Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

साहित्य जगत

चर्चित गजलकार राजेंद्र राज की पुस्तक ‘तड़प कम तो नहीं’ का लोकापर्ण

लाला जगत ज्योति प्रसाद सम्मान से सम्मानित हुए आकाशवाणी के केंद्र निदेशक डॉ. किशोर सिन्हा और अरविंद कुमार श्रीवास्तव

मुंगेर । साहित्यिक पत्रिका नईधारा के संपादक डॉ शिवनारायण ने कहा है कि संवेदना, न्याय और चेतना पत्रकारिता व साहित्य की जरूरी शर्तें हैं. इन शर्तों को न सिर्फ पत्रकारिता व साहित्य के क्षेत्र में बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आत्मसात किया जाना चाहिए. तभी हम बेहतर समाज की परिकल्पना को साकार कर पायेंगे. वे मुंगेर सूचना भवन के सभागार में समकालीन साहित्य मंच के तत्वावधान आयोजित चर्चित पत्रकार स्व. लाला जगत ज्योति प्रसाद की पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे.

लाला जगत ज्योति प्रसाद सम्मान से सम्मानित हुए आकाशवाणी के केंद्र निदेशक डॉ. किशोर सिन्हा और अरविंद कुमार श्रीवास्तव

मुंगेर । साहित्यिक पत्रिका नईधारा के संपादक डॉ शिवनारायण ने कहा है कि संवेदना, न्याय और चेतना पत्रकारिता व साहित्य की जरूरी शर्तें हैं. इन शर्तों को न सिर्फ पत्रकारिता व साहित्य के क्षेत्र में बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आत्मसात किया जाना चाहिए. तभी हम बेहतर समाज की परिकल्पना को साकार कर पायेंगे. वे मुंगेर सूचना भवन के सभागार में समकालीन साहित्य मंच के तत्वावधान आयोजित चर्चित पत्रकार स्व. लाला जगत ज्योति प्रसाद की पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि मुंगेर से उनका रागात्मक रिस्ता रहा है. कई मायनों में मुंगेर मेरे आकर्षण का केंद्र रहा है. अनेक साहित्यिक व सांस्कृतिक आयोजन में उन्हें भाग लेने का अवसर हासिल हुआ है. लाला जगत ज्योति का व्यक्तित्व काफी सरल था और इसके साथ-साथ वे समस्याओं के प्रति काफी संवेदनशील थे. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता पहले मिशन हुआ करती थी. लेकिन अब वह दौर बदल गया है. कार्यकम की अध्यक्षता तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व निदेशक डॉ नृपेंद्र प्रसाद वर्मा ने की. अपने अध्यक्षीय उदगार में उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मकसद बेहतर के लिए जनमत तैयार करना है.

आज पत्रकारिता का जनपक्ष सवालों के घेरों में है. सवाल यह उठता है कि हम पत्रकारिता शोषित, उत्पीड़ित की आवाज बनकर कर रहे हैं या शोषक की आवाज बन रहे हैं. समारोह को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मुंगेर के विधायक विजय कुमार विजय ने कहा कि लाला जगत ज्योति प्रसाद सरकारी मुलाजिम के साथ-साथ एक सच्चे समाजसेवक और पत्रकार थे. बातों को वेवाक ढंग से कहने का हुनर जो उनमें था वह अपने ढंग का अनोखा था. उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि साहित्यिक आयोजनों के प्रति मुंगेर में लोगों की अभिरुचि कम होती जा रही है. जबकि फिल्मी गानों के कार्यक्रम में लोगों की भीड़ अधिक जुटती है. समारोह को संबोधित करते हुए मौलाना अब्दुल्ला बोखारी ने कहा कि लाला जगत ज्योति प्रसाद पत्रकार, सरकारी सेवक के साथ-साथ एक अच्छे इंसान थे. इंसानियत का बोध होना हर धर्म और मजहब का तकाजा है.

वहीं चर्चित समाजसेवी राजकुमार सरावगी ने कहा कि लाला जगत ज्योति प्रसाद की पत्रकारिता मूल्य आधारित थी. पत्रकारिता के व्यवसायीकरण के दौर में मूल्यों में काफी गिरावट आयी है. नई पीढ़ी को पत्रकारिता के बेहतर मापदंड स्थापित करनी चाहिए. वहीं पर्यावरण विज्ञान के प्राध्यापक प्रो. शब्बीर हसन ने कहा कि लगातार लाला जगत ज्योति प्रसाद की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किया जाना अपने आप में एक अद‍्भुत उदाहरण है. उन्होंने कहा कि अदब और सहाफत का आपस में एक रिश्ता है. सहाफत में सच के रूप में प्रस्तुत करते हैं. जबकि अदब में सच कल्पनाशीलता के आधार पर आधारित होता है. इस अवसर पर चर्चित गजलकार राजेंद्र राज की पुस्तक ” तड़प कम तो नहीं… ” का लोकार्पण भी किया गया.

वहीं इस वर्ष का लाला जगत ज्योति प्रसाद सम्मान आकाशवाणी के केंद्र निदेशक डॉ. किशोर सिन्हा  और अरविंद कुमार श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया. आरंभ में अनिरुद्ध सिन्हा और सुधांशु शेखर ने कार्यक्रम के मकसद से वाकिफ कराया. समारोह में  राणा गौरीशंकर, नरेश चंद्र राय, संतोष कुमार, सूचना जनसंपर्क के रामजी प्रसाद, नवीन टुडू, जेम्स जवाहर, मधुसूदन आत्मीय, तारकेश्वर प्रसाद यादव, यदुनंदन झा, सुधीर प्रोग्रामर मौजूद थे.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

मेरी भी सुनो

अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता...

राजनीति-सरकार

मोहनदास करमचंद गांधी यह नाम है उन हजार करोड़ भारतीयों में से एक जो अपने जीवन-यापन के लिए दूसरे लोगों की तरह शिक्षा प्राप्त...

साहित्य जगत

पूरी सभा स्‍तब्‍ध। मामला ही ऐसा था। शास्‍त्रार्थ के इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रश्‍नकर्ता के साथ ऐसा अपमानजनक व्‍यवहार...

मेरी भी सुनो

सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने घटिया खाने और असुविधाओं का मुद्दा तो उठाया ही, मीडिया की अकर्मण्यता पर भी निशाना...