मनोज कुमार और जीनत अमान पर यह गाना एक पुरानी सफल फिल्म रोटी, कपडा और मकान में फिल्माया गया था. क्या इस समय यह गाना कहीं और फिल्माया जा रहा है? दरअसल कुछ इतनी ज्यादा समानताएं दिखने लगीं कि स्वतः ही उस मूल गाने के बोल बदलते गए. ऐसा महसूस होने लगा जैसे संतोष आनंद ने यह गाना परवर्ती इतिहास को ही दृष्टिगत रखते हुए लिखा था. इसी गाने की पैरोडी को नीचे लिखने की कोशिश की गई है.
मैं ना छोडूंगा,
मैं ना छोडूंगी,
इस कुर्सी को
इस गद्दी को
इन फायदों को
मैं ना छोडूंगा.
मैं ना छोडूंगा,
मैं ना छोडूंगी
चलों पार्टी भूलें,
गद्दी पर झूलें,
पैसे सब ले लें,
ताकत में डूबें,
आ तुझे मैं पद देता हूँ,
तू सब मंत्री बन जा,
पद से नेता का रिश्ता,
मैं ना भूलूँगा
मैं ना छोडूंगा,
मैं ना छोडूंगी
समय की धारा में
हल्ला रुक जाना है
जो घडी यहाँ रह लें
वही बस रह जानी है
मैं बन जाऊं मुख्यमंत्री
तू समर्थक बन जा
नेता से पद का रिश्ता
मैं ना भूलूँगा
मैं ना छोडूंगा
मैं ना छोडूंगी
बरसता पैसा हो
महकता टेंडर हो
कभी मैं मंत्री होऊं,
कभी तुम मंत्री हो,
गगन बन कर झूमे,
पवन बन कर झूमें,
चालों राहें मोड़े,
अभी ना संग छोड़ें,
कहीं पर छुप जाना है,
नज़र नहीं आना है,
यहीं पर बस जायेंगे,
यहीं दिन कट जायेंगे,
अरे क्या बात बनी,
वो देखो रात ढली,
ये बातें चलती रहेंगी,
ये रातें ढलती रहेंगी,
मैं मुख्यमंत्री बना रहूँ
तू समर्थक बन जा
समर्थक से पद का रिश्ता
मैं ना भूलूँगा
मैं ना छोडूंगा
मैं ना छोडूंगी
लेखक अमिताभ ठाकुर आईपीएस अफसर हैं. यूपी के कई जिलों में पुलिस अधीक्षक रहे. दो वर्ष तक अवकाश लेकर एमबीए किया. इन दिनों मेरठ में आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा के प्रमुख के बतौर पदस्थ हैं. कई अखबारों, मैग्जीनों और पोर्टलों में विभिन्न विषयों पर लेखन.

