिहार राजनीतिक विश्लेषक हैं. Contact – 9821226894

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