आज घर बैठे पैसे कमाने का दौर चल पड़ा है और इस दौर को हवा दे रही हैं आज की कुछ ऑनलाइन कम्पनियाँ. बेरोजगार युवाओं को घर बैठे पैसा कमाने का लालच दे कर उनके भविष्य को अंधकार में ले जाकर ऐसी कम्पनियाँ धमाल मचा रही हैं. जो व्यक्ति पूरे महीने मेहनत करके 3000 रुपये कमा कर लाता था उसे घर बैठे हफ्ते में एक दिन काम करने के बदले 4000 से 9000 रुपये कमाने का प्रलोभन दे कर उनके साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. ऐसी कंपनिया कब भाग जायें, कुछ पता नहीं. लेकिन इन बातों से बेखबर आज के नौजवान इस दलदल में पड़ कर अपने पैसों को खोने का पूरा प्रयास कर रहे.
आज इन्टरनेट पर विभिन्न नाम से चलाई जा रही वेबसाइट जो ऑनलाइन सर्वे के नाम पर पैसा कमाने की तमाम तिकड़मबाजी करती हुई नज़र आ रही हैं, जो लोगों से पैसा वसूल कर उन्हें हर महीने एक निश्चित रकम देने का वादा कर रही हैं, कुछ 99 रुपये लेकर लोगों को जोड़ कर उन्हें हर महीने हजारों रुपये देने का वादा करती हैं तो कुछ 3500 रुपये लेकर हर महीने 2000 रुपये देने की बात करती हैं. और तो और कुछ कम्पनियाँ थोड़ी हाईफाई भी हो चुकी हैं जो डालर लेकर हर महीने डालर की शक्ल में पैसे देने की बात करती हैं. इन कंपनियों के नियम पर ध्यान दें तो इससे जुड़ने के लिये जो रकम ली जाती है उसके बदले पूरे एक वर्ष की सदस्यता प्रदान की जाती है. और सर्वे करने के लिये एक पिन दिया जाता है जिसका प्रयोग सर्वे करने से पहले किया जाता है.
अमूमन ऐसी कंपनियों के सर्वे बुधवार की रात में वेबसाइट पर डाले जाते हैं जिसे भरने के बदले पैसे दिए जाने का प्रावधान है. इस वेबसाइट पर सर्वे भरने के बदले उन्हें उस तारीख से पूरे दो महीने के बाद थोड़े थोड़े पैसे दिए जाते हैं. ऑनलाइन सर्वे के नाम पर धंधा कर रही ऐसी कम्पनियाँ हर हफ्ते सर्वे कराती हैं और इस सर्वे के बाद निर्धारित की गई रकम को अगले महीने की उसी तारीख को सर्वे करने वाले व्यक्ति के खाते में डाल दी जाती है. यहाँ ध्यान रहे कि यहाँ पर खाते का मतलब उस कंपनी के वेबसाइट अकाउंट से है, ना कि बैंक खाते से. इन कंपनियों द्वारा बनाये गये एक नियम के अंतर्गत अपने सर्वे के दौरान मिले पैसे को तब तक हस्तांतरित नहीं किया जा सकता जबतक आपके वेबसाइट अकाउंट में कंपनी द्वारा तय किया गया पैसा या पॉइंट पूरे नहीं हो जाते. कंपनियों के नियम भी कमाल के हैं. जब तक आपके निर्धारित किये गये पॉइंट या डालर पूरे होते हैं, तब तक दो महीने बीत चुके होते है. मतलब साफ़ है कि इन कंपनियों द्वारा लोगों को जोड़ कर उन्हें पहले और दूसरे महीने कुछ भी नहीं दिया जाता बल्कि तीसरे महीने में जा कर उनके पैसे उन्हें दिए जाते है.
मज़े की बात है की सर्वे भरने के इस खेल में बस आपको बटन दबाना है और बिना कुछ सोचे समझे सर्वे भरते रहना है. आप किसी भी ऑप्शन पर बटन दबा सकते हैं और अपने सर्वे को पूरा कर के फायेदा ले सकते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये संचार के क्षेत्र में एक बेहतरीन कदम है और बेरोजगारों के लिये एक सुनहरा अवसर है लेकिन यहाँ सिर्फ ये कहना ठीक होगा कि जिस कंपनी का ना कोई ऑफिस है ना ही कोई ठिकाना, बस एक वेबसाइट के सहारे पैसे बाँटने के चल रहे इस खेल को कहा तक उचित कहा जा सकता है जहाँ पर किसी भी चीज़ की कोई गारंटी नहीं है. वेबसाइट के बंद हो जाने की दशा में कोई भी कुछ नहीं कर सकता. ऐसा हो सकता है कि जनता के पैसे इकट्ठे करने के बाद ऐसी वेबसाइट को बंद कर दिया जाये और पैसे लेकर फरार हो जाये. ऐसा हुआ भी है. बिना किसी गारंटी के चल रहे इस खेल को ख़त्म होने में ज़रा भी देर नहीं लगेगी क्योंकि इसके संचालक कब अपनी वेबसाइट बंद कर दें, कुछ पता नहीं. इसके बाद सिर्फ अपनी लाचारी पर दो-चार आंसू बहाने के अलावा और कोई चारा भी नहीं बचेगा.
समाज से बेरोजगारी तो दूर होने से रही. ऐसे में इन जैसी कम्पनियाँ नौजवानों को कामचोर बनाने और बेरोजगारों के पैसे लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रही. हफ्ते में सिर्फ एक दिन काम करके हजारों रुपये कमाने के चक्कर में लोग अपनी रोज़ की जाने वाली मेहनत से दूर भाग रहे हैं. इन कंपनियों से जुड़े कुछ लोगों से बात करने पर पता चला कि सर्वे से मिले पैसे को जब अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करने की कोशिश की गई तो पैसे भी ट्रांसफर नहीं हो रहे. ऐसी कम्पनियाँ बिना कुछ किये पैसे देने का प्रलोभन दे कर जनता के पैसे को लूट कर फरार हो सकती हैं. इससे सचेत होने की आवश्यकता है नहीं तो हम खुद की गाढ़ी कमाई को यूँ ही गवां देंगे. ऐसे घर बैठे पैसे कमाने का मोह त्यागना होगा क्योंकि आज कोई मुफ्त में सलाह भी नहीं देता, ये तो हर महीने हजारो रुपये देने की बात कर रहे हैं.
लेखक इमरान ज़हीर मुरादाबाद में पत्रकार हैं.

