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चमत्‍कार : मर चुका व्‍यक्ति दो सौ रुपये में जिंदा

: बाड़मेर के डाक्‍टरों ने किया कमाल :  खबर बुरी हैं लेकिन चौकाने वाली। बाड़मेर कलक्टर गौरव गोयल 24 अप्रैल से बीमार चल रहे हैं,  वे 28 अप्रैल को स्वस्थ होकर कलक्टरी करने पहुंचेंगे। बाड़मेर के डॉक्टर ने कलक्टर को बकायदा ‘बेड रेस्ट’  की सलाह दी हैं। इसी तरह बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन भी वायरल बुखार से पीडि़त हैं। इसी तरह ‘भगवान’  माने जाने वाले एक डॉक्टर ने तो ऐसा करिश्मा कर दिखाया हैं कि वर्षों पहले स्वर्गलोक पहुंच चुके दो जनों को तो बीमार घोषित करते हुए जीवित कर दिखाया। उक्त खबरें कोई ‘अप्रैल फुल’  के मध्य नजर मूर्ख बनाने वाली नही हैं बल्कि दस्तावेजी हकीकत और प्रमाणों से जुड़ी तथ्यात्मक खबरें हैं। इन दस्तावेजों को जारी किया हैं बाड़मेर के राजकीय अस्पताल के डिग्रीधारी चिकित्सा अधिकारियों ने।

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: बाड़मेर के डाक्‍टरों ने किया कमाल :  खबर बुरी हैं लेकिन चौकाने वाली। बाड़मेर कलक्टर गौरव गोयल 24 अप्रैल से बीमार चल रहे हैं,  वे 28 अप्रैल को स्वस्थ होकर कलक्टरी करने पहुंचेंगे। बाड़मेर के डॉक्टर ने कलक्टर को बकायदा ‘बेड रेस्ट’  की सलाह दी हैं। इसी तरह बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन भी वायरल बुखार से पीडि़त हैं। इसी तरह ‘भगवान’  माने जाने वाले एक डॉक्टर ने तो ऐसा करिश्मा कर दिखाया हैं कि वर्षों पहले स्वर्गलोक पहुंच चुके दो जनों को तो बीमार घोषित करते हुए जीवित कर दिखाया। उक्त खबरें कोई ‘अप्रैल फुल’  के मध्य नजर मूर्ख बनाने वाली नही हैं बल्कि दस्तावेजी हकीकत और प्रमाणों से जुड़ी तथ्यात्मक खबरें हैं। इन दस्तावेजों को जारी किया हैं बाड़मेर के राजकीय अस्पताल के डिग्रीधारी चिकित्सा अधिकारियों ने।

जिसे एक बार तो कहीं कोई चुनौती भी नही दे सकता। अब हम आपको यह बता रहे हैं कि न तो कलक्टर वाकई बीमार हैं न एमएलए और न मृतक उठ कर जिन्दा हुए हैं। यह कारस्तानियां बाड़मेर मे पवित्र पेशे पर कालिख पोतने वाले कतिपय भ्रष्ट डॉक्टरों की हैं, जो चंद रुपयों के खातिर किसी मृत को जीवित और भले चंगे इंसान को बीमार बताने के सर्टिफिकेट आंखें मूंद कर दे रहे हैं। ऐसे ही घूसखोर, निकम्मे और चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे को कलंकित करने वाले डॉक्टरों को हमारे सवांददाता ने स्टिंग ऑपरेशन कर जाल मे फांसने मे कामयाबी हांसिल की हैं।

