बैतूल। इसे संयोग ही कहे कि मां सूर्यपुत्री ताप्ती की महिमा से मध्यप्रदेश की सरकार भले ही अनजान हो लेकिन आंध्रप्रदेश के दो प्रमुख शहरों विजयवाडा एवं गुंटूर से 17 तीर्थयात्रियों का जत्था पुष्कर तीर्थ योग मे सूर्यपुत्री मां ताप्ती में स्नान करने के लिए ताप्ती जन्मस्थली मुलतापी मुलताई आया। तीर्थयात्री बाबूराव, रविशंकर, रामू, पी नागेश्वरराव, जी रंगाराव ने बैतूल जिले में स्थित मुलतापी नामक सूर्यपुत्री मां ताप्ती की जन्मस्थली के सरोवर में स्नान करने के बाद तर्पण, पिंडदान सहित वैदिक मंत्रोचार के साथ मां ताप्ती का पूजन किया। आंध्रप्रदेश में सूर्यपुत्री मां ताप्ती को प्रणिती नदी के नाम से जाना जाता है। वैदिक संस्कृति के अनुसार प्रत्येक वर्ष में एक नदी का 12 दिन का पुष्कर योग होता है। इस शुभ घड़ी पर त्रिलोक के रचयिता भगवान ब्रम्हा, विष्णु, महेश तीनों के साथ तैतीस कोटि के भगवान पुण्य सलिला मां ताप्ती में आकर स्नान – ध्यान करते हैं। पुष्कर योग में भी जिस नदी का योग होता है, उसी में स्नान करने से पुण्य लाभ मिलता है।
तीर्थराज पुष्कर के समान पुण्य लाभ देने वाली मां आदि गंगा ताप्ती में स्नान करने के बाद पूरे सातों कुण्डो का दर्शन लाभ लेने के बाद सभी तीर्थयात्री आस्था एवं पवित्र नगरी मुलतापी मुलताई में विभिन्न मंदिरो एवं शिवालयों में भी दर्शन के लिए गये। बाबूराव के अनुसार यूं तो आंध्र प्रदेश के तिरूपति बालाजी के दर्शन करने के लिए लाखों लोग प्रतिदिन माह आते हैं, लेकिन बिरले ही लोग इस पुण्य सलिला में स्नान – पूजन – ध्यान करके वह पुण्य प्राप्त करते हैं, जो कि बालाजी भगवान के मंदिर में कई बार जाने से प्राप्त होता है। मां ताप्ती जागृति मंच ने ताप्ती महिमा के जन – जन तक पहुंचने के प्रयास में इन तीर्थयात्रियों की भागीदारी को अहम बताया है। मंच ने प्रदेश की सरकार से निवेदन किया है कि वे आंध्र प्रदेश से आये तीर्थयात्रियो से कुछ सीखें और अपनी भूल को सुधार कर ताप्ती महिमा को जन – जन तक पहुंचाने में सारथी बने।
बैतूल से रामकिशोर पंवार की रिपोर्ट.

