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देश भक्ति का ऐसा मजाक मैंने कहीं नहीं देखा

अन्ना के समर्थन के समर्थन में पूरे देश में रैली, प्रदर्शन, कैंडिल मार्च, पीस मार्च आदि निकाले जा रहे हैं,  सभी चाहते हैं कि देश से भ्रष्टाचार खत्म हो और आम आदमी को राहत मिले, लेकिन कुछ आवारा युवकों ने अन्ना हजारे की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को मजाक बनाकर रख दिया है.  ऐसे युवकों के लिए अन्ना हजारे द्वारा किए जा रहा अनशन महज एक मस्ती का जरिया बन गया है। सड़कों पर तेज गति में अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं, मोटर साइकिलों पर हाथ में तिरंगा लिए निकलना उनके लिए आंनद का जरिया बन गया है। इतना ही ऐसे युवक-युवतियों के मोबाइलों में भी मैसेज ही ऐसे ही मिलते हैं.

अन्ना के समर्थन के समर्थन में पूरे देश में रैली, प्रदर्शन, कैंडिल मार्च, पीस मार्च आदि निकाले जा रहे हैं,  सभी चाहते हैं कि देश से भ्रष्टाचार खत्म हो और आम आदमी को राहत मिले, लेकिन कुछ आवारा युवकों ने अन्ना हजारे की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को मजाक बनाकर रख दिया है.  ऐसे युवकों के लिए अन्ना हजारे द्वारा किए जा रहा अनशन महज एक मस्ती का जरिया बन गया है। सड़कों पर तेज गति में अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं, मोटर साइकिलों पर हाथ में तिरंगा लिए निकलना उनके लिए आंनद का जरिया बन गया है। इतना ही ऐसे युवक-युवतियों के मोबाइलों में भी मैसेज ही ऐसे ही मिलते हैं.

बीते दिन मेरे मोबाइल पर भी एक ऐसा ही मैसेज आया जिस में कुछ यूं लिखा था – कि अन्ना को सपोर्ट करो भ्रष्टाचार को भगाओ, काला धन देश में वापस लाओ, यदि काला धन इंडिया आ गया तो बीयर 15 रुपये, वोदका 20 रुपये, सोडा 5 रुपये, ª  विस्की 20 रुपये हो जायेगा। अब इस मैसेज को पढ़ कर क्या मैसेज मिलने वाला है यह तो आपको पता चल ही गया होगा। क्या ये आजादी की लड़ाई लड़ने वाले अन्ना हजारे और ऐसे ही जाने कितने देश भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है?  ऐसा ही एक नजारा महानगर के मुख्य स्थान सेंटर प्‍वाइंट पर देखने को मिला.  मैं अपने अखबार की तरफ से अन्ना के लिए चलाए जा रहे आंदोलन की कवरेज करने के लिए गया हुआ था.

वहां एक दुकान पर खड़े होकर मैं अन्ना हजारे के समर्थन में महिलाओं द्वारा निकाली जा रही कैंडिल मार्च का इंतजार करने लगा तभी मेरे पास एक लड़का अपनी बाइक पर आया और बाइक रोककर वहीं फोन पर बात करने लगा चूंकि वह मेरे बहुत निकट था सो मुझे उसकी आवाज सुनायी दे रही थी. वह कुछ इस तरह से बात कर रहा था कि हाय जान तुम आ नहीं रही हो? अन्ना हजारे की कैंडिल मार्च में.. ओह कमऑन यार पापा को बोलो की अन्ना की कैंडिल मार्च मैं जा रहीं हूं… प्लीज आ जाना मैं इंतजार कर रहा हूं.  उस लड़के ने इतनी बात कर फोन काट दिया और साइड में ख़डे होकर इंतजार करने लगा.

ऐसा ही एक वाक्या हुआ जहाँ मैं ने एक बार फिर देश भक्ति का मजाक उड़ते देखा.  जिस दिन अन्ना हजारे तिहाड़ जेल से बाहर आये थे,  उस दिन मैं लोगों के उत्साह और खुशी पर जगह जगह हो रहे कार्यक्रमों की कवरेज कर रहा था.  एक जगह है अलीगढ़ में मैरिस रोड.  वहाँ एक रेस्टोरेंट के बाहर कुछ लड़के बातें कर रहे थे यार आज तो अन्ना बाहर आ गया पार्टी होनी चाहिए, आज तो राहुल पार्टी देगा… चल बेटा बीयर पिला.. तुझे बहुत अन्ना बनने का शौक है. ये सिर्फ इतना ही नहीं हर जगह मैं यही देखता हूं,  जिसे देखकर कर बहुत दुख होता है कि क्या शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, गांधीजी,  राजगुरु आदि कई शहीदों ने इसी भारत के लिए बलिदान दिया था,  जहाँ युवाओं के लिए आजादी के मायने महज मस्ती, शोर शराबा, अय्याशी, भोग विलास मात्र हैं!

लेखक संदीप गुप्‍ता पत्रकार हैं तथा अलीगढ़ में पंजाब केसरी से जुड़े हुए हैं.

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