गौरव गोयल बीमार : बाड़मेर कलक्टर गौरव गोयल वल्द श्री रमेश गोयल को बाड़मेर अस्पताल के सरकारी डॉक्टर विश्‍नोई ने 24 अप्रैल 11 से बुखार एवं अन्य बीमारियों से पीडि़त मानते हुए 27 अप्रैल तक पूर्णतया विश्राम की सलाह दी हैं। सिर्फ डेढ़ सौ रुपये वसूल कर इस डॉक्टर ने स्टिंग ऑपरेशन करने वाली टीम को न केवल 25 अप्रैल के दिन 24 अप्रैल 2011 की तारीख लगा कर बीमार होने का प्रमाण पत्र दिया,  बल्कि गौरव गोयल को 28 अप्रैल के दिन ड्यूटी पर जाने के लिए फिट भी घोषित कर लिया। इस सर्टिफिकेट पर न तो गौरव गोयल के दस्तखत हैं न गौरव गोयल के नाम से इस डॉक्टर ने कोई पर्ची बना कर उसका इन्द्राज करवाया। 28 अप्रैल को फिट बताने का सर्टिफिकेट 25 अप्रैल को ही एडवांस दे दिया गया। उल्लेखनीय रहे कि 24 अप्रैल 2011 को तो बाड़मेर कलक्टर गौरव गोयल ने इसी सरकारी चिकित्सालय का लगातार 4 घंटे तक आकस्मिक निरीक्षण किया हैं।

दो मृतकों को बताया बीमार : राजकीय अस्पताल के दो अलग अलग डॉक्टरों ने तो मृतकों को जीवित बताते हुए बीमार घोषित करने का चमत्कार कर दिखाया। चिकित्सालय के डॉक्टर विश्‍नोई ने सिर्फ दो सौ रुपये वसूल कर मृतक लेखराज वल्द कर्मचंद खत्री को जीवित बताते हुए बीमार घोषित किया हैं। उनके द्वारा जारी सर्टिफिकेट के मुताबिक मृतक लेखराज को 24 अप्रैल को बीमार बताते हुए 28 अप्रैल को नौकरी पर जाने के लिए फिट हो जायेंगे। गौरतलब रहे कि लेखराज खत्री का देहवासन 2005 में हो चुका हैं। इसी तरह इसी राजकीय चिकित्सालय के डॉक्टर मेडिकलबांठिया ने मृतक हीरालाल धनराज वडेरा को भी 24 अप्रैल के दिन बीमार बताया हैं तथा 28 अप्रैल तक पूर्ण विश्राम की सलाह दी हैं। जबकि हीरालाल वडेरा पांच साल पहले भगवान को प्यारे हो चुके हैं।

विधायक मेवाराम जैन भी बीमार : इसी चिकित्सालय के डॉक्टर बांठिया ने विधायक मेवाराम वल्द चिंतामणदास जैन को भी बुखार व दूसरी बीमारियों से ग्रसित होना बताते हुए सिर्फ डेढ़ सौ रुपये में सर्टिफिकेट जारी कर दिया। डॉक्टर ने स्टिंग ऑपरेशन दिये दिए सर्टिफिकेट मे विधायक मेवाराम जैन को 29 अप्रैल तक बेड रेस्ट की सलाह दी हैं।

बिना दस्तखतों के दिए सर्टिफिकेट : अस्पताल के चिकित्सकों ने स्टिंग ऑपरेशन टीम को जो सिक एवं फिट सर्टिफिकेट बना कर दिए हैं,  उन पर न तो मरीजों के दस्तखत करवाये हैं न उन्हें हॉस्पीटल रिकॉर्ड मे दर्ज किया हैं। कायदे से ऐसे सर्टिफिकेट किसी भी मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण करने व उसके बाद उसे संबंधित बीमारी का उपचार लिखे जाने के बाद या फिर अस्पताल मे भर्ती किए जाने के बाद विश्राम की जरूरत होने पर पहले सिक सर्टिफिकेट दिया जा सकता हैं। उसकी तबीयत सही होने पर ही उसे फिट होने का सर्टिफिकेट दिये जाने का प्रावधान हैं। लेकिन यहां मरीज जो उनके सामने भी नहीं आये और आते भी कैसे, इसमें दो शख्स तो वर्षों पहले देवलोक पहुंच चुके हैं, उनके नाम से सर्टिफिकेट जारी कर दिए।

