पंजाब के पुलिस महानिदेशक चंद्रशेखर (रेलवे) की पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दाखिल स्टेट्स रिपोर्ट बताती है कि पंजाब में सोसाइटियों के नाम पर राजनीतिक और प्रभावशाली लोग पर्दे के पीछे बड़ा खेल कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी कई सोसाइटियों में नेताओं के अलावा आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक सोसाइटियों का गठन जिस उद्देश्य को लेकर किया गया था वह अब नहीं रहा है। रियल एस्टेट में पिछले एक दशक में आई तेजी से पंजाब भी अछूता नहीं रहा है। चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में कीमतें दस गुना से ज्यादा बढ़ी हैं। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है पंजाबी को-आपरेटिव बिल्डिंग सोसाइटी ने चंडीगढ़ के पास 21.2 एकड़ जमीन वर्ष 2003 में 8 करोड़ 19 लाख में खरीदी, जिसे वर्ष 2006 में टाटा हाउसिंग डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड को 96 करोड़ 59 लाख में बेच दिया। चार साल में दस गुना से ज्यादा का लाभ हुआ। योजना के मुताबिक सोसाइटी सदस्यों को फ्लैट भी मुहैया कराए जाने है।
यह सोसाइटी कोई छोटे-मोटे लोगों की नहीं बल्कि राजनीतिकों की है, इनमें सांसद और केंद्रीय मंत्री तक शामिल हैं। सोसाइटी पर आंच आई तो सदस्यों ने पार्टी मतभेद भुलाकर प्रेस कांफ्रेंस में किसी भी तरह की अनियमितताओं का खंडन किया। सोसाइटी के सदस्यों में पंजाब के कई मंत्री, विधायक, सांसद और पूर्व विधायक हैं। इनमें न केवल शिरोमणि अकाली दल बल्कि सहयोगी दल भाजपा, कांग्रेस बसपा और सीपीआई के सदस्य हैं।
जांच अधिकारी चंद्रशेखर की स्टेट्स रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर कहा जा सकता है कि निश्चित तौर पर ज्यादातर सोसाइटियों ने कायदे-कानून का उल्लंघन किया है। अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए कई नियमों में संशोधन कराया है। मामला उच्च न्यायालय में है और उम्मीद की जानी चाहिए कि यह भ्रम टूटेगा कि प्रभावशाली लोगों का कुछ नहीं बिगड़ता है और उनके काम बदस्तूर जारी रहते हैं। मुंबई की आदर्श बिल्डिंग सोसाइटी में जिस तरह से गड़बडिय़ां सामने आई हैं हो सकता है पंजाब की कई सोसाइटियों में भी इसी तरह के खुलासे हो।
लेखक महेन्द्र सिंह राठौड़ पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

