समाचार पत्रों में युवा पत्रकारों को प्राथमिकता देते हुए वरिष्ठ पत्रकारों के साथ धोखाधडी का खेल खेला जा रहा है। जो पत्रकार अपना सम्पूर्ण जीवन पत्रकारिता में बिता देता है और जब वह 50 वर्ष के आंकड़े को पार करता है तो उसको एक युवा पत्रकार के आगे प्राथमिकता नहीं दी जाती। कारण साफ है कि वरिष्ठ पत्रकार के पास अनुभव होता है जिसके बलबूते पर वह अधिक सैलरी का हकदार होता है, लेकिन एक युवा पत्रकार जिसका कैरियर बहुत कुछ सीखने की ओर होता है, वह वरिष्ठ पत्रकारों की अपेक्षा काफी कम सेलरी पर काम करने को तैयार हो जाता है। कोटा शहर का दैनिक नवज्योति संस्थान एक ऐसा ही संस्थान है, जहां पर वरिष्ठ पत्रकारों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। उनके अनुभव का ख्याल नहीं किया जा रहा है। नए और कम वेतन वाले पत्रकारों के आगे पुरानों को महत्व नहीं दिया जा रहा है।
हाल ही मे कोटा शहर के जाने माने पत्रकार सुनील माथुर को, जिनके आगे अच्छे-अच्छे पत्रकार फेल हो जाते हैं, संस्था में आए दो नवोदित पत्रकार संजय स्वदेश और शैलेन्द्र दीक्षित के आगे उनकी वरिष्ठता का ख्याल न करते हुए उन्हें संस्था से निकाले जाने का प्रोग्राम बना लिया गया। नए चेहरों के आगे वरिष्ठों की एक न चलने दी गई और ये ऐसे नए चेहरे हैं जिसमें से संजय नाम के पत्रकार ने आज तक फील्ड रिपोर्टिंग की ही नहीं। वह पेज मेकिंग आदि का काम किया करता था और समाचार पत्र का संपादक बन बैठा। दूसरा पत्रकार शैलेन्द्र दीक्षित कानपुर जैसे छोटे शहर में एक साप्ताहिक समाचार पत्र चलाकर दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उतरा और दलाली से अपना पेट चला रहा था। ऐसे नए और गंदे चेहरों के आगे मीडिया संस्थान वरिष्ठ पत्रकारों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है.
लेखक संतोष सिंह कोटा में स्वतंत्र पत्रकार हैं.