डॉक्टरों की घूसखोरी एवं लापरवाही के क्या हो सकते हैं घातक परिणाम : राजकीय चिकित्सालय के इन डॉक्टरों की घूसखोर नीति एवं लापरवाही का खामियाजा किसको किस हद तक भुगतना पड़ सकता हैं उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान सामने आई इन करतूतों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। डॉक्टर से मनचाही वर्तमान व पुरानी अवधि में बीमार होने एवं बेडरेस्ट की एडवाइज लिखी होने का मेडिकल सर्टिफिकेट लेने के बाद कोई भी अपराधी इस अवधि मे कितने ही बड़े हादसों, अपराधों को अंजाम दे सकता हैं। और वह अपने बचाव में यह सर्टिफिकेट पेश कर सकता हैं कि वह तो बीमार था? चूंकि, बाड़मेर सीमावर्ती क्षेत्र है जहां इन दिनों आपराधिक गतिविधियां भी चरम पर हो रही हैं,  ऐसे मे अपराधी तत्वों के लिए ये घूसखोर डॉक्टर बहुत ही मददगार साबित हो सकते हैं।

ऐसे मेडिकल सर्टिफिकेटों का इस्तेमाल अदालत को चकमा दिलाने मे भी कोई भी शख्स कर सकता हैं। डॉक्टर से मृतक को जिन्दा बताने का सर्टिफिकेट लेकर कोई भी अपराधी बड़े-बड़े आर्थिक घोटालों को बखूबी अंजाम दे सकता हैं। ऐसे में इन पर लगाम नहीं कसी गई तो इन घूसखोरों की खातिर घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। वैसे इन डॉक्टरों का कृत्य भारतीय चिकित्सा सेवा नियमों के तहत न केवल दण्डनीय हैं बल्कि अनैतिक प्रेक्टिस के चलते ऐसे डॉक्टरों की सनद हमेशा के लिए जब्त किए जाने के साथ इनके विरूद्व आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता हैं।

ऐसा रहा कलक्टर की फटकार का खौफ : ज्ञात रहे कि बाड़मेर कलक्टर गौरव गोयल जिला मुख्यालय के राजकीय चिकित्सालय की बदहाली की लगातार मिल रही शिकायतों के मध्यनजर रविवार को दल बल सहित यहां पहुंचे थे। करीब 4 घंटे पूरे अस्पताल का निरीक्षण कर अव्यवस्थाओं को देख न केवल पीएमओ को सुधार लाने की नसीहत दी बल्कि बुरी तरह लताड़ा तथा कईं निर्देश भी विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर दिए। कलक्टर ने इन अफसरों को कहा था कि तुम लोग सुधर जाओ वरना मैं सुधार लूंगा,  लेकिन कलक्टर की इस फटकार का खौफ इसी अस्पताल के डॉक्टरों में कैसा रहा, उसकी बानगी स्टिंग ऑपरेशन के नतीजों से देखने को मिल रही हैं। जो डेढ़ सौ रुपये की मामूली रकम पर न केवल खुद कलक्टर को बीमार घोषित करने का दुसाहस कर सकते हैं बल्कि दो सौ रुपये में स्वर्गलोक पहुंच चुकी आत्माओं को जीवित मानते हुए बीमार घोषित करने का करिश्मा भी दिखा सकते हैं। इन्ही डॉक्टरों ने कलक्टर से लताड़ मिलने के दूसरे ही दिन विधायक को भी बीमार बताने का सर्टिफिकेट आंखें मूंद कर दे दिया।

