बिहार के विधायक राज किशोर केसरी की हत्या के बाद बिहार के उपमुख्य मंत्री सुशील मोदी के बयान से उठे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। 15 जनवरी को हत्या की अभियुक्त तथा बलात्कार की शिकार रुपम पाठक की मां ने पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में यह खुलासा किया कि एक कद्दावर भाजपा नेता के दबाव में रुपम पाठक ने न्यायालय में धारा 164 के तहत बदला हुआ बयान दिया था। रुपम पाठक के साथ हुये बलात्कार की जांच भी सीबीआई से करवाने की मांग की गई है तथा हत्या के बाद उपमुख्य मंत्री की बार-बार पूर्णिया जाने पर भी सवाल खडे किये गये हैं। संवाददाता सम्मेलन में रुपम पाठक की मां ने यह भी खुलासा किया कि रुपम के बैंक एकाउंट में जमा पैसे लोन तथा रुपम के पति के हैं और उसकी जांच से भी उन्हें परहेज नहीं है। जेल में रुपम पाठक के साथ बेहतर तरीके से मिलने नहीं देने का आरोप भी रुपम पाठक की मां कुमुद मिश्रा ने लगाया है।
बलात्कार का मुकदमा दर्ज होने के बावजूद विधायक केसरी और उसके सहयोगी बिपिन राय को गिरफ़्तार न किया जाना, पुलिस के पक्षपात को दर्शाता है। रुपम पाठक के अधिवक्ता द्वारा सोमवार 17 जनवरी को उच्च नयायालय पटना में रिट याचिका दाखिल कर दी गई है और बलात्कार की जांच भी सीबीआई से करवाने की मांग न्यायालय के समक्ष रखी गई है। इस पूरे प्रकरण में नीतीश कुमार की चुपी रहस्मय है। ऐसी संभावना है कि रिट याचिका दायर होने के बाद सरकार बलात्कार की जांच भी सीबीआई से करवाने का आदेश कर दे। कारण है जदयू द्वारा भाजपा पर लगाम लगाये रखने की मंशा। नीचे बिहार के अखबारों में रुपम पाठक की मां कुमुद मिश्रा एवं अधिवक्ता दिनेश कुमार द्वारा बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन की छ्पी खबर की कापी हैं।


लेखक मदन कुमार तिवारी बिहार के गया जिले के निवासी हैं. पेशे से अधिवक्ता हैं. 1997 से वे वकालत कर रहे हैं. अखबारों में लिखते रहते हैं. ब्लागिंग का शौक है. अपने आसपास के परिवेश पर संवेदनशील और सतर्क निगाह रखने वाले मदन अक्सर मीडिया और समाज से जुड़े घटनाओं-विषयों पर बेबाक टिप्पणी करते रहते हैं.

