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छौलीवुड, सलमान और गुटबाजी

छत्तीसगढ़ राज्य के बने 10 साल हो चुके है. पूरा राज्य जश्न मना रहा है. या यूँ कहे की सरकार जनता से जश्न मनवा रही है. इतने विकल्प दे दिए हैं जश्न मानाने के कि जनता चाह कर भी खुश होने से खुद को रोक नहीं पा रही है. साइंस कॉलेज मैदान पर विशाल मंडप लगे है. सभी विभाग के स्टाल लगे है. आकर्षक साज सज्जा और धूमधाम के सात उत्सवी माहौल है. राजधानी के लोग तो यूँ ही मग्न हो गए है. बाकी प्रदेश भर के लोगों को सिनेमाघरों में मुफ्त में 6 दिनों तक फिल्में दिखाई जा रही है. अब तक की हिट छत्‍तीसगढ़ी फिल्में. हर शाम मैदान पर महफ़िल सज रही है. शुरुआत तो सलमान खान से ही हुई. ये अलग बात है कि जिस सलमान को लेकर जनता पागल हुई जा रही थी.. वे महज चंद मिनट के मेहमान बनकर आये. और आये क्या, बस लोगों पर अहसान कर के चले गए. करीब 50 हजार लोग उमड़े थे उनका जलवा देखने के लिए, पर मियां एकाध डॉयलाग सुना कर ऐसे निकल गए कि लोग को भनक तक नहीं लगी.

छत्तीसगढ़ राज्य के बने 10 साल हो चुके है. पूरा राज्य जश्न मना रहा है. या यूँ कहे की सरकार जनता से जश्न मनवा रही है. इतने विकल्प दे दिए हैं जश्न मानाने के कि जनता चाह कर भी खुश होने से खुद को रोक नहीं पा रही है. साइंस कॉलेज मैदान पर विशाल मंडप लगे है. सभी विभाग के स्टाल लगे है. आकर्षक साज सज्जा और धूमधाम के सात उत्सवी माहौल है. राजधानी के लोग तो यूँ ही मग्न हो गए है. बाकी प्रदेश भर के लोगों को सिनेमाघरों में मुफ्त में 6 दिनों तक फिल्में दिखाई जा रही है. अब तक की हिट छत्‍तीसगढ़ी फिल्में. हर शाम मैदान पर महफ़िल सज रही है. शुरुआत तो सलमान खान से ही हुई. ये अलग बात है कि जिस सलमान को लेकर जनता पागल हुई जा रही थी.. वे महज चंद मिनट के मेहमान बनकर आये. और आये क्या, बस लोगों पर अहसान कर के चले गए. करीब 50 हजार लोग उमड़े थे उनका जलवा देखने के लिए, पर मियां एकाध डॉयलाग सुना कर ऐसे निकल गए कि लोग को भनक तक नहीं लगी.

खैर, उस दिन जो चाहने वालों का दिल टूटा, वैसा तो ऐश्वर्य से ब्रेक अप के समय सलमान का भी नहीं टूटा होगा. लोगों के सदा लगी तो कैटरीना से ब्रेक अप में जरुर टूट सकता है… अजी ये तो मैं बस मजाक में कह दिया. वैसे बहुत से लोग जानते थे कि उनकी आँखों के नीचे ऑपरेशन हुआ है. सो डॉक्टर साहब ने उन्हें डांस करने से मन किया हुआ था. पर लोग को लग रहा था, धमाल न सही.. कमाल तो दिख ही जायेगा. वैसे एफआईआर की चंद्रमुखी चौटाला अपनी एंकरिंग से और श्वेता पंडि़त और सयाली भगत अपने जलवों से लोगों के जख्म पर मरहम लगाने की कोशिश करती रही. पर जनता तो पहले प्यार के टूटने का गम झेल रही थी. वो भी ताजा ताजा. सो उनका जादू भी बहुत नहीं चला.