पीएमओ की नाक के नीचे चल रहा हैं गौरख धंधा : जब से बाड़मेर अस्पताल की कमान वर्तमान पीएमओ के पास पहुंची हैं तब से इस अस्पताल मे अराजकता, बदहाली एवं भ्रष्टाचार की जड़ें जमनी शुरू हुई हैं। खुद पीएमओ मैन पॉवर की कमी बता कर उच्चाधिकारियों को भ्रमित करने में खपे रहते हैं,  जबकि उनका असली धंधा निजी प्रेक्टिस है,  जहां उनके मकान के बाहर मासूम बच्चों की कतारें सुबह से शाम तक लगी रहती हैं। इन मरीजों से वसूली जाने वाली फीस का न तो वे आयकर महकमें को हिसाब देते हैं न बाहर चलने वाली बेनामी मेडिकल शॉप की इनकम जाहिर की जाती हैं। अस्पताल मे ड्यूटी की औपचारिकता पूरी करने के बाद वे सीधे ही मरीजों को लैब टेस्ट के बहाने रवाना कर घर आने को मजबूर करते हैं। उन पर कईं बार बेपरवाही के आरोप लग चुके हैं।

कर्मचारी जेल में डॉक्टर बता रहे हैं बाहर बीमार : चिकित्सालय के इन डॉक्टरों का भगवान ही मालिक हैं। हाल ही मे एक आपराधिक प्रकरण मे 8 अप्रैल को न्यायिक अभिरक्षा मे अदालत के आदेश पर जेल भेजे गये नगरपालिका कर्मचारी योगेश आचार्य वल्द पुरूषोतम आचार्य एवं सुरेन्द्र माथुर वल्द गहरीलाल माथुर के नाम भी बीमार होने का सर्टिफिकेट जारी कर दिया। नगरपालिका कर्मचारी योगेश आचार्य के नाम इस अस्पताल के एक डॉक्टर ने 13 अप्रैल से 18 अप्रैल तक बीमार 18 अप्रैल को फिट होने का सर्टीफिकेट दिया हैं। जबकि योगेश 8 अप्रैल से 21 अप्रैल तक जेल हिरासत में था।

इसी तरह अस्पताल के एक चिकित्सक ने सुरेन्द्र माथुर के नाम से 9 अप्रैल से 25 अप्रैल 2011 तक की अवधि का सिक एवं 25 अप्रैल 2011 को फिट होने का प्रमाण पत्र जारी किया हैं। सुरेन्द्र माथुर को जारी सिक सर्टिफिकेट पर तो चिकित्सक के दलाल बन कर घूमने वाले एक मेडिकल रिप्रजेन्टेटिव ने मरीज सुरेन्द्र माथुर के दस्तखतों की जगह अपने हाथ से फर्जी दस्तखत ठोंक दिए। इस सर्टिफिकेट को डॉक्टर ने नहीं बल्कि इसी मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव ने अपनी हैण्ड राइटिंग से भरा है,  जो डॉक्टर को भरना चाहिए था। यह सुरेन्द्र माथुर 9 अप्रैल से 21 अप्रेल तक जेल हिरासत मे रहा हैं। डॉक्टर ने यह सर्टिफिकेट स्टिंग ऑपरेशन टीम के सामने 25 अप्रैल को जारी किया है,  लेकिन उस पर बीमार होने की अवधि 9 अप्रैल से 25 अप्रैल की बताई हैं। इस तरह सुरेन्द्र माथुर को सिक एवं फिट दोनों सर्टिफिकेट एक ही दिन में 25 अप्रैल को 17 दिन की बीमार अवधि के जारी कर दिए।

(नोट- इस स्टिंग ऑपरेशन का उदेश्य चिकित्सालय मे तैनात घूसखोर डॉक्टरों की काली करतूतों व अनैतिक धंधों का पर्दाफाश कर आमजन व प्रशासन-सरकार को हकीकत से रूबरू करवाना हैं तथा ऑपरेशन दौरान नामी लोगों के नाम से इस खातिर सर्टिफिकेट जारी करवाये गये हैं कि आमजन के सामने यह तस्वीर सामने आये कि ऐसे घूसखोर एवं दुसाहसी डॉक्टर चंद रूपयों के खातिर प्रभावशाली लोगों के नाम से सर्टिफिकेट जारी करने में नहीं हिचकते। उम्मीद करते हैं कि व्यापक जनहित के मध्यनजर इस ऑपरेशन से लिखी गई न्यूज को कोई भी अन्यथा में नही लेंगे)

बाड़मेर से बंशी चौधरी की रिपोर्ट.

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