: चारो खाने चित हो गये टीवी वाले : सगाई से पहले साक्षी का पता तक नहीं लग सका :धोनी की शादी और मीडिया का उत्साही लाल बने रहना कई सारे कोणों से और कई दिनों तक लिखे जाने लायक मसाला है. क्या दिखाना चाहिए और क्या नहीं, कितना दिखाना चाहिए और कितना नहीं, कितना अतिरंजित था कवरेज? इस पर कई सुधीजनों ने लिखा भी, रवीश कुमार साहब ने भी उम्दा लिखा लेकिन एक कोण छूट रहा है जिस पर मैं ध्यान दिलाना चाहूंगी. यदि एक पल को दिल पर पत्थर रखकर ये मान भी लिया जाए कि चाहे बाज़ार के दबाव में ही सही लेकिन यही पत्रकारिता है, तो भी कई सवाल हैं करने लायक. ज़रा गौर करें, धोनी शादी कर रहे हैं ये खबर तब मीडिया में आई जब वे सगाई कर चुके थे और अगले दिन शादी थी. शादी का एक भी वीडियो किसी भी चैनल के पास नहीं था.
मैदान में जिस तरह की रणनीति बनाकर धोनी मैच जीतते हैं, कमोबेश वही रणनीति धोनी ने यहां भी बनाई और मीडिया को चारों खाने चित कर दिया. यदि स्मृति लोप के शिकार न हों तो थोड़ा सा पहले का याद करें, यही चैनल वाले धोनी का नाम कभी दीपिका पादुकोण के साथ कभी आसीन के साथ जोड़ते थे. बाकायदा दिल के आकार वाले ग्राफिक्स बनाकर दोनों के चहरे उनके अन्दर ठूंस के आधे आधे घंटे तक झेलाते थे. धोनी की साक्षी नाम की कोई दोस्त है ये चैनल वालों को सगाई के दिन पता चला. काहे की पत्रकारिता कर रहे हो भाई लोगो? जब पता चल ही गया है कि यही तमाशे की पत्रकारिता ही उम्र भर [ जब तक टीवी में काम करने की आयु है] करनी है, तो इसी दिशा में सोर्स डेवलप क्यों नहीं करते? किसी भी खेल पत्रकार को धोनी की निजी ज़िन्दगी के बारे में कोई मालूमात नहीं है. किसी ने भी सगाई से पहले कयास में भी ये नहीं बताया कि साक्षी का परिवार कौन है, धोनी से उनका कैसा परिचय है.
जब पॉलिटिकल बीट कवर करने वाला अपनी बीट के नेता के सामजिक, आर्थिक, राजनैतिक हर तरह के ताल्लुकों पर नज़र रखता है तो इन्हें खेल के बड़े नामों की इतनी न्यूनतम जानकारी क्यों है. इसका आशय ज़ाहिर है कि किसी भी खेल पत्रकार के सोर्स तगड़े हैं ही नहीं. हर बीट वाला अपनी बीट के लोगों से कुछ न कुछ पर्सनल ताल्लुक बना ही लेता है लेकिन खेल पत्रकार टीम इंडिया की घोषणा की ब्रेकिंग करने के अलावा क्या काम करते हैं. मेरी तो बिना मांगी सलाह है तमाम संपादकों को कि इन खेल पत्रकारों की क्लास लेना चाहिए. उन्हें अपने सामने क्राइम, पॉलिटिकल और स्पोर्ट बीट वालों को बैठाकर कुछ सवाल करना चाहिए. क्राइम वाला बता देगा कि कौन सा पुलिस अधिकारी कहाँ रहता है, उसके कौन कौन रिश्तेदार हैं, वो इस वक्त मुख्यालय में है या किसी ट्रेनिंग में विदेश गया है. पॉलिटिकल वाला ऐसे ही नेताओं के बारे में बता देगा, फिर ये स्पोर्ट वाले क्यूँ नहीं रखते मालूमात?
धोनी बुर्का पहन के तो शादी करने नहीं गए होंगे. उनके मूवमेंट पर इन खेल पत्रकारों की नज़र क्यों नहीं थी? इतने सारे खिलाड़ी देहरादून में जमा थे किसी को लाइन अप तक नहीं कर पाए. जब आप हमें घोड़ी वाले, टेंट वाले, बैंड वाले और शादी कराने वाले पंडित की बाइट दिखा कर झेला रहे थे तो थोड़ा सा किसी खिलाड़ी की बाइट सुनवा देते. हमारा भी जी थोड़ा हल्का हो जाता कि इसमें खबर जैसा कुछ है. चलो आपको निजी ज़िन्दगी के बारे में नहीं पता चल पाया तो शादी का एकाध वीडियो ही दिखा देते. सिर्फ स्टील फोटों से पूरा दिन पकाया. अब से सतर्क हो जाओ. युवराज से लेकर आर पी सिंह तक के घर के आसपास मुखबिर छोड़ दो. उनकी जितनी महिला मित्र हों उनके विसुअल्स बनवा के रख लो, उनके “दूर के करीबियों” मसलन चाय वाला, धोबी, नाई सभी के मोबाइल नम्बर लेकर अभी से रख लो, ताकि भविष्य में कोई शादी करे तो आप लोगों के पास कम से कम फ़ाइल फुटेज तो रहे. घर के शॉट रहें. धोबी, नाई का फ़ोनों ले सको. बाज़ार के मुताबिक़ खुद को अप डेट करो भाई लोगो वरना आप तो अपने चैनल को टीआरपी की दौड़ में पिटवा कर ही मानोगे.
लेखिका जान्हवी स्वतंत्र पत्रकार हैं.