खैर, ये तो था बॉलीवुड के स्टार का जलवा. जो लोग सलमान के दीवाने हुए जा रहे थे.. वे ही अपने राज्य के फिल्म कलाकार के साथ ऐसी बेरुखी करेंगे, ये बात भी कम सालने वाली नहीं रही. हुआ यूं कि इस बार संस्कृति विभाग यहाँ के फिल्म वालों पर भी मेहरबान हुई. राज्योत्सव के तीसरे दिन छत्तीसगढ़ फिल्म स्टार रात करने को कहा गया. फिल्म इंडस्ट्री के सभी लोगों को मंच से प्रस्तुति देने को कहा गया. पर क्या करें कलाकारों के गुरुर को. एक तो पहली बार अपने ही राज्य में एक बड़े मंच से परफार्म करने का मौका मिला था.. लेकिन सभी ऐसे लड़े कि अगली बार से विभाग उन्हें मौका देने से पहले 100 बार सोचेगा. प्रोग्राम कैंसल होते होते हुआ, लेकिन ऐसे हुआ कि कोई दोबारा देखने से भी तौबा कर ले. मंच से छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्‍ट्री के विकास की प्रस्तुति देनी थी.  शुरुआत हुई कहे देबे सन्देश के गानों से. कार्यक्रम आगे बढ़ा घर द्वार के गाने से. और सीधे पहुंचा मोर छैया भुइंहा से. और वहीं पर जाकर खत्म भी हो गया.

फिल्म इंडस्ट्री के नाम पर अनुज शर्मा, नए निर्माता निर्देशक मनोज वर्मा, क्षमा निधि मिश्रा सहित कुछ और नाम मौजूद थे. इंडस्ट्री के मनमोहन ठाकुर, ताहिर खान, मोना से, अलका चंद्राकर, ममता चंद्राकर, प्रेम चंद्राकर, सुनील सोनी, दुकालू यादव जैसे दिग्गज का कोई पता नही था. खामा निधि मिश्र जी जब गाना गा रहे थे, तो वीआईपी लॉबी में बैठे लोग हूटिंग करने लगे थे. अनुज हर गाने और डांस में मौजूद थे. जैसे वहीं एकलौते गायक, एक्टर और डांसर हो. बेहतर होता कि इसे संस्कृति विभाग इसे अनुज नाइट कर देता. बजाय छत्तीसगढ़ फिल्म स्टार नाइट के. सतीश जैन, जो इस इंडस्ट्री के आधार स्तंभ कहे जा सकते है, वो मंच पर नहीं आये. अंत में बहुत अनुरोध के बाद आये और दो लाइन में विभाग को धन्यवाद कह कर चले गए. प्रेम चंद्राकर, जिन्होंने कई हिट  फिल्म बनायीं और निर्देशित किया, वो तो वहां थे ही नहीं. ममता चंद्राकर, जिन्हें छत्तीसगढ़ की स्वर कोकिला कहा जाता है, वो भी गायब थी. अलका चंद्राकर, सीमा कौशिक, योगेश अग्रवाल, सुनील सोनी, कोई नहीं था. आखिर ये तो वैसे ही हुआ कि संजय लीला भंसाली, लता जी, महेश, यश, रामू, शाहरुख, सलमान, अजय, अक्षय, प्रीतम, शान, केके, श्रेया, रोहित, नाना, संजू बाबा, प्रकाश झा, जैसे दिग्ग्ज्जो के बिना बॉलीवुड नाइट. और यह सब हुआ कलाकारों की गुटबाजी की वजह से.

कई लोग इस वजह से नाराज हुए कि अनुज को प्रोग्राम का को-ऑर्डिनेटर बनाया गया. जबकि उससे सीनियर लोग को नजर अंदाज कर कर दिया गया. कई लोगों को अनुज के इगो से चिढ थी. कई लोग उसके बड़ बोलेपन को नापसंद करते थे. और कई तो उसके तिकड़मी आदत से नाराज थे. और जो लोग नाराज थे, वो नहीं आये. जो आये वो इसलिए कि कहीं इंडस्ट्री की नाक पूरी तरह से कट ना जाये. जो इंडस्ट्री अभी खड़ी हो रही हो, उसे ऐसी गुटबाजी हो तो नतीजा भी सामने ही होता है. सलमान को देखने यहाँ के लोग पागल हो रहे थे. इन्हें देखने वाले भी गिनती के थे. जो थे, वो भी हूटिंग कर रहे थे. काश ये बातें फिल्म इंडस्ट्री के सारे लोग समझते तो वो भी लोगो के दिलों पर राज कर पाते.

लेखक राजेश राज साधना न्‍यूज से जुड़े हुए हैं.

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