पत्रकारिता
सेवा है, संस्कार है, समाधि है,
वतन की महकती,
सोंधी सी माटी है,
मुन्ने के दूध की कटोरी है,
नानी की लोरी है,
सांझ में नुक्कड़ पर,
तैरती हँसी है, ठिठोली है।
सजनी की पाती है,
दीया और बाती है,
धूप है छांव है,
मुसहरों का गांव है,
सतुए की पोटली,
गोएठे का ताव है।
जुगनु की टिमटिम है,
बारिश की रिमझिम है,
हीरा का मोती है,
अमावस में जलते
दीये की ज्योति है।
मीत है, प्रीत है,
शांति का गीत है।
शिव का नाद है,
राम की जीत है,
बुधिया की लाठी है,
सुगिया की बिन्दी है,
गंगा की धारा है,
भाषा सी हिन्दी है।
राम है, रहीम है,
जॉन और करतार है,
नजाकत, नफासत,
प्यार है, दुलार है।
तलवार की धार है,
वीरों की ललकार है,
कल है, आज है,
फिजा में आगा़ज है,
क्रांति का साज़ है,
जनता की आवाज है।
रचनाकार विवेक चन्द्र कावेरीन्यूज.कॉम से जुड़े हुए हैं। उनसे संपर्क करने के लिए [email protected] या फिर 09304044508 का सहारा ले सकते हैं।

