महीने भर की मियाद के बावजूद भले ही सरकारी बाबू सूचना का ससमय व सही जवाब नहीं दे पाते हों, मगर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी हुई योजनाओं से सम्बन्धित सूचना अब 15 दिन के अंदर उपलब्ध करानी होगी, जबकि अभी तक सूचना देने का निर्धारित समय 30 दिनों का है. राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने इस बाबत खाद्य सुरक्षा विधेयक में विशेष प्रावधान करने की ठान ली है. यानी अब पीडीएस और सरकार द्वारा चलाये जा रहे सभी योजनाओं में चल रहे घपले पर सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं की पैनी नज़र रहेगी. पिछ्ले कई दिनों से भ्रष्टाचार के चौतरफा आरोपों से घिरी केंद्र सरकार ने यह नया अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है. लब्बोलुआब यह कि अब सूचना देने के नाम पर आवेदकों को ज्यादा दिन तक टहलाया नहीं जा सकेगा.
दीगर यह कि भले ही देश में सूचना का अधिकार लागू हो गया है परन्तु अभी भी सरकार और सरकारी पदाधिकारी और बाबुओं द्वारा सूचना देने में काफी आनाकानी की जाती है, जिससे कि लोगों को ससमय सूचना नहीं मिल पाती है. राशन दुकान(पीडीएस), आंगनबाडी और मिड डे मील जैसे महत्वपूर्ण और जनोपयोगी योजनाओं में भ्रष्टाचार का जबरदस्त बोलबाला है. सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का यह आलम है कि कई सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं को जान से भी हाथ गंवाना पड़ा है. हालाँकि सूचना देने की मियाद घटाए जाने से सूचना अधिकार से जुड़े लोग जरूर ही रहत की साँस ले रहे हैं, मगर यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के इस आदेश के बाद सरकारी अधिकारी इसे कितनी गंभीरता से लेते हैं.
लेखक अनंत झा पिछले एक दशक से झारखंड की पत्रकारिता में सक्रिय हैं. प्रिंट और इलेक्ट्रानिक, दोनों मीडिया में काम करने का अनुभव है. इन दिनों यायावरी कर रहे हैं.

