: बाहुबली विधायक सुरेंद्र यादव और अनंत सिंह के बीच तनी रायफलें : गया के सम्बोधि रिसार्ट में हुई घटना : कहने को बिहार में सुशासन है। हथियारों की प्रदर्शनी नहीं दिखती। गुंडे बिल में दुबक गये हैं। यह प्रोपगंडा है मीडिया का और दावा है नीतीश का। लेकिन गुंडागर्दी अभी भी बदस्तूर जारी है सिर्फ़ गुंडों की जात और तरीका बदल गया है। लालू के समय में यादवों की चलती थी, नीतीश के शासन में वह जगह भूमिहारों ने हथिया ली है। यादव हथियारों का खुलेआम वीभत्स प्रदर्शन करते थे, अब हथियार सिर्फ़ डराने के लिये दिखाये जाते हैं। एक बाहुबली हैं, नाम है अनंत सिंह, मोकामा विधानसभा क्षेत्र से जीत कर आते हैं। भूमिहार जाति के लिये महान हैं। सभी जाति अपनी जात के गुंडे को महान मानती है ठीक वैसे ही।
पत्रकारों को कई बार पीट चुके हैं। एक बार एनडीटीवी के पत्रकार को पुलिस की उपस्थिति में बुरी तरह पीटा था। बिहार के राजनितिक सर्किल में छोटे सरकार के नाम से जाने जाते हैं। उनके आगे बडे़ सरकार यानी नीतीश भी नतमस्तक हो जाते हैं। कई तस्वीरों में निरीह नीतीश को हाथ जोडे़ देखा जा सकता है। हालांकि मेरी नजर में अनंत सिंह महाकायर हैं क्योंकि जिसे खुद की हिफ़ाजत के लिये रायफ़लों का सहारा लेना पडे़ वह कायर ही होता है, नैतिक बल से विहीन, अंदर डरा हुआ, मौत से भयभीत। खैर अब आता हूं उस घटना पर। बिहार की मशहूर भोजपुरी गायिका हैं देवी। उनके पिता प्रमोद कुमार राजेन्द्र कालेज, छपरा में प्रोफ़ेसर हैं। घटना 18 फ़रवरी की है। एक धनपशु ठेकेदार हैं महेन्द्र यादव। कभी थर्ड ग्रेड कर्मचारी हुआ करते थे आज अरबपति हैं। बहुत बार जांच हुई लेकिन सोने के जूते ने जांच करने वाले अधिकारियों को कुकडू-कूं करवा दिया। उसी महेन्द्र यादव के बेटे का रिसेप्शन था, बोधगया स्थित बिहार के सबसे अच्छे और मशहूर रिसार्ट सम्बोधि में।
चूंकि एक धनपशु के लिये अनाप-शनाप तरीके से सैकड़ों पाप करके कमाई हुई दौलत को प्रदर्शित करने का इससे सुनहरा अवसर क्या हो सकता था। इसलिये वहां राजद के बाहुबली विधायक सुरेन्द्र यादव, मोकामा के विधायक छोटे सरकार अनंत सिंह, छपरा विश्वविद्यलाय के कुलपति दिनेश यादव सहित गया के स्वनामधन्य तथाकथित सारे वीआईपी थे। सिर्फ़ समाज के शरीफ़ लोगों को छोड़कर। बाहर से तकरीबन 30-40 वेश्या या यो कहें कालगर्ल बुलाई गई थीं। वीआईपी अथितियों को सुख प्रदान करने के लिये। रात को दो बजे तक पार्टी और रासलीला चली। नियमत: दस बजे रात के बात महिलाओं को नहीं नचाया जा सकता है और इसके लिये भी सक्षम पदाधिकारी से अनुमति की आवश्यकता होती है। जिले के बहुत सारे आला अधिकारी भी आनंद उठाने के लिये वहां मौजूद थे, अपनी-अपनी बीबी और बच्चों से छुपकर। शराब पानी की तरह बहाई जा रही थी। अचानक कुलपति महोदय दिनेश यादव जी की इच्छा हुई भोजपुरी गायिका देवी को चूमने की और उन्होंने स्टेज पर चढ़कर देवी के गाल को सहलाया। चूंकि देवी अनंत सिंह के माध्यम से आई थीं, इसलिये बीच-बचाव करके मामला शांत कराया गया।
परन्तु वह शराब ही क्या जो दिल की हसरत को उभार न दे, थोड़ी देर बाद कुलपति महोदय फ़िर जोश में आ गये और एक चुंबन देवी की गाल पर जड़ दिया और यहीं से बात बढ़ गई। अनंत सिंह की तरफ़ से रायफ़लें तन गईं। नौबत यहां तक आई कि सुरेन्द्र यादव और अनंत सिंह के बीच गोली चलने की स्थिति पैदा हो गई। मौके की नाजुकता को देखते हुये मामला शांत कराने का प्रयास शुरू हुआ। तब तक देवी ने दे दनादन ताबड़तोड़ दसियों थप्पड जड़ दिये कुलपति महोदय को। सुरेन्द्र यादव के एक खास चम्मचे संजू श्रीवास्तव की भी अच्छी खासी पिटाई हुई। सुरेन्द्र यादव ने भी अपने मित्र अनंत सिंह को खुश रखने और उनका गुस्सा शांत करने के लिये अपने बाडीगार्डों से अपने ही आदमियों को पिटवाया। वाह रे राजनिति। एक पिद्दी जैसा अपराधी अनंत सिंह सबकी मां-बहन करता रहा और गया के सारे सूरमा नपुंसक की तरह गाली सुनते रहे। दूसरे दिन देवी ने एक मुकदमा भी कुलपति महोदय के खिलाफ़ किया। इस सारे घटनाक्रम का सबसे मजेदार या यो कहें शर्मनाक पहलू यह रहा कि जिला प्रशासन की नजरों के सामने सबकुछ हुआ।
उससे भी दुखद बात यह है कि महामहिम राज्यपाल देवानंद कुवंर ने पैसे लेकर सभी विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्त किये और जब अयोग्य अक्षम लोग शीर्ष पदों पर आयेंगे तो यही होगा। शेर की खाल पहनकर भेडि़या शेर नहीं हो सकता। पहले भी बूटा सिंह जब राज्यपाल थे तो बिहार का राजभवन बंटी बबली की जागीर हो गई थी। कांग्रेस के सभी नेता जानते हैं, देवनंद कुवंर ने राज्यभवन को खरीद फ़रोख्त का अड्डा बना दिया है, जिन्हें जेल में होना चाहिये वे कुलपति हैं। गया का मगध विश्वविद्यालय भी इसी तरह के भ्रष्टाचार का एक उदाहरण है। नीतीश कुमार से भी महामहिम की खूब छनती है। चोर-चोर मौसेरे भाई। इस पूरे प्रकरण ने एक और प्रश्नचिंह खड़ा किया है। देवी को अनंत जैसों के साथ आने की क्या जरुरत थी? क्या उनको नहीं मालूम इस तरह की शादियों में क्या होता है ? जहां खुलेआम वेश्यायें शराब परोस रही थी वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और गाना गाने का औचित्य क्या था?
लेखक मदन कुमार तिवारी बिहार के गया जिले के निवासी हैं. पेशे से अधिवक्ता हैं. 1997 से वे वकालत कर रहे हैं. अखबारों में लिखते रहते हैं. ब्लागिंग का शौक है. अपने आसपास के परिवेश पर संवेदनशील और सतर्क निगाह रखने वाले मदन अक्सर मीडिया और समाज से जुड़े घटनाओं-विषयों पर बेबाक टिप्पणी करते रहते हैं.

