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गांधी को‍ निशाना बनाकर जोसेफ बेचना चाहते हैं किताब

विनय बिहारी सिंहएक लेखक हैं जोसेफ लेलीवेल्ड। इन्होंने एक पुस्तक लिखी है- महात्मा गांधी एंड हिज स्ट्रगल विद इंडिया। जोसेफ साहब पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं। गुजरात में इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मैंने यह पुस्तक पढ़ी नहीं है। लेकिन इस पुस्तक को लेकर जो बवेला मचा है, उसके आधार पर मैं यह टिप्पणी कर रहा हूं। कहा जा रहा है कि इस पुस्तक में कोई भ्रामक हवाला देकर महात्मा गांधी को समलैंगिक कहा गया है। अगर लेखक महोदय ने यह टिप्पणी की है तो यह घोर आपत्तिजनक है। सनसनी फैला कर बेस्ट सेलर का खिताब पाने का यह तिकड़म पहले भी लोग कर चुके हैं। किसी दिवंगत महान नेता के चरित्र पर अनर्गल बातें लिख कर बाजार में बेस्ट सेलर बनने की यह तथाकथित चालाकी कोई नई नहीं है।

विनय बिहारी सिंहएक लेखक हैं जोसेफ लेलीवेल्ड। इन्होंने एक पुस्तक लिखी है- महात्मा गांधी एंड हिज स्ट्रगल विद इंडिया। जोसेफ साहब पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं। गुजरात में इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मैंने यह पुस्तक पढ़ी नहीं है। लेकिन इस पुस्तक को लेकर जो बवेला मचा है, उसके आधार पर मैं यह टिप्पणी कर रहा हूं। कहा जा रहा है कि इस पुस्तक में कोई भ्रामक हवाला देकर महात्मा गांधी को समलैंगिक कहा गया है। अगर लेखक महोदय ने यह टिप्पणी की है तो यह घोर आपत्तिजनक है। सनसनी फैला कर बेस्ट सेलर का खिताब पाने का यह तिकड़म पहले भी लोग कर चुके हैं। किसी दिवंगत महान नेता के चरित्र पर अनर्गल बातें लिख कर बाजार में बेस्ट सेलर बनने की यह तथाकथित चालाकी कोई नई नहीं है।

सबसे पहली बात कि आजादी की लड़ाई के समय से ही महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा जाता रहा है। उनके प्रति मैं ही नहीं समूचा देश और दुनिया श्रद्धा करती है। इसकी वजहें हैं, यहां उनकी चर्चा करने पर यह लेख लंबा हो जाएगा। गांधी जी जैसा अहिंसा का पुजारी आज तक इस दुनिया में अब तक नहीं हुआ है। जो गांधी जी ऐशो आराम का जीवन छोड़ कर देश के लिए महात्मा बने, जिन्होंने तत्कालीन वायसराय से भी घुटने तक की धोती पहन कर ही मुलाकात की और जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है, उनके बारे में कुछ भी लिखने से पहले श्रीमान जोसेफ को सोचना चाहिए था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि हम कुछ भी लिख दें।

महात्मा गांधी के जीवन का कुछ भी अनछुआ पहलू ऐसा नहीं है जिसे सनसनीखेज कहा जाए। स्वयं गांधी जी ने अपने बारे में साफ- साफ लिख दिया है। वे सच्चे मायने में एक संत राजनेता थे। आजकल के राजनेताओं को उनसे सबक सीखना चाहिए (हालांकि जिस तरह भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं, उससे तो नहीं लगता कि वे गांधी जी से कोई सबक ले रहे हैं)। दूसरी बात यह कि जिस गांधी जी ने देश की आजादी के लिए अपना घर, परिवार, धन सब कुछ छोड़ दिया, उनके ऊपर एक भोगवादी लेखक टिप्पणी कर रहा है। मेरा मानना है कि जिस तरह किसी ऋषि के बारे में टिप्पणी करने के लिए कोई ऋषितुल्य व्यक्ति ही चुना जाना चाहिए (क्योंकि वह ऋषि के वेवलेंथ को पकड़ सकता है) ठीक उसी तरह महात्मा गांधी पर टिप्पणी करने के लिए उस स्तर के जीवन और आदर्श वाला व्यक्ति ही सक्षम हो सकता है। महात्मा गांधी का हफ्ते में एक दिन मौन व्रत, उपवास, एपेंडिक्स के आपरेशन के समय बेहोशी की दवा न लेना और निरंतर राम नाम का जाप…. इसे समझने के लिए जोसेफ को सदियां लग जाएगी। शायद तब न समझ पाएं। सिर्फ एक छोटी सी धोती पहन कर रहना क्योंकि देश के कई लोगों को कपड़ा नहीं मिलता, गांधी जी के त्याग और उनकी महानता को व्यक्त करने के लिए काफी है। वे चाहते तो फैशनेबल कपड़े पहन सकते थे। लेकिन नहीं- उन्हें पूरे देश की चिंता थी।

महात्मा गांधी को जानने का दावा करने वाले जोसेफ लेलीवेल्ड कम से कम अपने पुलित्जर पुरस्कार की गरिमा ही रखते। अब तो इस पुरस्कार पर भी संदेह हो रहा है। किस विकृत दिमाग वाले व्यक्ति को दे दिया गया है यह पुरस्कार। क्या उन्हें नहीं पता कि कितने करोड़ लोगों की भावनाओं को उन्होंने आहत किया है? पहले महात्मा गांधी को जानो, फिर कोई टिप्पणी करो। गांधी जी के संघर्ष, उनके सिद्धांत, विचार और काम हमेशा चमकते रहेंगे। सूरज की तरह कितना कीचड़ उछालोगे भाई। उछालो। इससे सूरज को क्या फर्क पड़ता है?

लेखक विनय बिहारी सिंह कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदी ब्लाग दिव्य प्रकाश के माडरेटर भी। उनसे संपर्क करने के लिए [email protected] का सहारा ले सकते हैं।

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