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क्षमा नहीं अब रण होना चाहिए

ओसामा बिन लादेन के मौत के तुरंत बात भारतीय समाचार पत्रों में भारत के थल सेना प्रमुख के बयान आया कि हम भी अमेरिका की तर्ज पर खुफिया अभियान चला सकते हैं। यह बयान इस ओर संकेत करता है कि हमारी सेना सक्षम व आतुर है पाकिस्तान में छुपे हुए देश के दुश्मन का सफाया करने के लिए। यहां जरूरत है सिर्फ राजनैतिक इच्छा शक्ति की। भारतीय थल सेना प्रमुख ने बातों ही बातों में इशारा कर दिया है कि अगर उन्हें मौका मिलता है तो वह पाकिस्तान के सरजमी पर घुस कर भारत के दुश्मनों का सफाया कर देंगे, लेकिन क्या हमारी सरकार के पास इतनी इच्छा शक्ति है कि वह दाउद, टाईगर मेमन, व मुंबई धमाकों में शामिल देश के गद्दारों के खिलाफ कोई कठोर कदम उठा सके या अब भी हम सिर्फ अमेरिका को संतुष्ट करने में लगे रहेंगे।

ओसामा बिन लादेन के मौत के तुरंत बात भारतीय समाचार पत्रों में भारत के थल सेना प्रमुख के बयान आया कि हम भी अमेरिका की तर्ज पर खुफिया अभियान चला सकते हैं। यह बयान इस ओर संकेत करता है कि हमारी सेना सक्षम व आतुर है पाकिस्तान में छुपे हुए देश के दुश्मन का सफाया करने के लिए। यहां जरूरत है सिर्फ राजनैतिक इच्छा शक्ति की। भारतीय थल सेना प्रमुख ने बातों ही बातों में इशारा कर दिया है कि अगर उन्हें मौका मिलता है तो वह पाकिस्तान के सरजमी पर घुस कर भारत के दुश्मनों का सफाया कर देंगे, लेकिन क्या हमारी सरकार के पास इतनी इच्छा शक्ति है कि वह दाउद, टाईगर मेमन, व मुंबई धमाकों में शामिल देश के गद्दारों के खिलाफ कोई कठोर कदम उठा सके या अब भी हम सिर्फ अमेरिका को संतुष्ट करने में लगे रहेंगे।

दूसरी तरफ अमेरिका हमारे साथ दोहरी नीति अपना रहा है। एक ओर तो वह कहता है आंतक के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ है, दूसरी तरफ वह पाकिस्तान का साथ भी देता है, जो कि भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है। अमेरिका के दोहरी नीति का आभास इस बात से भी लगता है कि हाल में अमेरिका ने कहा कि भारत में हुए हमले की तुलना अमेरिका पर हुए हमले से नहीं की जा सकती। उसने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका पर हुआ हमला विश्व का सबसे बड़ा हमला और भारत पर हुआ आंतकी हमला उतना बड़ा नहीं। माफ कीजियेगा ओबामा जी लेकिन जितनी एक अमेरिकी जान की कीमत है, उससे कहीं ज्यादा भारतीय जान की कीमत है। अब समय आ गया है कि भारत भी उन गद्दारों को, जो कि भारत में अनगिनत लोगों के दर्दनाक मौत के जिम्मेवार हैं उनको उनके अजाम तक पहुंचाया जाए। बेसक वे विश्व के किसी कोने में छुप कर क्यों न बैठे हों,  ताकि फिर कोई भारतीय सरजमीं की ओर बुरी नज़र से न देख सके।

लेखक नवनीत पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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