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दो बहनों की कथा तो शुरुआत है, अभी तो और बिखरना है

: मत भूले सामाजिक जिम्मेदारी : नोएडा में रहने वाली दो बहनें जिस में से एक की मौत सुनकर रूह कांप उठी। दिल दहला देने वाली इस घटना से सारे समाज को सबक लेनी चाहिए। आज अगर अनुराधा और सोनाली के पड़ोसी ध्यान देते तो इतनी बड़ी घटना नहीं घटती। यह तो सिर्फ अभी शुरुआत हैं। क्योंकि आने वाले समय में यही होने वाला हैं कि समय अभाव के कारण आस- पड़ोस से मिलना- जुलना कम हो पाता हैं। यहां तक कि पड़ोस में कौन रह रहा है यह भी नहीं पता होता हैं। हमें इससे कोई मतलब नही हैं कि किसके यहां कौन जा रहा हैं या कौन आ रहा हैं। इससे लोगों कोई लेना-देना नहीं है यही कारण हैं कि इतने दिनों से दोनों बहन बंद थी! मगर किसी ने यह जिम्मेदारी नहीं समझी कि अन्दर कौन हैं उसकी क्या जरूरत हैं।

: मत भूले सामाजिक जिम्मेदारी : नोएडा में रहने वाली दो बहनें जिस में से एक की मौत सुनकर रूह कांप उठी। दिल दहला देने वाली इस घटना से सारे समाज को सबक लेनी चाहिए। आज अगर अनुराधा और सोनाली के पड़ोसी ध्यान देते तो इतनी बड़ी घटना नहीं घटती। यह तो सिर्फ अभी शुरुआत हैं। क्योंकि आने वाले समय में यही होने वाला हैं कि समय अभाव के कारण आस- पड़ोस से मिलना- जुलना कम हो पाता हैं। यहां तक कि पड़ोस में कौन रह रहा है यह भी नहीं पता होता हैं। हमें इससे कोई मतलब नही हैं कि किसके यहां कौन जा रहा हैं या कौन आ रहा हैं। इससे लोगों कोई लेना-देना नहीं है यही कारण हैं कि इतने दिनों से दोनों बहन बंद थी! मगर किसी ने यह जिम्मेदारी नहीं समझी कि अन्दर कौन हैं उसकी क्या जरूरत हैं।

क्या हो गया है लोगों को! क्या समाज के प्रति हमारा कोई दायित्व नहीं बनता हैं! क्या हममें और जानवरों में कोई फर्क नहीं हैं। सिर्फ एक घटना हैं आने वाले समय में ऐसी कई घटनाएं देखने को मिलेंगी क्योंकि आजकल एकाकी परिवार और लोगों को यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता कि उनके निजी मामले में कोई पड़ोसी दखलअंदाजी करे। भाग-दौड़ की इस जिंदगी में किसी के पास टाईम नहीं होगा कि अपने पड़ोसी का हाल-चाल पूछ सके। आजकल तो आप किसी युवा पीढ़ी से पूछे कि कहां जा रहे हो तो कहेंगे कि यह मेरा निजी मामला हैं और अगर किसी पड़ोसी के घर आप सुबह-शाम किसी टाईम चले गए तो कहेंगे टाईम नहीं है ऑफिस जाना है, थोड़ा जल्दी में हैं कहिए कोई काम है क्या!  इसी तरीके से हमारा समाज बिखरता जा रहा हैं! हम एक दूसरे के काम नहीं आ रहे हैं, जब आज का बचपन ही एकाकी व बिखरा सा हैं तो बडे़ होने पर वही युवा मिलनसार कैसे हो सकते हैं?

लेखिका सुचित्रा शरण स्‍वतंत्र पत्रकार हैं.

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